यूज़र डाटा के लिए 10 हज़ार आवेदन मिले: फेसबुक

फ़ेसबुक
Image caption फ़ेसबुक ने हाल ही में स्वीडन में एक बड़ा डाटा केंद्र खोला है

सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फ़ेसबुक को अमरीका के सरकारी संस्थानों से यूज़र डाटा हासिल करने के लिए पिछले साल नौ से 10 हज़ार आवेदन हासिल हुए थे.

कंपनी ने एक बयान में कहा है कि साल की दूसरी छमाही के दौरान छोटे अपराध से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मसले का हवाला देते हुए यूज़रों के अकाउंट का ब्योरा मांगा गया.

एक पूर्व कंप्यूटर तकनीशियन द्वारा इस महीने किए गए खुलासे के मुताबिक अमरीका में बहुत बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक जासूसी अभियान को अंजाम दिया जा रहा है. ये अभियान उससे कहीं बड़ा है जिसका अंदाज़ा लोगों को था.

हालांकि अमरीका का कहना है कि इस अभियान की वजह से ही उसे दर्जनों आतंकवादी हमलों को रोकने में मदद मिली.

भारत की ओर से भी फ़ेसबुक से आपत्तिजनक सामग्री हटाने के लिए गुज़ारिश की गई थी और कंपनी ने पिछले साल देश की एक अदालत के आदेश का पालन करते हुए अपनी साइटों से आपत्तिजनक सामग्री हटा ली थी.

आक्रामक तरीके

फ़ेसबुक के टेड उलियट ने कंपनी के एक ब्लॉग पोस्ट में कहा है कि कंपनी से कई तरह की तहक़ीकात के लिए निवेदन किया गया है मसलन बच्चों के लापता होने, संघीय सरकार द्वारा भगोड़ा क़रार दिए गए मसले, स्थानीय स्तर के अपराध, चरमपंथी ख़तरे.

हालांकि उलियट ने ऐसे कोई संकेत नहीं दिए कि कंपनी ने किस हद तक इन गुज़ारिशों पर कार्रवाई की है लेकिन उनका कहना था कि फ़ेसबुक ने आक्रामक तरीके से अपने यूज़रों के डाटा की सुरक्षा की है.

उनका कहना है, "हम अकसर ऐसे निवेदनों को सिरे से ख़ारिज कर देते हैं. हम सरकार से भी ऐसे निवेदन कम करने की बात कहते हैं या सीधे तौर पर सरकार जितने डाटा की मांग करती है उससे कम ही सूचनाएं हम मुहैया कराते हैं."

सेंध

Image caption कंपनियों का कहना है कि वह यूजर डाटा को बेहद सुरक्षित रखती है

इस महीने की शुरुआत में पूर्व कंप्यूटर तकनीशियन एडवर्ड स्नोडेन ने प्रिज़्म नामक एक योजना का ख़ुलासा किया था जिसे अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) ने शुरू किया.

गार्डियन और वॉशिंगटन पोस्ट जैसे अख़बारों ने इससे जुड़े दस्तावेजों को प्रकाशित कर एनएसए पर आरोप लगाया था कि यह सीधे तौर पर फ़ेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट, ऐपल और गूगल जैसी कंपनियों के सर्वर तक सीधी पहुंच बनाता है.

हालांकि इन कंपनियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे सर्वर तक पहुंचने की इजाज़त किसी को नहीं देते लेकिन वैध तरीके से अगर कोई सूचनाओं के लिए निवेदन करता है तो वे उस पर ग़ौर करते हैं.

29 वर्षीय स्नोडेन, अख़बारों द्वारा रहस्योद्धाटन की ख़बरें छापने से पहले ही अमरीका से हांगकांग चले गए.

फिलहाल वह लापता हैं और उन्होंने अमरीकी प्रत्यर्पण के विरोध में जाने का फैसला किया है जिसके तहत अमरीकी सरकार उन पर मुक़दमा चलाने की कोशिश कर सकती है.

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