हैरान करती हैं अंतरिक्ष की ये तस्वीरें

Image caption (कॉपीराइट- मार्टिन पग)

लंदन के नेशनल मैरीटाइम म्यूज़ियम में इन दिनों विज़न ऑफ़ यूनिवर्स नाम की प्रदर्शनी चल रही है. इसकी ख़ासियत है अंतरिक्ष के सौ से ज़्यादा दिलचस्प और रोमांचक चित्र.

ये तस्वीर वर्लपूल गैलेक्सी (एम51) की है. इस तस्वीर को 2012 में अंतरिक्ष के सबसे बेहतरीन फोटोग्राफ़ का अवार्ड मिला था.

Image caption (कॉपीराइट- नासा/ ईएसए और जे मेज़ एपेलानिज़)

इन तस्वीरों से ये जाहिर होता है कि समय के साथ टेलिस्कोपी और फोटोग्राफ़ी की तकनीक बेहतर हुई है.

(मंगल यात्रा पर जाना चाहते हैं आप)

इस तस्वीर को देखने के बाद ज़्यादातर लोगों को आकलन यही है कि फोटोग्राफ़ी ने अंतरिक्ष की अनजानी दुनिया में ताकझांक को आसान बना दिया है.

Image caption (कॉपीराइट- नासा/ ईएसए/ हब्बलएसएम4 ईआरओ टीम, हब्बल टेलीस्कोप, 2009)

इस प्रदर्शनी में दिखाई जा रही तस्वीरों में अंतरिक्ष के अंदर समय के साथ हो रहे बदलावों को भी खूबसूरती से दर्शाया गया है. ये प्रदर्शनी नेशनल मैरीटाइम म्यूज़ियम में 15 सितंबर, 2013 तक चलेगी.

अंतरिक्ष जगत की मनमोहक तस्वीरों को क्यूरेट करने में रॉयल ऑब्जरेवटरी संस्था के अंतरिक्ष वैज्ञानिक मारेक कुकुला की भूमिका अहम रही है.

चंद्रमा की चांदनी

Image caption (कॉपीराइट- नासा/ जीएसएफसी/डीएलआर/ अरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी)

मसलन चंद्रमा की इसी तस्वीर को देखिए. चंद्रमा की तस्वीर को साइंटिफिक ढंग से तैयार किया गया है. इसमें लाल रंग वाला हिस्सा बताता है कि चंद्रमा की परत पर ये ऊंचाई वाली जगहें हैं.

(जब अंतरिक्ष में बंधा सुरों का समां)

इसके बाद जैसे-जैसे ऊंचाई कम होती जा रही है, वैसे-वैसे इलाके का रंग हरा, नीला में तब्दील होता जा रहा है.

1959 से पहले चंद्रमा की ऐसी तस्वीर के बारे में किसी ने सोचा नहीं था. तत्कालीन सोवियत संघ के अंतरिक्ष यान लूना-3 उपग्रह चंद्रमा का बेहद नजदीकी तस्वीर लेने में सफल रहा था.

आग का धधकता गोला

Image caption (कॉपीराइट- रॉयल स्वीडिश अकादमी ऑफ़ सांइसेज़)

वहीं सूर्य की गर्मी से उसकी परत का अंदाजा लगाया जा सकता है. अगर आप स्वीडिश सोलर टेलिस्कोप की मदद से ली गई इस तस्वीर को देखेंगे, तो आपको सहज अंदाजा हो जाएगा कि सूर्य आखिर आग का गोला क्यों कहलाता है.

Image caption (कॉपीराइट- नासा/ ईएसए/ हब्बल हेरिटेज टीम)

अंतरिक्ष में कोई बार दो आकाशगंगा एक दूसरे के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में आ जाती हैं और कई बार तो ऐसा भी होता है कि दो आकाशगंगाएं कुछ साल बाद एक आकाशगंगा में तब्दील हो जाती हैं. जैसा कि ऊपर की तस्वीर में हुआ है. ये तस्वीर हब्बल टेलीस्कोप के जरिए 2010 में ली गई थी.

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