पाकिस्तान छोड़ कनाडा चला गया रिमशा का परिवार

  • 30 जून 2013
Image caption रिमशा को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने ईश निंदा आरोपों से बरी कर दिया था

पाकिस्तान में ईश निंदा के आरोप में अदालत से बाइज्जत बरी होने वाली ईसाई लड़की रिमशा मसीह और उनका परिवार देश छोड़कर कनाडा चला गया है.

इस्लामाबाद में वरिष्ठ पत्रकार एहतेशाम उल हक ने बीबीसी को बताया कि अदालत से बाइज्जत बरी होने के बाद से ही रिमशा के परिवार को लगातार धमकियां मिल रही थीं, जिसकी वजह से वे लोग पिछले काफी समय से देश छोड़ने की योजना बना रहे थे.

एहतेशाम उल हक ने बताया, “रिमशा का परिवार इस डर में था कि यहां रहने पर कहीं उसकी हत्या न कर दी जाए. उन लोगों ने इस्लामाबाद स्थित विदेशी मिशन से संपर्क किया और ईसाई होने के नाते उन्हें आसानी से कनाडा में न सिर्फ शरण मिल गई, बल्कि कनाडा ने रिमशा समेत उसके परिवार के सभी सदस्यों को नागरिकता भी दे दी.”

उनके मुताबिक पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों में असुरक्षा की भावना बहुत ज्यादा है.

एहतेशाम का कहना था कि पाकिस्तान में नई सरकार ने अल्पसंख्यक समुदाय के हितों की रक्षा के तमाम दावे किए थे लेकिन सरकार बनने के कुछ ही हफ्तों के भीतर इस तरह की घटना उन दावों पर सवाल खड़ा करती है.

उनका कहना था कि रिमशा के परिवार वाले पिछले काफी समय से गुपचुप तरीके से देश छोड़ने की योजना बना रहे थे और इस पूरे अभियान को काफी गोपनीय रखा गया,

एहतेशाम उल हक के मुताबिक पाकिस्तान में दूसरे अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी काफी असुरक्षित महसूस करते हैं. इसका उदाहरण हिन्दू समुदाय के तमाम लोगों का देश छोड़कर भारत चले जाना है.

कुरान जलाने का आरोप

पाकिस्तान में ईसाई समुदाय की एक लड़की रिमशा को पिछले साल अगस्त में गिरफ़्तार किया गया था.

एक मौलवी हफ़ीज़ मोहम्मद ख़ालिद चिश्ती ने उन पर क़ुरान जलाने का आरोप लगाया था.

पाकिस्तान में कथित रूप से क़ुरान जलाने की अभियुक्त 14 वर्षीय ईसाई किशोरी रिमशा मसीह के ख़िलाफ़ ईशनिंदा का मामला पिछले साल ही राजधानी इस्लामाबाद स्थित हाईकोर्ट ने ख़ारिज कर दिया था.

कड़ी सुरक्षा में रिमशा को हिरासत में रखे जाने के मामले की अंतरराष्ट्रीय जगत में काफी चर्चा हुई थी.

हालांकि अदालत ने रिमशा के ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया था लेकिन रिमशा और उनके परिवार के लोगों को लगातार धमकियां मिल रही थीं, जिसकी वजह से ये लोग छिपकर रहने के लिए विवश थे.

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