'भले जेल हो जाए, नहीं बताऊंगा तोते का पता'

निशाचरी तोते
Image caption माना जा रहा है कि इस अद्भूत तोते को पिछले 100 सालों में पहली बार देखा गया है.

ऑस्ट्रेलिया के एक प्रकृतिविद् ने अपने कैमरे में ऐसे दुर्लभ तोते की तस्वीर और आवाज कैद की है जो निशाचर प्रकृति का है. माना जा रहा है कि इस तोते को 100 साल बाद देखा गया है.

पक्षियों की खोज-खबर रखने वाले इस प्रकृतिविद् का नाम जॉन युंग है. उन्होंने इस तोते का वीडियो लिया और उसकी आवाज भी रिकार्ड की. इस तोते को ‘पेजोपोरस आक्सिडेन्टलाइज’ के नाम से जाना जाता है.

उनका कहना है कि वो ये नहीं बताएंगे कि उन्हें ये हरा और पीला तोता कहां मिला, चाहे उन्हें जेल ही जाना क्यों न पड़े.

वे नहीं चाहते हैं कि क्वींसलैंड के 'लेक आयर' बेसिन के उस दूरदराज वाले रेतीले इलाके में पक्षियों का जमावड़ा लगने लगे.

विलुप्त होने की कगार पर

विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके और दुनिया के सबसे रहस्यमयी पक्षियों में से एक माने जाने वाले इन तोतों के बारे में वैज्ञानिकों के पास बहुत ही कम जानकारी है.

इन तोतों का पता लगाने के लिए कई साल तक अभियान चलाए गए. इनमें पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में 'लेक डिसअप्वॉन्टमेंट' झील के इर्द-गिर्द चला मशहूर अभियान भी शामिल है जो विफल रहा था.

तोते की इस प्रजाति के अधिकांश जिंदा नमूने 19वीं शताब्दी में पाए गए थे. दुनिया भर में विभिन्न संग्रहालयों में इनकी मृत देह को संरक्षित कर रखा गया है.

पिछले 100 सालों में इन निशाचर तोतों के मिलने की अपुष्ट खबरें मिलीं हैं. एक बार ऐसे दो तोते मिले थे, लेकिन वे मरे हुए थे. इस पक्षी के विलुप्त हो जाने की आशंकाएं जताई जाती रही हैं.

जंगल का जासूस

और अब युंग सामने आए हैं, जो खुद को प्रकृति के रहस्यों की थाह में लगा जंगल का जासूस बताते हैं. वे अपने साथ ऐसी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग लाए हैं जिसके बारे में उनका कहना है कि यह उस निशाचरी तोते के जिंदा होने का प्रमाण है.

उनकी बात से कई विशेषज्ञ सहमत दिख रहे हैं.

ऑस्ट्रेलियन नेशनल वाइल्डलाइफ कलेक्शन के निदेशक डॉ. लियो जोसेफ ने बीबीसी को बताया, “युंग ने जो तस्वीर ली है वह मैगजीन के मुखपृष्ठ के आकार की है. इसके आकार को देखकर कहा जा सकता है कि यह तस्वीर किसी और पक्षी की नहीं हो सकती. अगर ये तस्वीरें झूठी भी हैं तो सचमुच अदभुत हैं.”

स्वभाव से शर्मीला

Image caption दुनिया के सबसे वज़नदार पक्षियों में से एक सोन चिरैया की प्रजाति लुप्त होने की कगार पर है

स्वभाव से शर्मीले माना जाने वाले इन तोतों पर पक्षीविज्ञानी मोहित हैं. कुछ तो इसलिए मोहित हैं कि यह एक दुर्लभ प्रजाति का पक्षी है. माना जा रहा है कि ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में इन तोतों की संख्या लगभग 250 हो सकती है.

इन तोतों की गिनती घट रही है. इसका कारण जंगली बिल्ली और लोमड़ियों को माना जा रहा है, जो उनका शिकार कर लेती हैं.

युंग ने अधिकारियों को उस जगह के बारे में बताया जहां उन्होंने इन तोतों को देखा गया. मगर युंग ने तय किया है कि वे इस सूचना को सार्वजनिक नहीं करेंगे.

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