चीन: मुफ्त कोयला नीति कर रही है उम्र छोटी

Image caption मुफ्त कोयला नीति अब चीनी सरकार के गले की हड्डी बन गई है

चीन में लोगों को घर गर्म करने के लिए मुफ्त में कोयला देने की सरकार की नीति, लोगों के जीवन के साढ़े पांच साल कम कर रही है.

एक अध्ययन के मुताबिक़ कोयला जलाने से हुआई नदी के उत्तरी इलाक़े में जो प्रदूषण फैल रहा है वे दक्षिणी इलाक़े की तुलना में 55 फीसदी ज्यादा है. इस उत्तरी इलाक़े में क़रीब पचास करोड़ लोग रहते हैं.

इस क्षेत्र में लोगों को दिल और फेफड़े की बीमारी के मामले काफ़ी ज्यादा हैं.

ये अध्ययन चीन, अमरीका और इसराइल के शोधकर्ताओं ने मिलकर किया है.

इन शोधकर्ताओं ने प्रदूषण और उससे होने वाली मौत को लेकर 90 शहरों में अध्ययन किया. ये अध्ययन 1981 से 2000 के बीच चीन के उत्तर और दक्षिणी भाग में किया गया.

प्रदूषण

इन लोगों ने विशेष तौर पर प्रदूषण के एक प्रकार का अध्ययन किया जिसे टोटल संस्पेंडेड पार्टिकुलेटस यानी टीएसपी कहते हैं, जो कालिख और धुएं में पाया जाता है.

प्रदूषण के इस प्रकार का अध्ययन करने के बाद इन शोधकर्ताओं ने 1991 से 2000 के बीच हुई लोगों की मौत के आंकड़ो का आकलन किया. इस आकलन में इन शोधकर्ताओं ने पाया कि जो इलाक़े 'कोयला मुक्त' थे उनमें छोटी जीवन दर होने के सबूत नहीं मिले.

दी नेशनल एकेडेमी ऑफ़ साइंस में छपे अध्ययन के मुताबिक़, ''देश के उत्तरी भाग में जीवन दर साढ़े पांच साल कम है क्योंकि वहां दिल और सांस की बीमारी से मौते होने के मामलों में बढ़ोतरी हुई है.''

Image caption पिछले साल चीन में वायु प्रदूषण में काफी बढो़तरी हुई थी.

अध्ययन में कहा गया है, ''आकलन से पता चलता है कि हुआई नदी नीति के अनुसार लोगों को घर के अंदर गर्मी प्रदान करवाने वाले इस प्रशंसनीय लक्ष्य का स्वास्थय पर घातक प्रभाव हो रहा है.''

वैज्ञानिकों का कहना है कि उनके इस अध्ययन से जो परिणाम सामने आए है उससे उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं जैसे ब्राज़ील या भारत अपनी आर्थिक प्रगति के साथ-साथ जन स्वास्थ्य की रक्षा के बीच तालमेल के बेहतर तरीक़े निकाल सकते हैं.

बीजिंग में मौजूद बीबीसी संवाददाता मार्टिन पेशंस के अनुसार अब माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के परिणाम चीनी प्रशासन पर प्रदूषण से निपटने के लिए और क़दम उठाने का दबाव बढ़ाएंगे.

इस साल की शुरुवात में वायु प्रदूषण का स्तर पिछले सालों के मुक़ाबले बढ़ने के कारण सरकार को लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा था. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी प्रदूषण के इस बढ़े हुए स्तर को घातक बताया था.

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