'भारत में 54 फीसदी रिश्वत देते हैं तो जापान में एक फीसदी'

Image caption तीन में से एक देश मानते है कि पुलिस घूस लेने में सबसे आगे है

दुनिया भर में भ्रष्टाचार पर नज़र रखने वाली संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशल के सर्वेक्षण के अनुसार हर दो में से एक व्यक्ति मानता है कि पिछले दो साल में भ्रष्टाचार की स्थिति बदतर हुई है.

संस्था के सालाना 'ग्लोबल करप्शन बैरोमीटर' में हिस्सा लेने वाले 27 फीसदी लोगों का कहना था कि उन्होंने पिछले साल सार्वजनिक सेवाएं लेने के लिए घूस दी थी. इस सर्वेक्षण में 100 से ज्यादा देशों के लोग शामिल किए गए.

बीबीसी के कार्यक्रम 'न्यूज़ आवर' के प्रस्तोता टीम फ्रेक्स का मानना है कि अब भ्रष्टाचार को लेकर धारणा बदलने का समय आ गया है.

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशन के अनुसार भ्रष्टाचार एक वैश्विक महामारी बन गई है, एक ऐसी बीमारी जो संक्रमित करती है और सड़ा देती है.

फैलता भ्रष्टाचार

सर्वेक्षण में शामिल ज्यादातर लोगों का मानना है कि भ्रष्टाचार का दायरा फैलता ही जा रहा है. और इसे लेकर लोगों की प्रतिक्रिया भी यही होती है कि ये दूसरों की दिक्कत है या फिर वो अपने कंधे उचका कर कहते हैं - भ्रष्टाचार हमेशा रहा है और हमेशा रहेगा.

सर्वे में भारत से शामिल 54 फ़ीसदी लोगों ने रिश्वत देने की बात मानी जबकि पड़ोसी पाकिस्तानी में ऐसे लोगों की संख्या 34 फ़ीसदी पाई गई. सर्वे में सबसे ज्यादा लाइबेरिया से 75 फ़ीसदी लोगों ने रिश्वत देने की बात कही जबकि जापान और डेनमार्क में ऐसे लोगों की तादाद एक एक प्रतिशत रही.

सबसे ज्यादा रिश्वत के चलन से पीड़ित अन्य देशों में यमन में 74 फ़ीसदी, कीनिया में 70 फ़ीसदी और जिम्बाब्वे में 62 फ़ीसदी लोगों ने रिश्वत देने की बात कही.

Image caption अमरीका और ब्रिटेन भी मानते है कि भ्रष्टाचार बढ़ा है

ये जीवन की एक ऐसी सच्चाई है जो दबे छिपे रूप में मौजूद है. बर्लिन स्थित ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने भ्रष्टाचार पर सर्वेक्षण करने के लिए 107 देशों के एक लाख 14 हज़ार लोगों से बातचीत की. इनमें से ज्यादातर लोगों का कहना था कि पिछले दो सालों में स्थिति खराब हुई है.

गरीब देश में इस बात की संभावना दोगुनी होती है कि आपको काम करवाने के लिए घूस देनी होगी. एक तिहाई देशों में पुलिस घूस लेने में सबसे आगे है. वहीं 20 फीसदी देशों में न्यायपालिका इस मामले में अव्वल देखी गई. कुल मिलाकर सर्वेक्षण में शामिल चार में से एक व्यक्ति ने माना कि उन्होंने अपना काम करवाने के लिए घूस दी थी.

भ्रष्टाचार के रूप

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के मुताबिक इसमें केवल अधिकारियों के हाथ गर्म करना शामिल नहीं है बल्कि घूस लेने वालों में राजनीतिक पार्टियां भी शामिल है 'जिन पर लोकतंत्रों का दारोमदार होता है'. आम लोग पार्टियों को सबसे भ्रष्ट सार्वजनिक संस्थान के तौर पर देखते हैं.

लेकिन भ्रष्टाचार केवल घूस से संबंधित नहीं है. तीन में से दो लोगों का मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र में काम करवाने के लिए निजी संबंध भी मदद करते हैं, तो दो में से एक का कहना है कि सरकार उन गुटों से भी काफी हद तक प्रभावित रहती है जिनके अपने निजी हित जुड़े रहते हैं.

ट्रांसपेरेंसी का कहना है कि अमरीका और ब्रिटेन के लोग भी मानते है कि भ्रष्टाचार बढ़ रहा है. हालांकि अजरबेजान, कंबोडिया, जॉर्जिया, सूडान और दक्षिण सूडान में लोगों का मानना है कि पिछले दो सालों में भ्रष्टाचार कम हुआ है.

संस्था का कहना है कि अगर सरकार भ्रष्टाचार को हटाना चाहती है तो जवाबदेही की एक प्रणाली का गठन करना होगा और लोगों को घूस देने से इंकार करना होगा.

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