भारत में बनी दवाओं पर ब्रिटेन में रोक

दवा लेता एक मरीज
Image caption नियामक एजेंसी ने कहा है कि मरीज दवाइयों का सेवन जारी रख सकते हैं.

ब्रिटेन में दवाओं पर निगरानी रखने वाली संस्था ने नियमित निरीक्षण में नाकाम होने पर भारत में निर्मित 16 दवाओं को बाज़ार से हटाने के लिए कहा है.

चिकित्सा और स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों विनियामक एजेंसी (एमएचआरए) ने दवा बेचने वाले दुकानदारों से दवा कंपनी वोकहार्ड्ट द्वारा भारत के वालुज स्थित फेक्ट्री में निर्मित दवाओं को वापस करने के लिए कहा है.

जिन दवाइयों पर रोक लगाई गई है वे मधुमेह, मानसिक असंतुलन और थायराइड की बीमारियों में इस्तेमाल की जाती हैं.

हालाँकि नियामक एजेंसी ने कहा है कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा का पता चलता हो.

निरीक्षण में फेल होने वाली दवाओं में टाइप 2 डायबीटीज में इस्तेमाल की जाने वाली मेटफॉर्मिन, गलप्रदाह एवं उच्च रक्तचाप के इलाज में इस्तेमाल की जानेव वाली एटेनोलोल, पार्किंसन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली प्रॉमीपेक्सोल, मानसिक असुंतलन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली रिस्पेरीडोन एवं ब्लड क्लोट के लिए इस्तेमाल की जाने वाली क्लॉपीडोग्रेल शामिल हैं.

बिक्री से हटाई गई 16 दवाओं में पाइनवुड लेब्रोट्रीज लिमिटेड द्वारा वालुज से आयात की जाने वाली एरीथ्रोमॉयसिन भी शामिल है. यह एंटीबॉयटिक दवा बच्चों को दी जाती है.

हालाँकि नियामक एजेंसी एमएचआरए ने कहा है कि मरीजों को अपनी दवाइयाँ वापस करने की जरूरत नहीं है और वह पहले से खरीदी गई दवाइयों का सेवन जारी रख सकते हैं.

एमएचआरए ने कहा कि बिक्री से हटाई जाने वाली दवाओं के अन्य संस्करण बाज़ार में मौजूद हैं. यदि यह उपलब्ध नहीं हैं तो डॉक्टर अन्य दवाइयाँ भी लिख सकते हैं.

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मरीज़ो को ख़तरा नहीं

एमएचआरए की ओर से जारी किए गए एक बयान में कहा गया है कि वह लोगों के घरों में मौजूद दवाओं को वापस करने के लिए नहीं कह रही है. हालाँकि यह दवाएं विनिर्माण मानकों पर खरी नहीं उतरती लेकिन ब्रिटेन में बिकने वाली इन दवाओं से मरीजों की सेहत को खतरे के सबूत नहीं मिले हैं.

एजेंसी ने कहा, 'दवाएं बाज़ार से हटाने की कार्रवाई जनहित में की जा रही है और खराब विनिर्माण मानकों को जारी नहीं रहने दिया जाएगा.'

मार्च में वालुज स्थित फेक्ट्री का निरीक्षण किया गया था. निरीक्षण में खराब सफाई प्रक्रिया के कारण संदूषण के खतरे और बिल्डिंग के वेंटिलेशन में खामियां पाईं गईं थी.

स्टाफ की ट्रेनिंग से संबंधी कागज़ात के जाली होने के सबूत भी नियामक एजेंसी को मिले थे.

एमएचआरए ने कहा है कि वह वोकहार्ड्ट और अंतरराष्ट्रीय नियामकों के साथ मिलकर मामले को निबटाने में लगी है.

एमएचआरए के निरीक्षण निदेशक गेराल्ड हेड्डेल ने कहा, "दवाइयों को एहतियात के तौर पर वापस बुलाया गया है."

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