दिल की बीमारी के लिए ख़तरा है वायु प्रदूषण

Image caption विशेषज्ञों के अनुसार मास्क पहनने का बाद भी वायु प्रदूषण से खतरा हो सकता है.

एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में यह बात सामने आई है कि कमज़ोर दिल वालों के लिए वायु प्रदूषण नुकसानदायक साबित हो रहा है. वायु प्रदूषण दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों की जान भी ले सकता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन में वायु प्रदूषण का शिकार होने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है.

इस अध्ययन के लिए दि लैंसट को वित्तीय सहायता देने वाले ब्रिटिश हेल्थ फाउंडेशन ने कहा है कि इंग्लैंड को अपने कई शहरों के वायु प्रदूषण से छुटकारा पाना ही होगा. इन शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर यूरोपीय संघ के सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं है.

ब्रितानी सरकार ने पहले ही यह स्वीकार किया है कि 2020 तक ब्रिटेन के 15 क्षेत्रों में वायु प्रदूषण यूरोपीय संघ के मानकों के अनुरूप नहीं होगा.

लेकिन डेफ्रा (ब्रितानी प्रदूषण, खाद्य एवं ग्रामीण मंत्रालय) ने कहा कि वह ब्रिटेन में वायु को स्वच्छ और यूरोपीय संघ के मानकों के अनुरूप किसी भी प्रकार के प्रदूषण से मुक्त बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.

वायु प्रदूषण का मुख्य कारण गाड़ियों से निकलने वाला धुआँ है जिसे पहले से ही हृदयाघात का एक कारण माना जाता रहा है लेकिन इसे हृदयगति रुक जाने का कारण नहीं माना जाता.

हृदयाघात हृदय की माँस-पेशियों के कमज़ोर और शरीर में रक्तसंचार में अक्षम होते जाने से होता है. इंग्लैंड में हर साल लगभग साढ़े सात लाख लोग हृदयाघात के शिकार होते हैं.

फेफड़ों के रास्ते घुसता है खतरा

लैंसट शोध में इंग्लैंड, अमरीका और चीन जैसे बारह देशों के हज़ारों मरीज़ों के आँकड़ों का अध्ययन किया गया है.

इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण कार्बन मोनोआक्साइड और नाइट्रोजन जैसी गैसें हैं. साथ ही बसों, टैक्सियों और लॉरियों से निकलने वालों धुएँ के महीन कण भी इसका एक बड़ा कारण हैं. ये गैसें और ये कण आदमी के फेफड़ों के रास्ते से रक्त में चले जाते हैं और स्वास्थ्य के लिए खतरा बनते हैं.

जिन लोगों को पहले से ही हृदय की बीमारी है, व्यस्त सड़कों के किनारे रहने या उन पर यात्रा करने से उन्हें नुकसान पहुँचने की संभावना काफी ज्यादा रहती है. यह खतरा उस दिन सबसे ज्यादा होता है जिस दिन ऐसा व्यक्ति प्रदूषण से सीधे सम्पर्क में आता है.

इस अध्ययन से जुड़े डॉक्टर अनूप शाह कहते हैं कि वायु प्रदूषण में मामूली सुधार हो जाने से अमरीकी अस्पतालों में हृदयगित रुक जाने के कारण हर साल आने वाले 8,000 मामलों को रोका जा सकता है. “और ऐसा कोई कारण नहीं है कि इंग्लैंड में ऐसा न किया जा सके.”

क्लाइंट अर्थ लॉबी ग्रुप के एलेन एण्ड्रूज ने कहा, “इंग्लैंड में वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या है, खासकर सड़क यातायात से और इसके प्रति सरकार का रवैया बद से बदतर होता जा रहा है.”

एलेन कहते हैं कि लोगों को वायु प्रदूषण बढ़ने पर सावधान हो जाना चाहिए ताकि वे सड़क यातायात से बचकर या घरों में रहकर अपनी सुरक्षा कर सकें.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पूरी दुनिया में वायु प्रदूषण से हर साल 13 लाख लोगों की मृत्यु होती है.

इंग्लैंड में वायु प्रदूषण से हर साल करीब 30,000 लोगों की मृत्यु होने का अनुमान है. वायु प्रदूषण से अस्थमा, फेफड़े से संबंधित अन्य रोगों के साथ ही दिल से जुड़ी बीमारियों के होने का ख़तरा रहता है. इससे कैंसर भी हो सकता है.

इंग्लैंड के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने हाल में ही राष्ट्र के स्वास्थ्य के बारे में अपनी पहली सालाना रिपोर्ट में वायु प्रदूषण के प्रभाव से आगाह किया था. उन्होंने बताया था कि इंग्लैंड में होने वाली मौतों के दस प्रमुख कारणों में वायु प्रदूषण भी एक है.

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