मुस्लिम ब्रदरहुडः अपने ही घर में घट रही साख?

Image caption मिस्र की जनता के लाखों की तादाद में सड़कों पर उतरने के बाद सेना ने मुर्सी को सत्ता से हटा दिया था.

मिस्र की राजधानी काहिरा के उत्तर-पूर्व में 150 किलोमीटर दूर स्थित इस्माइलिया शहर मुस्लिम ब्रदरहुड के लिए प्रतीकात्मक अर्थ रखता है.

यही वो शहर है जहाँ साल 1928 में मिस्र के सबसे बड़े और शक्तिशाली मुस्लिम गुट, मुस्लिम ब्रदरहुड की शुरुआत हुई.

शहर में मौजूद अल-रहमा मस्जिद इस गुट का पहला मुख्यालय बना. यहीं से ब्रदरहुड के सफर की शुरुआत हुई.

इतिहास पर नजर डाली जाए तो अपने सेवा कार्यों से गुट को काफी सम्मान और लोकप्रियता मिली. जमीनी स्तर पर लोगों का समर्थन और अटूट विश्वास मिला.

सबकी भलाई

एक मोहल्ले की तंग गली के किनारे स्थित एक मकान में रमजान के दौरान गरीब परिवारों में बांटने के लिए टनों खाद्यान्न रखा हुआ है.

ब्रदरहुड के युवा कार्यकर्ता चीनी, चावल और आटे से भरी बोरियां मकान से ला-लाकर बाहर खड़े ट्रकों में लाद रहे हैं.

52 साल के बिजली मिस्त्री शुकरी खालिद बताते हैं, “मुस्लिम ब्रदरहुड वर्षों से यहाँ के लोगों की भलाई के काम में लगा हुआ है.”

ख़ालिद ने कहा, “उन्होंने गरीबों, अनाथों की सहायता की. यही नहीं, प्रेमी युगलों की शादी करवाने में भी मदद की. ये सब उन्होंने अल्लाह के लिए किया- इसमें उनका कोई निजी स्वार्थ नहीं.”

खालिद को बेहद अफसोस है कि ब्रदरहुड का प्रतीक रहे पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी की सत्ता छीन जाने के बाद से इस्माइलिया में लोगों के बीच ब्रदरहुड के प्रति असंतोष बढ़ रहा है.

खालिद अफसोस जताते हुए कहते हैं, “बड़े शर्म की बात है कि लोग संघर्ष और अच्छे कामों के लंबे सुनहरे इतिहास को भूलकर पुरानी सत्ता के साजिशकर्ताओं की बातों में आ रहे हैं.”

सबसे बड़ा संकट

Image caption मिस्र के आम लोग रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि से बेहद खफा हैं.

पिछले महीने मुर्सी के एक साल की सरकार के ख़िलाफ उठी विरोध की लहर में बड़ी संख्या में शहर के लोग शामिल हो गए.

गुस्साई भीड़ सड़कों पर निकल पड़ी. विरोध जताते हुए लोग मुर्सी को सत्ता हथियाने वाला और अर्थव्यवस्था को ढहने से बचाने में नाकाम व्यक्ति बता रहे थे.

गुट अपनी स्थापना के बाद से अब तक के सबसे गंभीर संकट का सामना कर रहा है. इसने बड़ी संख्या में लोगों का विश्वास खो दिया है और वह भी अपने ही जन्म स्थान में.

इस्माइलिया में अब शायद ही कोई ब्रदरहुड के सर्मथन में अपनी भावनाएं खुलेआम ज़ाहिर करता है.

आम मिस्रवासियों के लिए बुनियादी ज़रूरत की चीजों की बढ़ती कीमत एक बड़ा मसला है.

शहर के विभिन्न इलाके में अपनी यात्रा के दौरान हमें अपदस्थ राष्ट्रपति या उनके गुट का समर्थन करने वाला इक्का-दुक्का पोस्टर ही दिखा.

“वापस जाओ”

बल्कि शहर की मुख्य सरकारी इमारत के दीवार पर ब्रदरहुड के विरोध में कई पेंटिंग्स मिलीं.

इनमें से एक पेंटिंग के नीचे लिखा था, “वापस जाओ” जबकि दूसरे पर लिखा थाः “मुस्लिम ब्रदरहुड का शासन नहीं चाहिए”

यहाँ ब्रदरहुड के प्रति लोगों में इतना असंतोष क्यों है? इस सवाल का जवाब हमें पास ही स्थित बाजार में जाने पर मिला.

रोज़मर्रा की जरूरत की चीजों के दाम पिछले एक साल में नाटकीय ढंग से बढ़े हैं. स्थानीय लोगों ने बताया, “हम मुर्सी का शासन खत्म होने का और तीन साल इंतजार नहीं कर सकते थे.”

आर्थिक नाकामी

49 साल के मोहम्मद गाद कहते हैं, “आप बाजार से एक पैकेट मक्खन लाते हैं. घर आने पर पता चलता है कि इसको इस्तेमाल करने की तारीख बीत गई है, तो आप क्या करते हैं? आप उसे फेंक देते हैं.”

मोहम्मद ने कहा, "मुर्सी का एक साल का कार्यकाल बेहद विफल रहा. यही वजह है कि मिस्र के लोगों ने सेना की मदद से उनके ख़िलाफ़ विद्रोह कर दिया है."

पूर्व ब्रदरहुड के हृदयस्थल में बसने वाले अधिकांश लोग यही मानते हैं कि पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ उठे असंतोष को सेना ने भरपूर समर्थन दिया.

शहर के कुछ लोगों को ही पिछले महीने हुआ तख्तापलट याद होगा.

ज्यादातर लोग इसी बात से खुश हैं कि जनरल की सत्ता में वापसी हो गई है. चाहे कुछ समय के लिए ही सही.

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