मिस्र: प्रदर्शनकारियों को सेना की चेतावनी

मिस्र में प्रदर्शन करते लोग

मिस्र की सेना ने आगाह किया है कि वो हिंसा और आतंकवाद का सामना करने के लिए बल का प्रयोग करेगी.मिस्र में अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के समर्थक और विरोधी शुक्रवार को रैलियां कर रहे हैं.

मिस्र के सेना प्रमुख जनरल अब्दुल फ़तह अल शेसी ने अभी हाल में ही चरमपंथ से मुक़ाबला करने के लिए सेना को समर्थन देने के लिए शुक्रवार को प्रदर्शन करने की अपील की थी.

उम्मीद की जा रही है कि अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के समर्थक भी उनकी बहाली की मांग की लेकर प्रदर्शन करें.

मुर्सी तीन जुलाई से हिरासत में है. संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें रिहा करने की अपील की है.

जीत की बरसी

देश में पहली बार लोकतांत्रिक तरीके से हुए राष्ट्रपति चुनाव में मिली मुर्सी की जीत की वर्षगाँठ पर आयोजित विरोध-प्रदर्शन के बाद सेना ने उन्हें अपदस्थ कर दिया था.

गुरुवार को जारी एक बयान में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने मिस्र की सेना से मोहम्मद मुर्सी और मुस्लिम ब्रदरहुड के अन्य सदस्यों को रिहा करने की अपील की थी. अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो उनकी मांग थी कि उनके मामले की बिना देरी किए पारदर्शी तरीके से समीक्षा की जाए.

इस बीच अमरीकी सरकार ने गुरुवार को कहा कि उसका औपचारिक रूप से यह बताने का इरादा नहीं है कि मिस्र में सैन्य तख्तापलट हुआ था या नहीं.

वहाँ इस बात पर हफ़्तों बहस हुई कि मिस्र में हालिया अशांति को अमरीका किस रूप में लेगा, तख्तापलट के हालात में अमरीका अपने क़ानूनों के तहत मिस्र को मिलने वाली सहायता पर रोक भी लगा सकता है.

हिंसा की स्थिति में प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग की सेना की चेतावनी को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने मुर्सी विरोधियों और समर्थकों से शुक्रवार को प्रस्तावित रैलियों में संयम से काम लेने की अपील की है.

मिस्र की सेना से जुड़े फ़ेसबुक पेज पर लिखा गया है,''हमें विश्वास है कि मिस्र की सेना अपने ही लोगों के खिलाफ़ हथियारों का प्रयोग कभी नहीं करेगी.लेकिन हिंसा और चरमपंथ जिसका न कोई धर्म है न कोई देश, के खिलाफ़ कार्रवाई जरूर करेगी.''

मेल-मिलाप की कोशिश

मोहम्मद मुर्सी को जिन प्रदर्शनों के बाद अपदस्थ किया गया उनका आयोजन करने वाले द टैमराड प्रोटेस्ट मूवमेंट ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में अपने समर्थकों से रैलियों में शामिल होने की अपील की है.

इसमें से एक संदेश में कहा गया है,''हम महान मिस्रवासियों से अपील करते हैं कि वे शुक्रवार को चौराहों पर जमा हों और मोहम्मद मुर्सी पर मुक़दमा चलाने और सेना की आतंकवाद के खिलाफ जारी लड़ाई का समर्थन करें.''

जनरल शेसी ने बुधवार की अपनी प्रदर्शन की अपील में कहा है कि वे अशांति फैलाने की अपील नहीं कर रहे हैं, उन्होंने राष्ट्रीय मेल-मिलाप की अपील की. वहीं सेना के प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि सेना किसी ख़ास समूह को निशाना नहीं बनाएगी.

इस बीच मुस्लिम ब्रदरहुड ने कहा है कि जनरल शेसी की अपील गृहयुद्ध की अपील है.

मुस्लिम ब्रदरहुड के अध्यात्मिक नेता मोहम्मद बादेई ने मुर्सी को अपदस्थ किए जाने की तुलना इस्लाम के सबसे पवित्र स्थानों में से एक मक्का में काबा के विनाश से की.

उन्होंने कहा,''मैं खुदा की कसम खाकर कहता हूँ कि जनरल शेसी ने मिस्र में जो किया है वह, अगर वे एक कुल्हाड़ी लेकर पवित्र मक्का का एक-एक पत्थर तोड़कर उसे ध्वस्थ कर देते, उससे भी बड़ा अपराध है.''

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि सेना काहिरा में राबा अल अदाविया मसजिद के बाहर और अन्य धरने पर बैठे मुर्सी समर्थकों को हटा सकती है.

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