ब्रिटेन: उम्र के मध्य पड़ाव में घर खोने का डर बढ़ा

  • 16 अगस्त 2013
 ऐज यूके का कहना है कि ब्रिटेन में 50 से 55 साल की उम्र के लोग बड़ी  चिंताओं से परेशान हैं.
Image caption ऐज यूके का कहना है कि ब्रिटेन में 50 से 55 साल की उम्र के लोग बड़ी चिंताओं से परेशान हैं.

सोचिए जब आप सारी चिंताओं से आज़ाद होकर आराम की ज़िंदगी बिताने की सोच रहें हों तभी आपको पता चले कि आप जिस घर में रह रहे हैं, क्या पता वो आपके पास ना हो!

ब्रिटेन में हज़ारों लोगों के साथ यही हो रहा है. ब्रिटेन में सर्वेक्षण कराने वाले एक ग़ैर सरकारी संगठन 'एज यूके' के अनुसार 50 से 55 की उम्र के लगभग एक चौथाई लोगों को अपना घर छिन जाने और आर्थिक रूप से बुरा समय आने का डर है.

संगठन ने 971 लोगों पर सर्वेक्षण किया. इनमें से 23 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें डर है कि वह अपना ऋण या किराया नहीं चुका पाऐंगे.

एज यूके ने कहा कि इस उम्र के लोग आर्थिक रूप से सबसे ज़्यादा मज़बूत होने चाहिए लेकिन इसके बजाय वह आर्थिक चिंताओं से घिरे हुए हैं.

एज यूके की मिशेल मिटशेल ने कहा, "हम जानते हैं कि यह आर्थिक रूप से कठिन समय है."

उन्होंने यह भी कहा कि, "अगर 50 और उससे अधिक की उम्र के काफ़ी लोग कहते हैं कि उन्हें अपना घर खोने का डर है तो यह साफ़ है कि बहुत से लोग बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए जूझ रहे होंगे."

घटती आय

Image caption 50 की उम्र के बाद पहली बार बहुत से लोगों के पास काम नहीं है.

एज यूके ने बताया कि सर्वेक्षण से मिले आंकड़े भविष्य में पेंशन पाने वालों के लिए चिंताएं पैदा करते हैं.

संगठन ने बताया कि युवा कर्मचारियों की तुलना में 50 के आस-पास की उम्र के लोगों को निकाले जाने का ख़तरा ज़्यादा होता है. कार्यस्थल पर वापस लौटना उन लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है.

कम्ब्रिया के अलवर्टसन में रहने वाले पीटर ओवन लगभग 50 साल के हैं. जब दो स्कूलों को एक साथ मिलाया गया तो उनकी नौकरी चली गई.

उन्हें दोबारा काम तो मिल गया लेकिन पहले जितनी अच्छी तनख्वाह नहीं मिल पाई है.

पीटर ओवन ने बीबीसी को बताया कि उन्हें अपना घर बेच कर अब किराए के घर में रहना पड़ रहा है.

वह कहते हैं, " बच्चों के लिए सभी योजनाएं अधर में लटक गई हैं."

पेंशन

Image caption पीटर ओवन : घर बेच कर अब किराए के घर में रहना पड़ रहा है.

सेवानिवृत्त हो चुके लोग बचत खाते पर मिलने वाली ब्याज दर के कम होने से परेशान हैं.

निजी कंपनी की पेंशन सेवा लेने वाले लगभग सभी लोग वार्षिक ब्याज दरों के ऐतिहासिक रूप से कम होने से जूझ रहे हैं.

इन वार्षिक ब्याज दरों से लोगों को पेंशन का पैसा दिया जाता है.

अप्रैल 2012 में एक पेंशन भोगी को एक लाख यूरो यानि लगभग 81लाख रूपए सालाना पेंशन के तौर पर मिलते थे. अब उन्हें केवल 433 यूरो यानि लगभग 35,000 रुपए सालाना पेंशन मिल रही है.

लेकिन "इंस्टिट्यूट ऑफ़ फ़िस्कल स्टडीज़" की हालिया रिपोर्ट में 60 से ज्यादा की उम्र के लोगों के लिए अच्छी ख़बर है. इसमें बताया गया है कि 2008 के बाद 60 से अधिक उम्र के लोगों की आमदनी में इज़ाफ़ा हुआ है.

इसमें बताया गया है कि वृद्धावस्था में ग़रीबी कम हुई है और पेंशन पाने वालों की आय में बाक़ी किसी भी उम्र के लोगों से ज़्यादा बढ़ोतरी हुई है.

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