अगर आप कंपनी के सीईओ बनाना चाहते हैं तो...

  • 10 अगस्त 2013

कोई भी तैयारी आपको किसी कंपनी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नहीं बना सकती. या फिर यह कह लें कि किसी कंपनी के मुख्य अधिकारी बनने में कोई भी तैयारी पूरी नहीं होती. ये राय है दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी 'जनरल इलेक्ट्रिक' (जीई) के मुखिया जेफ़ इमेल्ट की.

कहीं आप ये तो नहीं सोचने लगे कि सीईओ कंपनी की प्रोफाइल में धीरे धीरे तरक्की करके टॉप पर पहुंचते हैं और हर जगह बॉस बनने की प्रक्रिया ऐसे ही होती है.

लेकिन जेफ़ इमेल्ट की राय इससे अलग है. वे 1982 में जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी से जुड़े थे. उनके मुताबिक जब 2001 में वे कंपनी के मुख्य अधिकारी बने तो उसमें उनके 19 साल के अनुभव की बेहद सीमित भूमिका थी.

इमेल्ट कहते हैं, “मेरा करियर जीई के सिस्टम के अंदर ही बढ़ा. मुझे वहां प्रमोट किया जाता रहा, लेकिन सीईओ बनने के महज़ तीन दिनों के बाद मुझे मालूम चला कि 19 साल के अनुभव का इससे कोई लेना देना नहीं है.”

क्योंकि जैसे ही आप सीईओ बनते हैं, आप के इर्द-गिर्द बोर्ड सदस्यों का जमावड़ा हो जाता है. आपके अधीनस्थ कर्मचारियों की फौज होती है. लेकिन शीर्ष पर बैठा शख़्स हमेशा अकेला ही होता है, ख़ासकर तब जब उसके फ़ैसले ग़लत साबित होते हैं.

ग़लत फ़ैसले की ज़िम्मेदारी

वैश्विक बीमा कंपनी विलिस के मुखिया जोए पलूमेरी कहते हैं, “जब आपके फ़ैसले सही साबित होते हैं, तो उसका श्रेय लेने वाले कई होते हैं लेकिन जब कोई फ़ैसला ग़लत होता है तो सच यही है कि वह मेरी ज़िम्मेदारी होती है.”

(पोप ताकतवर सीईओ होते हैं)

Image caption जेनरल इलेक्ट्रिक कंपनी के मुखिया मानते हैं कि सीईओ की चुनौती दूसरे तरह की होती है

यह भी सही है कि कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को उनके फ़ैसले लेने की क्षमता के लिए बेहतर सुविधाएं और पैकेज दिए जाते हैं. हालांकि सीईओ के वेतन और सुविधाओं पर विवाद भी ख़ूब होते हैं क्योंकि वह आम कर्मचारियों के मुक़ाबले कई गुना तेज़ी से बढ़ता है.

अमरीका का उदाहरण ही देखें तो वहां किसी भी कंपनी के सीईओ का वेतन उसी कंपनी के औसत कर्मचारी के वेतन से चार सौ गुना ज़्यादा होता है.

वैसे कई बार ये भी देखा गया है कि कंपनी चलाने वाले सीईओ को मुश्किल समय में उचित फ़ैसले लेने के लिए पैसे तो ख़ूब दिए जाते हैं लेकिन ज़्यादातर समय में सीईओ बोर्ड समूह के सदस्यों के साथ बैठक करके सामूहिक फ़ैसले लेते हैं.

एबरडीन एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मुखिया मार्टिन गिलबर्ट कहते हैं, “हमने 2005 में ड्यूश एसेट मैनेजमेंट को खरीदा. इसका फ़ैसला एक कमरे में ड्यूश के एक शख़्स के साथ बैठक में मैंने लिया. ऐसे फ़ैसले तो अकेले ही लेने होते हैं. लेकिन उससे पहले हमने इस मुद्दे पर आपस में काफी बात की थी, हमारी कंपनी के लोग सहमत थे. क्योंकि बिना लोगों को साथ लिए आपका फ़ैसला आत्मघाती हो सकता है.”

अच्छे लीडर के गुण

ऐसे में एक सवाल यह उभरता है कि ऐसी क्या चीज है जो आपको अच्छा लीडर बना सकती है?

मोटे तौर पर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी को यह मालूम होना चाहिए कि उनका मिशन क्या है और उनकी कंपनी क्यों काम कर रही है. ये विज़न भी होना चाहिए कि कंपनी को कहां ले जाना है. ये भी मालूम होना चाहिए कि लक्ष्य की ओर कैसे बढ़ना चाहिए.

हांगकांग स्थित उद्यमी और लान क्वाई फोंग ग्रुप के मुखिया एल्लन ज़ेमान की राय में लीडर बनने के लिए सबसे बेहतरीन गुण है भविष्य से जुड़े फ़ैसले पर कुछ अलग हटकर सोच पाना.

(दुनिया भर के टॉप सीईओ)

वे कहते हैं, “आपको मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और आपको उससे तेज़ी से निपटने की कला आना चाहिए.”

कई सीईओ और बॉसेज ये मानते हैं कि उनके काम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है कुछ अहम मसलों पर कठोर निर्णय लेना जिससे दूसरे परेशान हो जाते हैं. हालांकि यहां ये भी स्पष्ट है कि केवल ऐसे फ़ैसलों से कामयाबी नहीं मिल सकती.

स्टैंडर्ड लाइफ़ के चेयरमैन गैरी ग्रिमस्टोन कहते हैं, “निष्ठुरता कारोबार का एक अहम हिस्सा है. लेकिन मेरी सलाह है कि निष्ठुरता भी कुछ सहमति के साथ दिखानी चाहिए. मेरा यकीन तो ऐसी निष्ठुरता में है जो एकदम ज़ाहिर ना हो.”

साथ लेकर चलने की मजबूरी

Image caption ट्रैवल ग्रुप थॉमस कुक की सीईओ मानती हैं कि सख़्ती के साथ साथ नरमी भी दिखानी होती है

कई सीईओ ऐसे होते हैं जिन्हें बड़े फ़ैसले लेने में मज़ा आता है, लेकिन काबिलियत ये है कि इसके तरंग में बहने से ख़ुद को रोकना चाहिए.

क्योंकि कठोर फ़ैसले हमेशा बेहतर जवाब नहीं होते.

ट्रैवल ग्रुप थॉमस कुक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैरिएट ग्रीन कहते हैं, “आपको कठोर फ़ैसले लेने के लिए तैयार होना होता है लेकिन आपको साथ में नरमी दिखाने के लिए भी तैयार होना चाहिए.”

कठोर और सख्त रवैये से आप एक-दो मौकों पर जीत हासिल कर सकते हैं लेकिन अंत में आपकी हार ही होगी. क्योंकि कारोबार की दुनिया में कामयाबी ये है कि आप अपनी सोच से कितने लोगों को जोड़ पाते हैं.

(याहू ने गूगल में सेंध लगाकर चुना अपना सीईओ)

एबरडीन एसेट मैनेजमेंट कंपनी के मुखिया मार्टिन गिलबर्ट कहते हैं, “मेरे ख़्याल से निरकुंश सीईओ पीछे रह जाते हैं तो क्योंकि हर कोई उनके ख़िलाफ़ ख़राब तरीके से पेश आता है.”

मार्टिन कहते हैं, “आपको लोगों को साथ लेकर चलना होता है. आगे बढ़ने से पहले आपको उन्हें बताना होगा कि ये बेहतरीन आइडिया है नहीं तो वे लोग आपके आइडिया को क्रियान्वित नहीं होने देंगे.”

हालांकि कोई फ़ैसला भी आसान नहीं होता. अगर सीईओ ने फ़ैसला सही नहीं लिया तो फिर चीज़ें उनके हाथ से निकल जाती हैं क्योंकि कंपनी प्रबंधन पर सीईओ बदलने के लिए शेयरहोल्डरों का दबाव बढ़ने लगता है.

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