मिस्र में ताज़ा हिंसा में 60 लोगों की मौत

  • 16 अगस्त 2013

मिस्र की राजधानी क़ाहिरा में मोर्सी समर्थकों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा में कई लोगों की मौत हो गई है. बीबीसी संवाददाता जेरेमी बॉवेन ने बताया है सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाई हैं. अलग-अलग इलाक़ों में हुई ताज़ा हिंसा में कम से कम 60 लोग मारे गए हैं. कई लोग बुरी तरह घायल हुए हैं.

बुधवार को मोर्सी समर्थकों के कैंपों पर हुई कार्रवाई में कम से कम 638 लोग मारे गए थे. मुस्लिम ब्रदरहुड ने शुक्रवार की नमाज़ के बाद प्रदर्शन का आह्वान किया था.

राजधानी क़ाहिरा के अलावा देश के कई अन्य हिस्सों में भी हिंसा हुई है. इस्लामिया में हुई हिंसा में चार लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

मिस्र की अंतरिम सरकार ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी थी और पुलिस को आत्मरक्षा में गोलियाँ चलाने का अधिकार भी दे दिया था.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि क़ाहिरा में स्थिति काफ़ी तनावपूर्ण है.

मिस्र की हिंसा से उपजे सवालमिस्र में हिंसा का ख़ूनी दौर- तस्वीरें राजधानी क़ाहिरा में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है. ऐसी रिपोर्टें हैं कि तहरीर चौक की ओर आने वाले सभी रास्तों को सेना ने सील कर दिया है. सरकारी टेलीविज़न का कहना है कि सेना को महत्वपूर्ण ठिकानों की रक्षा के लिए तैनात किया गया है.

आह्वान

लोगों से अपने पड़ोसियों और चर्चों की सुरक्षा करने का भी आह्वान किया गया है. मिस्र के कॉप्टिक ईसाइयों को भी कुछ प्रदर्शनकारियों ने निशाना बनाया था. उनका आरोप था कि चर्च ने मोहम्मद मोर्सी को अपदस्थ करने के मामले में सेना का समर्थन किया था. मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थकों के प्रदर्शन के जवाब में मोहम्मद मोर्सी के विरोधी गुट ने भी प्रदर्शन की योजना बनाई है.

मिस्र: मुबारक के बाद क्या-क्या हुआ रिपोर्टों के मुताबिक गुरुवार को सुरक्षा बलों पर नए हमले हुए जिसमें सिनाई प्रायद्वीप में कम से कम सात सैनिक और एक पुलिसकर्मी मारे गए. इस बीच अमरीका में रिपब्लिकन पार्टी के सेनेटर जॉन मैक्केन ने बीबीसी न्यूज़नाइट कार्यक्रम से बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति मोर्सी को सत्ता से बाहर करना 'सैन्य विद्रोह' है और राष्ट्रपति ओबामा को मिस्र को दिए जाने वाली सहायता को रोक देना चाहिए. अमरीका ने इसे अभी तक सैन्य विद्रोह नहीं कहा है क्योंकि अमरीकी कानून के मुताबिक ऐसा करने पर मिस्र को दी जारी सभी अमरीकी सहायता पर रोक लग जाएगी.

आलोचना

दूसरी ओऱ मिस्र की अंतरिम सरकार के नेताओं ने अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के बयान की आलोचना की है. ओबामा ने प्रदर्शनकारियों के कैंप पर मिस्र की सेना की कार्रवाई की आलोचना की थी और संयुक्त सैन्य अभ्यास को रद्द कर दिया था. मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बराक ओबामा का बयान तथ्यों पर आधारित नहीं है. बयान में कहा गया है कि मिस्र आतंकवादी गतिविधि का सामना कर रहा है. मिस्र में बुधवार को हुई हिंसा की कई देशों ने आलोचना की है. मिस्र में हुई सैन्य कार्रवाई पर चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपात बैठक हुई. बैठक के बाद जारी एक संक्षिप्त बयान में सुरक्षा परिषद ने हिंसा में हुई मौतों पर खेद प्रकट किया और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की. बैठक का उद्देशय मिस्र को यह संकेत देना था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़र वहां के घटनाक्रम पर है. एक बंद कमरे में होने वाली इस बैठक को ब्रिटेन, फ़्रांस और ऑस्ट्रेलिया के कहने पर बुलाया गया था. इन देशों की सरकारों ने मिस्र में हुई हिंसा की कड़ी आलोचना की है. तुर्की ने मिस्र से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है.

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