यूनिवर्सिटी जहां एक भी छात्र नहीं हुआ पास

लाइबीरिया का विश्वविद्यालय

लाइबेरिया के एक विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में कोई भी छात्र पास नहीं हो पाया है.

शिक्षा मंत्री ने कहा है कि यह मानना मुश्किल है कि इस साल विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में कोई पास नहीं हुआ है.

लाइबेरिया के दो सरकारी विश्वविद्यालयों में से एक 'यूनिवर्सिटी ऑफ लाइबेरिया' के लिए हुई प्रवेश परीक्षा में करीब 25 हजार छात्र-छात्राएं बैठे थे लेकिन कोई पास नहीं हुआ.

विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने बीबीसी से कहा कि छात्रों में उत्साह का अभाव है और उनमें अंग्रेज़ी की बुनियादी समझ भी नहीं है.

सपने चकनाचूर

लाइबेरिया करीब एक दशक पहले खत्म हुए बर्बर गृह युद्ध से उबरने का प्रयास कर रहा है.

शांति के लिए नोबल पुरस्कार विजेता राष्ट्रपति एलन जॉनसन सरलीफ़ ने हाल में ही स्वीकार किया था कि देश की शिक्षा प्रणाली में गड़बड़ियां हैं जिनमें सुधार की जरूरत है.

राजधानी मोनरोबिया में मौजूद बीबीसी संवाददाता जोनाथन पे लेलेह का कहना है कि बहुत से स्कूलों में शैक्षणिक सामग्री का अभाव है और अध्यापकों की शिक्षा का स्तर बहुत खराब है.

संवाददाताओं का कहना है कि यह पहली बार हुआ है कि हर वो छात्र जिसने 25 डॉलर की फ़ीस देकर यह परीक्षा दी, वह फ़ेल हो गया है.

इसका मतलब यह हुआ कि अगले महीने जब नए शैक्षणिक सत्र में विश्वविद्यालय खुलेगा तो उसमें पहले साल का कोई छात्र नहीं होगा.

छात्रों ने इन परिणामों को अविश्वसनीय बताया है. उनका कहना है कि इसने उनके सपनों को चकनाचूर कर दिया है.

'बिल्कुल अंग्रेजी नहीं जानते'

शिक्षा मंत्री एतमोनिया डेविड तापेह ने बीबीसी के एक कार्यक्रम में कहा, ''इतने सारे लोगों के फ़ेल होने पर चर्चा के लिए वे विश्वविद्यालय के अधिकारियों से मिलेंगी.''

उन्होंने कहा, ''मैं यह जानती हूँ कि स्कूलों में बहुत सी कमियाँ हैं. लेकिन परीक्षा देने वाले हर छात्र के फ़ेल हो जाने पर मुझे संदेह है.''

डेविड तापेह ने कहा कि वे कुछ छात्रों और उन स्कूलों को जानती हैं, जहाँ वे पढ़े.

वो कहती हैं, ''ये केवल स्कूल नहीं हैं जो छात्रों को अंक देते हैं, मैं वास्तव में परिणाम देखना चाहती हूँ.''

विश्वविद्यालय के प्रवक्ता मोमोदु गेटवेह ने बीबीसी से कहा कि विश्वविद्यालय अपने इस फ़ैसले पर कायम है. इसे भावना में आकर बदला नहीं जाएगा.

उन्होंने कहा, ''वे अंग्रेज़ी भाषा के बारे में कुछ नहीं जानते हैं. इसके लिए सरकार को कुछ करना चाहिए.''

वो कहते हैं, ''युद्ध 10 साल पहले ही खत्म हो गया था. अब हमें उसे पीछे छोड़कर यर्थाथवादी बन जाना चाहिए.''

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