नेपालः जो कभी माओवादी थे, अब सिपाही हैं

  • 27 अगस्त 2013
नेपाल

नेपाल में सेना की ट्रेनिंग लेने वाले पूर्व माओवादियों को विधिवत तरीके से सेना में शामिल कर लिया गया है. इस दौरान 70 पूर्व माओवादियों को रैंक दी गई.

कुल 1,421 पूर्व माओवादियों को सेना में शामिल किया गया है.

नेपाल की सैन्य अकादमी में माओवादियों के कई पूर्व लड़ाके थे, जिनकी भर्ती अधिकारी रैंक के लिए की गई थी. उन्हें नौ महीने की ऑफिसर कैडेट ट्रेनिंग दी गई.

इस तालीम में पास होने के बाद उन्हें लेफ्टिनेंट रैंक दी गई.

मील का पत्थर

Image caption नेपाल सेना में शामिल एक अधिकारी अपने परिवार के साथ.

इसे नेपाली माओवादियों को सेना में शामिल करने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

नेपाल में जब साल 2006 में गृहयुद्ध ख़त्म हुआ तब दो सेनाएं अस्तित्व में थीं. माओवादी लड़ाकों को शिविर में रखा गया था.

जितने भी पूर्व विद्रोही सैनिक थे, वे नेपाल सेना का एक अभिन्न अंग होकर सेना में अपना करियर शुरू कर रहे हैं.

जो कभी माओवादी थे, जिनके हाथों में हथियार थे और अपनी ही राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ थे अब वे देश की सुरक्षा का ज़िम्मा संभालेंगे. आंतरिक शांति के लिए ये बेहद महत्वपूर्ण कदम हो सकता है.

शांति प्रक्रिया के लिए जरूरी कदम

एक अहम सवाल है कि साल 2007 में ऐसे करीब 19 हज़ार लड़ाकों को संयुक्त राष्ट्र ने प्रमाणित किया था, उनमें से करीब 1500 माओवादियों को सेना में शामिल किया गया है.

बाकी समाज की मुख्यधारा में शामिल किए गए हैं. उन्हें सरकार ने कुछ पैसे दिए और वे स्वैच्छिक अवकाश में चले गए.

वे विभिन्न किस्म के राजनीतिक समूह, सशस्त्र समूह और आपराधिक समूहों के संपर्क में हैं.

करीब 3 हज़ार ऐसे ही लड़ाके थे जिन्हें संयुक्त राष्ट्र ने अयोग्य लड़ाका घोषित किया था. वो भी विभिन्न किस्म के आंदोलन में हैं.

नेपाल में इस निर्णय से दो सेनाओं के अस्तित्व का अंत हुआ है लेकिन अब भी लड़ाकों का बड़ा हिस्सा समाज में है.

उन्हें सही ढंग से समाज की मुख्य धारा में शामिल नहीं किया गया तो समस्या आ सकती है.

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