आयरलैंड: कूड़ेदान में मिले शरीर के टुकड़े

डबलिन कूड़े का ट्रक
Image caption पुलिस ने इस मामले में षड्यंत्र की आशंका को नकार दिया है

आयरलैंड की राजधानी डबलिन में कूड़ेदान में सो रहे एक व्यक्ति की कूड़ा पिसने वाली मशीन में कुचले जाने से मौत हो गई है.

आयरलैंड की पुलिस 43 वर्षीय पोलिश नागरिक हेनरी पियोट्रोवस्की के परिवार वालों का पता लगाने की कोशिश कर रही है.

उनके बारे में अब तक कम ही जानकारी मिल सकी है. बस यह पता चला है कि वे मुश्किल हालत में वक़्त गुज़ार रहे थे.

कूड़ा उठाने वाले ट्रक ने कूड़ेदान का सामान कूड़ा कुचलने वाली मशीन में डाल दिया था.

दूसरे दिन सुबह कूड़ा लेकर जब ट्रक कूड़ा शोधन सयंत्र पहुंचा और वाहन को ख़ाली किया गया तो हेनरी का क्षतविक्षत शव मिला.

कइयों की यही कहानी

Image caption हेनरी पियोट्रोवस्की

कूड़ा उठाने वाले ट्रक के ड्राइवर को भी इस बारे में तब तक कुछ पता नहीं चला था.

पुलिस अधिकारियों ने किसी षड्यंत्र की आशंका को नकार दिया है. उनका मानना है कि संभवतः हेनरी ठंड से बचने के लिए काग़ज़ों और दोबारा इस्तेमाल करने लायक़ कूड़े के बीच सो रहे होंगे.

उनके पास पहचान पत्र थे और पुलिस अधिकारी पोलैंड दूतावास से और इंटरपोल से उनके रिश्तेदारों तक पहुंचने के लिए संपर्क में हैं.

यूरोपीय यूनियन के विस्तार के बाद से आयरलैंड पोलैंड के शरणार्थियों के लिए पसंदीदा जगह बन गया है.

पोलैंडवासी यूके के नागरिकों को पछाड़ कर आयरलैंड के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय बन गए हैं.

साल 2011 की जनगणना में आयरलैंड में 1,20,000 से ज़्यादा पोलैंड निवासी थे. यह संख्या पिछले पांच साल के मुक़ाबले दोगुनी थी. लेकिन आयरलैंड में मंदी से कुछ लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.

पोलैंड के बहुत से लोग निर्माण उद्योग में काम करते थे लेकिन 2008 में बैंकिंग क्षेत्र के नाकाम होने से आयरलैंड का निर्माण उद्योग ढह गया और लोग बेरोज़गार हो गए. कुछ तो चले गए लेकिन बाक़ियों को मुश्किल समय देखना पड़ रहा है. क्योंकि आयरलैंड में भारी बेरोज़गारी का मतलब है कि नौकरियां दुर्लभ हो गई हैं.

आयरलैंड में फैले सूप किचन के कर्मचारी बताते हैं कि आवश्यक भोजन के ज़रूरतमंद वाले लोगों में बड़ी संख्या पोलैंडवासियों की है. आयरलैंड में निवास के नियमों के अनुसार इन लोगों को सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल सकती. ऐसे में सड़क पर रहने वाले कई लोग शराब के आदी हो गए हैं.

हेनरी पियोट्रोवस्की की कहानी बहुत से ऐसे लोगों की दिक्क़त बयां करती है जो विदेश से यहां रहने आए हैं. डर्बीशर के 36 वर्षीय केविन फ़िट्ज़पैट्रिक भी 2007 में एक कूड़ा शोधन सयंत्र में मृत पाए गए थे. वह भी एक कूड़ेदान में सो रहे थे.

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