श्रीलंका में कुत्तों की शादी से सरकार नाराज़

कुत्तों की शादी

श्रीलंका के संस्कृति मंत्रालय ने पुलिस के कुत्तों के सामूहिक विवाह की कड़ी निंदा की है जिसमें कथित तौर पर बौद्ध चिन्हों का इस्तेमाल किया गया है.

पुलिस ने कुत्तों के नौ जोड़ों की शादी के लिए एक परंपरागत विवाह से मेल खाते समारोह में सफ़ेद कपड़े औऱ फूलों से ढके एक तख्त का इस्तेमाल किया. शादी के लिए ‘दुल्हनों’ ने दस्ताने, श़ॉल औऱ हैट पहनी थी जबकि ‘दूल्हे’ लाल टाई लगाए हुए थे.

पुलिस वालों ने अपने बचाव में कहा है कि ये शादी दरअसल खोजी कुत्तों के प्रजनन को बढ़ावा देने के लिए की गई थी. हालांकि एक बयान में उन्होने अपने कृत्य के लिए माफ़ी मांगी है.

सिपाहियों ने कुत्तों की शादी में शरीक़ होने वालों को दूध,चावल औऱ केक की दावत दी.बाद में इन जोड़ों को पुलिस की गाड़ी में हनीमून के लिए न्यूवारा एलिया हिल रिज़ॉर्ट ले जाया गया.

संस्कृति मंत्री टीबी एकनायके ने कहा है कि पुलिस ने एक धर्मनिष्ठ बौद्ध देश में परंपरागत शादी की अवमानना की है.उन्होने कहा कि उन्हे ये ख़बर मिली है कि कुत्तों की शादी में पोरूवा यानी उसी तरह के स्टेज का प्रयोग हुआ है जो एक पारंपरिक सिंहली शादी में होता है.

एकनायक का कहना था, "ये हमारे सांस्कृतिक मूल्यों के ख़िलाफ़ है.हम पारंपरिक शादियों को बेहद महत्व देने वाले लोग हैं जो पवित्र समय पर पूरे रीति रिवाज के साथ सम्पन्न होती हैं.पुलिस ने इसका अपमान किया है, मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं."

उन्होंने कहा कि श्रीलंका में इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ है औऱ उन्होंने लिखित रुप में पुलिस महानिदेशक को इसकी पूरी जांच कराने को कहा है.

तस्वीरों की ख़ातिर

Image caption कुत्तों के नौ जोड़ों को पुलिस वाले शादी के समारोह तक लाए.

इस मसले पर पुलिस का कहना है कि ये शादियां जिस स्टेज पर कराई गईं हैं उनका बौद्ध परंपरा से कोई संबंध नहीं है. शादियों के वक्त कुत्तों को ज़मीन से थोड़ा ऊंचा रखने की ज़रूरत थी ताकि बेहतर तस्वीरें मिल सकें.

पुलिस ने अपने बयान में कहा है, "’इसकी पोरूवा से कोई समानता नहीं है औऱ उन्हें वहां केवल तस्वीरों की वडह से रखा गया था."

हालांकि अपने बयान में पुलिस ने सांस्कृतिक औऱ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए माफ़ी मांगी है.

पुलिस का कहना है कि सोमवार को संपन्न कराई गई शादियां सिर्फ़ देश में खोजी कुत्तों के प्रजनन को बढ़ावा देने के लिए की गई थी.

पुलिस ने स्थानीय मीडिया को बताया है कि साल 2011 में श्रीलंका ने पुलिस के लिए कुत्ते आयात करने में ही साक करोड़ रूपए ख़र्च कर दिए.

उनका ये भी कहना है कि घरेलू प्रजनन कार्यक्रम को बढ़ावा देने से ना सिर्फ़ पैसे बचेंगे बल्कि कुत्तों को घरेलू परिस्थितियों के हिसाब से ढाला भी जा सकेगा.

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