क्या सीरिया पर अमरीकी हमला निश्चित है?

Image caption अमरीका के विदेश मंत्री जॉन केरी ने रासायनिक हमलों की पुष्टि करते हुए दमिश्क़ में हुए हमले को 'नैतिक अश्लीलता' बताया है.

पिछले कुछ दिनों में अमरीका के तेवर बदल गए हैं.

अमरीका अब सीरिया की सरकार के प्रति अधिक कठोर हो गया है. अमरीका अब इसे लेकर पूरी तरह आश्वस्त है कि सीरिया में पिछले सप्ताह हुई मौतें रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल से हुईं और ये हमले राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार ने कराए हैं.

अमरीका के एक बयान में निरीक्षकों को अनुमति देने के सुझाव का मज़ाक उड़ाया गया है क्योंकि संभव है साक्ष्यों को पहले ही नष्ट कर दिया गया हो.

निस्संदेह, जांच की कोशिश करने पर निरीक्षकों पर हुई गोलीबारी पर भी ऐसी ही बातें कही जाएंगी.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को कई सैन्य विकल्प सुझाए गए हैं और इस बारे में उन्होंने अपने मुख्य सैनिक साझेदार ब्रिटेन और फ्रांस के नेताओं से बात की है.

इस क्षेत्र में अमरीका के तीन युद्धपोत मौजूद हैं और दूसरे युद्धपोत क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं.

कांग्रेस में कई लोग सीमित क्रूज मिसाइल हमले के पक्ष में हैं. ऐसे में सभी संकेत एक ओर ही इशारा कर रहे हैं.

'वॉर डेस्क'

Image caption सीरिया में संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षक रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की जांच कर रहे हैं.

ब्रिटिश समाचार पत्रों का कहना है कि इस सप्ताह हमला हो सकता है.

मैं एक बेहतरीन कॉमेडी शृंखला 'द डे टुडे' को नहीं भूल सकता जिसमें एक टीवी स्टूडियो को 'वॉर डेस्क' के रूप में तब्दील कर दिया गया था, जिसमें अलार्म बजते रहते थे, लाल बत्तियाँ जगमगाती थीं, मशीने तेज़ी से इधर से उधर झूलती थीं और रोशनी नाटकीय रूप से धुंधली हो जाती थी.

इसमें संभावित टकराव को लेकर ठीक मेरे पेशे जैसी उत्तेजना को दर्शाया गया था.

मैंने बराक ओबामा की सतर्कता और कार्रवाई को लेकर अनिच्छा पर पहले भी ज़ोर दिया है, लेकिन अब किसी बड़े बदलाव के बगैर उनके लिए वापसी की राह मुश्किल लगती है.

हालांकि एक सरकार का अपने लोगों के खिलाफ रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग की जा सकती है, लेकिन अमरीका के नज़रिए से देखें तो उसके लिए बड़ी चिंता का विषय ये है कि कहीं ये हथियार उसके अपने लोगों या सहयोगी देशों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल न हों.

गलत इस्तेमाल की आशंका

9/11 के हमले के बाद से ही इस बात को लेकर काफी भय है कि ऐसे हथियार उन हाथों में जा सकते हैं, जिन्हें पश्चिमी देश आतंकवादी मानते हैं.

यह आशंका इसलिए भी हकीकत बन सकती है क्योकि सीरिया में एक मुख्य विपक्षी दल ने औपचारिक रूप से अल-कायदा के साथ गठजोड़ की घोषणा की है.

Image caption सीरिया में रासायनिक हमलों में सौकड़ों की तादात में लोग मारे गए हैं.

मुझे ऐसा लगता है कि अमरीका का मुख्य स्वार्थ उन हथियारों को सुरक्षित करना और उन्हें इस्तेमाल के लायक नहीं छोड़ना है. लेकिन मैंने इस विकल्प पर काफी कम बातें सुनी हैं.

याद कीजिए कि अमरीका और रूस के राजनयिक नीदरलैंड के लिए शांति वार्ता की अगुवाई कर रहे हैं. अमरीकी हमले से उसकी सफलता की संभावना पर असर पड़ेगा. लेकिन खतरा संभव है.

हालांकि हो सकता है कि राष्ट्रपति ओबामा रूस की चेतावनी पर बहुत अधिक ध्यान न दें, लेकिन उसका मुख्य भाव एक ही होगा- रूस कह सकता है कि अगर अमरीका युद्ध के लिए जाता है तो यह इराक में पूर्व राष्ट्रपति जार्ज बुश की गलती को दोहराने जैसा होगा.

मुश्किल हालात

निश्चित रूप से यह खतरा राष्ट्रपति ओबामा के दिमाग में घूम रहा होगा.

अमरीकी सेना ने लगातार चेतावनी दी है कि सीरिया की चुनौती काफी मुश्किल है. यह लीबिया नहीं है और उसकी बेहतरीन वायु सेना को कामयाब होने के लिए काफी प्रयासों और प्रतिबद्धता की ज़रूरत होगी.

यह भी आश्चर्यजनक होगा अगर राष्ट्रपति बराक ओबामा अधिकतम अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाए बिना कार्रवाई करते हैं और शायद इसका मतलब संयुक्त राष्ट्र के जरिए समाधान की कोशिशों को अधिक समय देना है.

मैं गलत हो सकता हूँ: लाल बत्तियाँ जल्द ही जगमगा सकती हैं और वार डेस्क हरकत में आ सकता है. हालांकि धमकी का स्वर तेज हो सकता है, लेकिन संगीने अभी तैयार नहीं हैं.

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