'आखिरी सांस तक नेपाली सेना के लिए लड़ूंगा'

नेपाल

वासुदेव घिमीरे कभी नेपाल की राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ थे. अब वे नेपाल की रक्षा करने वाले सैनिक के रूप में जाने जाएंगे.

नेपाल सरकार ने जिन 70 पूर्व माओवादियों को सेना में शामिल किया है, वासुदेव उनमें से एक हैं. वे सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल बनाए गए हैं.

वासुदेव घिमिरे पूर्वी नेपाल के डांग ज़िले से आते हैं. संघर्ष के दौरान वे माओवादी गुरिल्ला संगठन में ब्रिगेड कमांडर हुआ करते थे.

वक्त का तकाज़ा

वासुदेव घिमीरे कभी नेपाल की सेना के खिलाफ लड़ रहे थे, अब उसी सेना का हिस्सा बन गए हैं.

वासुदेव कहते हैं, "जो बीत चुका, वो बीत चुका. हमने जिस सेना के साथ संघर्ष किया वह आज की सेना से अलग थी. तब रॉयल आर्मी थी."

वासुदेव घिमीरे के लिए उस अतीत को भुला पाना बहुत मुश्किल नहीं. वे मानते हैं कि उस दौर की सकारात्मक और अच्छी बातों को ही याद रखा जाना चाहिए.

माओवादियों ने ये कल्पना की थी कि दोनों सेनाओं को मिलाकर एक राष्ट्रीय सेना बनाई जाएगी. जबकि इसके विपरीत कई पूर्व माओवादियों को देश की सेना का हिस्सा बना लिया गया.

वासुदेव मानते हैं कि यह वक्त का तकाज़ा है और देश की ज़रूरत भी. अभी यही रास्ता सही है.

सेना के लिए समर्पित

Image caption नेपाल की सेना में वासुदेव घिमीरे को लेफ्टिनेंट कर्नल बनाया गया है.

वे माओवादी जो कभी माओवादी पार्टी के साथ थे और बाद में अलग हो गए, वे कुछ पूर्व माओवादियों के सेना में शामिल होने की घटना को एक तरह का आत्मसमर्पण मान रहे हैं.

लेकिन वासुदेव ऐसा नहीं मानते. वे कहते हैं, "यह राजनीतिक शब्दों में व्यक्त किए गए उनके भाव हैं. मगर हम अब किसी राजनीति का हिस्सा नहीं हैं."

वासुदेव माओवादी पार्टी और इसकी राजनीतिक विचारधारा से काफी वर्षों तक जुड़े रहे हैं.

उनका मानना है कि नेपाल की सेना में शामिल हो जाने के बाद सभी पार्टियों से एक समान संबंध रहेंगे. उनका कहना है कि वे अब किसी एक पार्टी का हिस्सा नहीं रहे.

प्रचंड (माओवादी पार्टी के प्रमुख पुष्प कमल दहल प्रचंड) कभी वासुदेव के सबसे महत्वपूर्ण कमांडर रहे हैं. उनके बारे में भी वासुदेव की सोच अब बदल गई है. अब प्रचंड उनके लिए सिर्फ एक राजनेता हैं.

नेपाल की सेना में सक्रिय होने के बारे में वासुदेव कहते हैं, "मैं अपना पूरा जीवन नेपाली सेना को दे देना चाहता हूं. जब तक जान है मैं तब तक सेना के लिए सक्रिय रहूंगा."

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