सीरिया कैसे करेगा अपना बचाव?

सीरिया सेना

अपने कुछ सहयोगियों के साथ सीरिया पर अमरीकी हमले की संभावना बढ़ने के साथ ही यह सवाल भी गहराता जा रहा है कि अगर ऐसा हुआ तो सीरिया क्या करेगा?

जिस तरह के हमले की योजना बन रही है उससे सीरिया किस सीमा तक अपना बचाव कर सकेगा? अमरीकी सैन्य कार्रवाई के ख़िलाफ़ बचाव में सीरिया क्या कदम उठा सकता है?

प्रतिरक्षा के संभावित उपाय

अमरीका, ब्रिटेन और शायद फ्रांस के जिस तरीके के हमले की तैयारी का अंदाजा मिल रहा है उससे प्रतीत हो रहा है कि ये देश अपने युद्धपोतों या पनडुब्बियों से लंबी दूरी के टॉमहैक लैंड-अटैक क्रूजर मिसाइल से हमला करेंगे.

फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट का भी प्रयोग किया जा सकता है. अगर ऐसा हुआ तो सीरियाई सीमा के बाहर स्थित स्टैंड-ऑफ हथियारों का भी प्रयोग किया जा सकता है. इनसे सीरिया की वायु सीमा के दायरे के बाहर से भी हमला किया जा सकता है. इस स्थिति में सीरिया के लिए इन हमलों का प्रतिरोध करना बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाएगा.

पूर्व सोवियत संघ से प्राप्त एस-200/एसए-5 गैमन इत्यादि से लैस सीरिया की वायु रक्षा काफी क्षमतावान है. हाल में रूस से मिले एसए-22 और एसए-17 ने सीरियाई वायु सेना को और मजबूत बना दिया है.

सीरिया के पास चीन से प्राप्त उच्च क्षमता वाला राडार सिस्टम भी है. यही कारण है कि किसी भी बाहरी हमले की स्थिति में स्टैंड-ऑफ आयुधों का इस्तेमाल ज़रूरी हो जाएगा.

हमें याद रखना चाहिए इजराइल पिछले वर्षों में सीरियाई ठिकानों पर कई बार सुरक्षित तरीके से हमला कर चुका है. पश्चिमी देशों की अत्याधुनिक वायुसेना को भी सीरिया की वायुसेना की क्षमता का पूरा अंदाजा है.

ये मिसाइलें निश्चित तौर पर एयरक्राफ्ट को मार गिरा सकती हैं, लेकिन युद्धक विमानों के पायलटों के पास भी इनसे बचने की तकनीकें और तरकीबें मौजूद हैं.

सीरिया द्वारा रूस से मंगाए गए एस-300 सिस्टम की स्थिति स्पष्ट नहीं है. माना जा रहा है कि ये सिस्टम या तो अभी सीरिया को मिला नहीं है या फिर अभी काम करने लायक स्थिति में नहीं है.

जहाँ तक हवाई सुरक्षा की बात है तो सीरिया अमरीका और पश्चिम की नौसेना का जवाब अपने तटीय एंटी-शिपिंग मिसाइल से दे सकता है.

सीरिया ने रूस से प्राप्त सुपरसोनिक एंटीशिपिंग मिसाइल 'यखोंत' तैनात कर रखा है. इसे एनएटीओपी सर्किल में एसएस-एन-26 के रूप में जाना जाता है. लेकिन फिर भी टॉमहॉक मिसाइलों वाले युद्ध पोत इनकी पहुँच से बाहर रहेंगे.

सीरिया के पास विकल्प

Image caption अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि अमरीका इस नतीजे पर पहुंचा है कि पिछले हफ्ते सीरिया ने रासायनिक हमले किए थे.

अगर सीरिया हमलों के ख़िलाफ़ ज्यादा कुछ नहीं कर सकता तो फिर वह उनका जवाब कैसे देगा?

एक विकल्प यह है कि विरोधियों के ख़िलाफ़ हमले तेज़ कर दिए जाएं ताकि इस स्थानीय जीत से सीरियाई सेना का मनोबल बढ़ाया जा सके. इससे अमरीका एवं उसके सहयोगियों को भी संदेश दिया जा सकेगा कि असद सरकार पूरी तरह अडिग है.

एक विकल्प यह भी हो सकता है कि संघर्ष को बढ़ावा देने के लिए सीरिया तुर्की और जॉर्डन स्थित अमरीकी सेना या इसराइल पर बैलेस्टिक मिसाइलों से हमला कर दे. इस विकल्प को चुनने पर सीरिया को भारी क़ीमत भी चुकानी पड़ सकती है.

तुर्की अपनी रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है. जॉर्डन स्थित अमरीकी सेना भी सीरिया का जवाब देने में सक्षम है. इन दोनों देशों के पास पैट्रियट एंटी-मिसाइल रक्षा प्रणाली भी मौजूद है.

गृहयुद्ध में सीरिया की सेना को भारी क्षति पहुँची है. इजराइल पर हमला करने पर सीरिया को भारी जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. इससे क्षेत्रीय स्तर पर युद्ध के प्रसार की संभावना बढ़ जाएगी. युद्ध को बढ़ावा देने की नीति न तो दमिश्क के हित में होगी, न ही तेहरान के हित में.

छद्म युद्ध

सीरिया हिजबुल्लाह जैसे समूहों को अमरीका या पश्चिमी देशों के ख़िलाफ़ हमले तेज़ करने के लिए कह सकता है. इस स्थिति में भी ईरान की आँखें इस पर लगी रहेंगी क्योंकि ईरान अपने परमाणु डोज़ियर को लेकर पश्चिमी देशों के सामने आ सकता है तो वह हिज्बुल्लाह को बढ़ावा देने को लेकर सतर्क रहेगा.

राष्ट्रपति असद का साथ देकर हिज्बुल्लाह की भी मुश्किल बढ़ सकती है. हो सकता है कि वो सोचे कि उसके पास पहले से ही कई समस्याएँ हैं इसलिए बेहतर है कि वो अपनी शक्ति को बचा कर रखे.

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