वियतनाम में ख़बरों की ऑनलाइन चर्चा पर रोक

वियतनाम में इंटरनेट

वियतनाम में एक विवादास्पद क़ानून के तहत इंटरनेट पर ख़बरों की चर्चा पर रोक लगा दी गई है.

डिक्री 72 के नाम के इस कानून में कहा गया है कि ब्लॉग और सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट सिर्फ़ निजी जानकारियां ही शेयर कर सकेंगी, ख़बरें नहीं.

क़ानून में यह भी कहा गया है कि विदेशी इंटरनेट कंपनियों को अपने लोकल सर्वर वियतनाम में ही रखने होंगे.

नए क़ानून की इंटरनेट कंपनियों, मानवाधिकार संगठनों और अमरीकी सरकार ने आलोचना की है.

वियतनाम एक पार्टी के शासन वाला कम्यूनिस्ट देश है और यहां मीडिया पर प्रशासन की सख़्त पकड़ है.

वियतनाम में इस साल ब्लॉगरों सहित कई कार्यकर्ताओं को देश विरोधी गतिविधियों के लिए दोषी पाया गया है.

'कारोबार हतोत्साहित होगा'

नए क़ानून में कहा गया है कि फ़ेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट का इस्तेमाल सिर्फ़ 'निजी जानकारी के आदान-प्रदान' के लिए किया जाना चाहिए.

इस क़ानून के तहत ऐसी सामग्री के ऑनलाइन प्रकाशन पर भी रोक लगा दी गई है, जो 'वियतनाम सरकार का विरोध करती है' या 'राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान' पहुंचाती है.

बीते महीने हनोई में अमरीकी दूतावास ने कहा था कि वो "नए क़ानून के प्रावधानों से गंभीर रूप से चिंतित है."

अमरीकी दूतावास ने कहा था, "मौलिक स्वतंत्रता ऑनलाइन पर भी उतनी ही लागू होती है जितनी ऑफ़लाइन."

प्रेस की स्वतंत्रता के लिए अभियान चलाने वाली संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स का कहना है कि नए क़ानून से वियतनाम के लोगों को "ब्लॉग और फोरम पर मिलने वाली स्वतंत्र जानकारी स्थायी रूप से नहीं मिल पाएगी."

गूगल और फ़ेसबुक की सदस्यता वाले उद्योग समूह, एशिया इंटरनेट कोएलिशन ने कहा, "इस कदम से वियतनाम में नई चीज़ों के लिए दमघोटू वातावरण बनेगा और कारोबार हतोत्साहित होगा."

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