मोर्सी पर हत्या के मुक़दमे की सिफ़ारिश

  • 2 सितंबर 2013
मोहम्मद मोर्सी
Image caption यह मामला पिछले साल दिसंबर में राष्ट्रपति भवल के बाहर सात प्रदर्शनकारियों की मौत से जुड़ा है

मिस्र के सरकारी वकीलों ने अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी पर अपने कार्यकाल के दौरान प्रदर्शनकारियों की हत्या का मुक़दमा चलाने की सिफारिश की है.

यह मामला पिछले साल दिसंबर में काहिरा में राष्ट्रपति भवन के बाहर प्रदर्शन के दौरान झड़पों में सात लोगों की हत्या से जुड़ा है. इस आरोप में मुस्लिम ब्रदरहुड के 14 अन्य लोगों पर भी मुक़दमा चलाया जाएगा.

इस साल जुलाई में अपदस्थ किए जाने के बाद मोर्सी को किसी अज्ञात जगह पर रखा गया है.

वे कई आरोपों का सामना कर रहे हैं लेकिन यह पहला मामला है जिनमें उन पर मुक़दमा चलाने की सिफारिश की गई है.

समर्थकों पर धावा

मोर्सी को सत्ता से हटाने के बाद सेना के समर्थन वाली अंतरिम सरकार ने मोर्सी की बहाली की मांग करने वाले मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई की.

पिछले महीने सुरक्षा बलों ने राजधानी में डेरा डाले मोर्सी समर्थकों पर धावा बोला था, जिसमें सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी.

मिस्र के सरकारी मीडिया के मुताबिक़ सरकारी वकीलों ने अपदस्थ राष्ट्रपति पर मुक़दमा चलाने की सलाह रविवार देर रात दी.

वकीलों ने कहा है कि मोर्सी पर दिसंबर 2012 में हत्याओं और हिंसा को शह देने के आरोप में मुक़दमा चलाया जाएगा. सुनवाई शुरू होने की तारीखों की घोषणा अभी नहीं हुई है.

जिस मामले में उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलेगा, वह पिछले साल दिसंबर में राष्ट्रपति भवन के बाहर झड़पों से जुड़ा है.

चार दिसंबर की रात दसियों हज़ार लोगों ने राष्ट्रपति भवन के बाहर रैली निकाली थी. प्रदर्शनकारी मोर्सी की संविधान परिवर्तन की मंशा का विरोध कर रहे थे.

सरकारी मीडिया ने रविवार को कहा कि एक जाँच में पता चला है कि मोर्सी ने रिपब्लिकन गार्ड और पुलिस विभाग के मंत्री से प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के लिए कहा लेकिन उन्होंने आदेश मानने से इनकार कर दिया.

पहले भी लगे आरोप

Image caption मोहम्मद मोर्सी को मिस्र की सेना ने अपदस्थ कर दिया था

मोर्सी समर्थकों पर आरोप है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए अपने समर्थकों को बुलाया.

इन झड़पों में सात लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों जख़्मी हो गए. मोर्सी समर्थकों का कहना था कि वे विपक्षी कार्यकर्ताओं के हमले से महल की रक्षा कर रहे थे.

इस मामले में मोर्सी के साथ जिन 14 अन्य संदिग्ध लोगों पर मुक़दमा चलेगा, उनमें मुस्लिम ब्रदरहुड की राजनीतिक शाखा के मोहम्मद अल बेलतगी और एसाम इल एरियन के नाम शामिल हैं.

इससे पहले जनवरी 2011 में काहिरा में जेल तोड़कर भागने की वारदात को लेकर मोर्सी और मुस्लिम ब्रदरहुड के कुछ नेताओं पर कैदियों, अधिकारियों और सैनिकों की पूर्वनियोजित हत्या का आरोप लगा था.

उन पर होस्नी मुबारक के ख़िलाफ़ आंदोलन के दौरान फ़िलस्तीन के चरमपंथी संगठन हमास के साथ मिलकर जेलों पर हमले करने की साजिश रचने का आरोप है.

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