तोप से दागे जाते हैं ये इंसान

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सर्कस में इंसानों को तोप के गोले के तौर पर दागने का इतिहास क़रीब डेढ़ सौ साल पुराना है. आज इस करतब को करने वाले सिर्फ़ चंद लोग बचे हैं. इनमें से दो पति-पत्नी हैं.

इनका कहना है, "हमें एक दूसरे से प्यार था और हम साथ में कुछ चाहते थे. इसलिए सोचा तोप के गोले के साथ ही क्यों नहीं?"

रॉबिन वेलेंसिया ऐसे परिवार से हैं, जहाँ तोप के गोले के तौर पर काम करने की परंपरा रही है.

रॉबिन के अंकल को मैक्सिको की सीमा के पार तोप से दागे जाने का स्टंट करने के लिए जाना जाता है.

रॉबिन के पति चाची, झूले पर कलाबाज़ी करने वाले कलाकार रहे हैं.

रॉबिन कहती हैं, "जब आप तोप का गोला बनने का करतब करते हैं, तब आप हर चीज़ से अलग हो जाते हैं, आप उड़ते हैं."

आज रॉबिन 45 साल की हैं. पूरी दुनिया में इन्हें "शूटिंग स्टार" के तौर पर जाना जाता है.

"एक राज़"

वो अपनी कटी हुई बांहों वाली चमकीली पोशाक में, खुले चेहरे वाला लाल हेलमेट पहनकर, दर्शकों की तरफ़ हाथ हिलाती हुई, तोप की नली के भीतर चली जाती हैं.

उल्टी गिनती शुरू होती है और वह धमाके के साथ गोले की तरह उड़ती हुई बाहर आतीं हैं.

ये पूछने पर कि वो यह कमाल करती कैसे हैं, रॉबिन कहती हैं, "यह एक राज़ है."

ये लोग अपनी तोप की बनावट के बारे में किसी को नहीं बताते.

रॉबिन केवल इतना ही स्वीकार करती हैं कि इस करतब में, "बारूद" का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसका इस्तेमाल धमाके और धुएं के लिए किया जाता है.

आजकल तोप के गोलों की तरह काम करने वाले लोग छोटे मंचों पर हवा के दबाव और जंपिंग वाली रस्सी का भी प्रयोग करते हैं.

रॉबिन कहती हैं, "तोप के भीतर आपकी स्थिति निर्धारित करती है कि आप बाहर कैसे गिरेंगे."

पुतलों पर परीक्षण

वह कहते हैं, "तोप किस दिशा में, किस कोण पर रखी जाए, यह निर्धारित करने के लिए हम रेत से भरे इंसान के पुतलों का प्रयोग करते हैं. हम पहले उन पर परीक्षण करते हैं."

कुछ मानवीय तोप के गोले 20 मीटर तक की ऊँचाई तक पहुँच जाते हैं. ऐसे में ज़रा सी चूक भी बड़ा ख़तरा हो सकती है.

रॉबिन और चाची 1988 में ह्यूस्टन के एक सर्कस में मिले थे.

रॉबिन याद करते हुए बताती हैं, "यह एक ख़तरनाक काम था लेकिन मैंने अपने अंकल को देखा था. उनका करियर लंबा और सुरक्षित रहा था. इसलिए मुझे भी सुरक्षित महसूस हुआ."

Image caption रोसा रिक्टर उर्फ़ ज़ाज़ेल ने साल 1877 में सबसे पहले यह करतब दिखाया था.

2008 में रॉबिन के चाचा स्मिथ के चोटिल हो जाने से तोप के गोले के तौर पर चाची के करियर की शुरुआत हुई.

आज चाची 11 मीटर लंबी तोप इस्तेमाल करते हैं, जो उन्हें कम से कम 30 मीटर की दूरी तक फेंक देती है.

पिछले साल लंदन ओलंपिक के समापन समारोह में करतब दिखाते हुए उन्हें पूरी दुनिया में लगभग 75 करोड़ लोगों ने देखा.

"मैं उड़ रहा हूँ!"

यह पूछने पर कि तोप से दागे जाने पर कैसा लगता है?

चाची बताते हैं, "आपके सोचने से पहले सब कुछ हो जाता है. दागे जाने का अहसास होने में कुछ देर लगती है. तब लगता है. ओह अच्छा, मैं तोप से बाहर हूँ! मैं उड़ रहा हूँ!"

चाची तोप से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से निकलते हैं. इतनी ताक़त से कोई अप्रशिक्षित व्यक्ति निकले, तो बेहोश हो सकता है.

चाची और रॉबिन को सबसे ज़्यादा डर तब लगता है जब उनमें से कोई एक तोप का गोला बनता है.

तोप के गोले के तौर पर काम करने वाले लोग सर्कस में सबसे ज़्यादा पैसे पाने वालों में से होते हैं. इसके बाद भी आज पूरी दुनिया में 10 से भी कम लोग हैं, जो तोप के गोले बनने का करतब दिखाते हैं.

मॉस्को स्टेट सर्कस के निदेशक पॉल आर्चर का कहना है, "यह करतब दिखने वाले बहुत कम लोग बचे हैं. पाँच साल पहले हमारे साथ एक कलाकार तोप के गोले के तौर पर काम करता था. केवल उस करतब का ही प्रचार बहुत था. इस करतब के लिए आपका बहादुर होना ज़रूरी है. साथ ही आपकी क़द-काठी और नट जैसी दक्षता भी ज़रूरी है."

गर्दन टूट गई

मानव तोप के गोलों का इतिहास गंभीर चोटों और मौतों से भरा हुआ है.

साल 2011 में ब्रिटेन के कैंट में एक व्यक्ति की सुरक्षा जाल टूटने से मौत हो गई थी. पहले भी ऐसे हादसे हुए हैं जब लोग तोप से फेंके जाने पर ज़ख़्मी हुए हैं.

लेकिन चाची और रॉबिन अपने सुरक्षित रहने का श्रेय कड़ी तैयारी और रोज़ाना ट्रेनिंग को देते हैं.

चाची कहते हैं, "हमारे बच्चों के लिए यह सामान्य बात है. जैसे दूसरे बच्चों के माता-पिता काम पर जाते हैं."

लेकिन वो कहते हैं कि उनकी बेटियों की सर्कस में काम करने की कोई इच्छा नहीं है और वो "इस बारे में बहुत खुश हैं."

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