सीरिया: अमरीका ने ठहराया रूस को ज़िम्मेदार, जी-20 में मतभेद

जी 20 के नेताओं का रात्रिभोज

संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत की ओर से रूस पर लगाए गए आरोपों के बाद जी-20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन नेता सीरिया संकट को लेकर बंटे हुए नज़र आए.

अमरीकी राजदूत सामंथा पावर ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सीरिया के लोगों की आकांक्षाओं पर खरी नहीं उतरी है. उन्होंने इस हालात के लिए रूस को ज़िम्मेदार ठहराया.

इटली के प्रधानमंत्री एनरिक लेट्टो ने बाद में ट्विटर कर कहा,'' जी-20 सम्मेलन के पहले दिन का रात्रिभोज अभी खत्म हुआ है, इसमें सीरिया को लेकर विभाजन साफ नज़र आया.''

सेंट पीट्सर्बग में चल रहे जी-20 सम्मेलन में अमरीका और फ्रांस ही दो ऐसे देश हैं जो सीरिया में सैन्य कार्रवाई की बात कह रहे हैं. वहीं रूस और चीन का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र की सहमति के बिना सीरिया में कोई भी कार्रवाई ग़ैर क़ानूनी होगी.

अमरीकी आरोप

अमरीकी राजदूत सामंथा पावर ने न्यूयार्क में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा,"रूस उस शासन की रक्षा कर रहा है जो खुले आम पिछले 25 सालों का सबसे भयानक रासायनिक हमला करता है और वो भी तब संयुक्त राष्ट्र के भेजे हुए निरीक्षक शहर के बाहर खड़े हो. रासायनिक हथियारों पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों के टूटने के बाद भी रूस ने सुरक्षा परिषद को रोक रखा है, हालाँकि रूस खुद रासायनिक हथियारों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय संधि से बंधा हुआ है."

इसके पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन यह संकेत दे चुके हैं कि वो सुरक्षा परिषद में सीरिया के मुद्दे पर वोट होने दे सकते हैं बशर्ते सीरिया की सरकार के खिलाफ अकाट्य सबूत मौजूद हों.

रूस के राष्ट्रपति कार्यालय के मुख्य अधिकारी सर्गेई इवानोव ने कहा है कि अगर अमरीकी संसद सीरिया पर सैनिक कार्रवाई के पक्ष में मतदान कर भी देती है तो भी सीरिया पर हमला गैर कानूनी ही होगा.

'ब्रिटेन को मिले नए सबूत'

Image caption संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी दूत ने रूस की आलोचना की है

इस बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने बीबीसी को बताया कि दमिश्क में हुए रासायनिक हमले को लेकर उनके हाथ नए सबूत लगे हैं. कैमरन भी जी-20 के शिखर सम्मेलन के लिए रूस में हैं.

कैमरन ने कहा कि ब्रितानी वैज्ञानिक दमिश्क से आए नमूनों का अध्ययन कर रहे हैं. उन्होंने इस बात से इनकार किया कि ब्रिटेन की संसद में सीरिया पर सैन्य कार्रवाई के खिलाफ मत पड़ने के बाद उनके देश के लिए वहां कोई भूमिका नहीं रह गई है.

ब्रितानी प्रधानमंत्री ने कहा कि सीरिया में मानवीय सहायता और शांति स्थापित करने के लिए उनका देश काम करता रहेगा.

बीबीसी के राजनीतिक मामलों के संपादक निक रॉबिन्सन से बातचीत में कैमरन ने कहा, "अगर सीरिया पर सैन्य कार्रवाई करने के पहले संसद का आपात सत्र नहीं बुलाया होता तो सांसदों की राय का सम्मान नहीं हो पाता."

कैमरन ने कहा कि उनकी अपनी पार्टी के वो सांसद, जिन्होंने विपक्षी सांसदों के साथ सीरिया पर सैन्य कार्रवाई में ब्रिटेन को शामिल होने से रोका, उन्होंने "आसान राजनीतिक राह चुनी ना की सही राह जो कठिन है."

कैमरन ने जोर दे कर कहा, "मैं पूरी तरह मानता हूँ कि अमरीका ने एक बार सीरिया में रासायनिक हमले के बारे में लाल रेखा तय कर दी और अगर उस रेखा को पार किया गया है तो कार्रवाई होनी चाहिए. अगर सीरिया पर कार्रवाई नहीं हुई तो असद सरकार और अन्य तानाशाहों के पास एक गलत संदेश जाएगा."

अमरीकी संसद से अपील

सीरिया की संसद के अध्यक्ष ने अमरीकी संसद में अपने समकक्ष रिपब्लिकन नेता जॉन बोएनर को लिखे एक ख़त में सीरिया पर हमले के आदेश देने में जल्दबाजी ना करने को कहा है.

दमिश्क में बशर अल असद सरकार पर पिछले ढाई साल के विद्रोह के दौरान कई बार रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का आरोप है. ताज़ा आरोप 21 अगस्त को राजधानी दमिश्क के बाहरी इलाके में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का है.

असद सरकार इन तमाम आरोपों को सिरे से ख़ारिज करती है.

अमरीका का कहना है कि ताजा रासायनिक हमले में 1429 लोगों की मौत हुई थी. वैज्ञैनिकों को कहना है कि इस हमले सीरिन गैस का इस्तेमाल हुआ.

यूं तो जी 20 की इस बैठक का मुख्य मुद्दा वैश्विक आर्थिक सेहत है लेकिन सीरिया का मुद्दा अन्य मुद्दों को गौण कर रहा है .

रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने कहा है, "वैश्विक आर्थिक संकट का ख़तरा अभी तक पूरी तरह से टला नहीं है ."

वहीं अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा इस सम्मेलन में सीरिया पर सैन्य कार्रवाई के लिए दूसरे देशों से सहयोग मिलने की उम्मीद कर रहे हैं.

सीरिया पर सैन्य कार्रवाई को लेकर पुतिन कह चुके हैं कि इस तरह की कोई भी कार्रवाई बिना संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की मंज़ूरी के नहीं होना चाहिए. पुतिन के अनुसार बिना संयुक्त राष्ट्र की अनुमति के की गयी कार्रवाई "आक्रमण" होगी.

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