'एशिया में एक चौथाई पुरुषों ने बलात्कार' की बात मानी

  • 10 सितंबर 2013
एक प्लेकार्ड

संयुक्त राष्ट्र के एक सर्वेक्षण में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मौजूद देशों में हर चौथे पुरुष ने कम से कम एक महिला के साथ बलात्कार करने की बात स्वीकार की है.

सर्वेक्षण के दौरान यह बात उभर कर सामने आई है कि स्त्री-पुरुष के आपसी संबंधों में बलात्कार आम बात है. जबकि दस में से एक शख्स ने ये बात स्वीकार की उन्होंने उस महिला के साथ बलात्कार किया जो उनकी पार्टनर नहीं थीं.

इस सर्वेक्षण के लिए शोधकर्ताओं ने छह अलग-अलग देशों के दस हज़ार लोगों से बात की गई. इसमें पता चला कि जितने लोगों से बात की गई उनमें से क़रीब आधे ने किसी न किसी महिला को यौन संबंध बनाने के लिए मज़बूर किया.

महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध पर कई देशों में किया गया यह अपने तरह का पहला सर्वेक्षण है.

इसमें पुरुषों से पूछा गया कि उन्होंने ऐसा क्यों किया तो अधिकांश का कहना था कि उन्होंने ऐसा यौन संबंधों की जरूरत और मनोरंजन के लिए किया.

महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा

सर्वेक्षण में प्रतिक्रिया देने वालों में पापुआ न्यू गिनी के 62 फ़ीसदी पुरुषों ने बलात्कार करना स्वीकार किया. बांग्लादेश के ग्रामीण इलाकों और इंडोनेशिया में यह संख्या सबसे कम है. जहाँ दर दस में से एक व्यक्ति ने बलात्कार करना स्वीकार किया.

अधिकांश पुरुषों ने सर्वेक्षण में इस बात को स्वीकार किया कि बलात्कार के लिए उन्हें किसी क़ानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ा.

शोधकर्ताओं का कहना कि लैंगिक नजरिए के अलावा ग़रीबी या बचपन में भावनात्मक या शारीरिक रूप से किया गया उत्पीड़न भी पुरुषों के हिंसक व्यवहार का प्रमुख कारण हो सकता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक पहले की रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिया की करीब एक तिहाई महिलाओं ने कहा कि वे घरेलू या यौन हिंसा की शिकार हुई हैं.

दक्षिण अफ़्रीका की मेडिकल रिसर्च काउंसिल की रशेल ज्यूकेश ने कहा, ''यह साफ़ है कि आम लोगों में महिलाओं के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा हमारी सोच से ज़्यादा फैल चुकी है. ये दो अध्ययन इसके उदाहरण हैं.''

अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण

इस अध्ययन के लिए संयुक्त राष्ट्र की कुछ एजेंसियों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, नार्वे और स्वीडन जैसे कुछ देशों ने मदद की थी.

यह अध्ययन लैंसेट ग्लोबल हेल्थ के ऑनलाइन संस्करण में मंगलवार को प्रकाशित हुआ है. इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने बांग्लादेश, चीन, कंबोडिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और पापुआ न्यू गिनी के दस हज़ार से अधिक पुरुषों से बातचीत की.

इन पुरुषों से बातचीत में बलात्कार शब्द का प्रयोग नहीं किया गया. उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने किसी महिला से बिना उसकी मर्जी के ज़ोर-जबरदस्ती से या किसी शराब पी हुई महिला या नशे में धुत्त महिला को यौन संबंध के लिए मजबूर किया है.

अधिकांश जगहों पर छह से आठ फ़ीसदी महिलाओं ने ऐसी महिलाओं के साथ बलात्कार किया जो उनकी साथी नहीं थीं. जब इसमें पत्नियों और महिला मित्रों को जोड़ लिया जाए, तो यह संख्या 30-57 फ़ीसदी तक पहुँच जाती है.

जिन लोगों ने किसी महिला से जबरन यौन संबंध बनाने की बात स्वीकार की, उनमें से 70 फ़ीसदी से अधिक पुरुषों ने कहा कि उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उन्हें ऐसा करने का अधिकार है.

वहीं क़रीब 60 फ़ीसदी ने कहा कि वे उबे हुए थे और मजे करना चाहते थे और क़रीब 40 फ़ीसदी पुरुषों ने कहा कि वे नाराज़ थे और महिला को सज़ा देना चाहते थे. केवल आधे लोगों ने कहा कि वे अपने किए पर शर्मिंदा हैं और केवल 23 फ़ीसदी लोगों को बलात्कार के आरोप में जेल भेजा गया.

हिंसा ही हिंसा

जॉन हॉपकिंस ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ की असिस्टेंट प्रोफेसर मिशेल डेकर ने कहा, ''यह समस्या चौंकाने वाली है, हम जहाँ भी देखते हैं साथी के साथ हिंसा, उत्पीड़न और यौन हिंसा नज़र आती है. ''

महिलाओं के लिए सेवाएं ही पर्याप्त नहीं हैं. यह कहना है लंदन स्कूल ऑफ़ हाइज़िन एंड ट्रोपिकल मेडिसिन के जेंडर वायलेंस एंड हेल्थ सेंटर की प्रमुख चार्लोटे वॉट्स का. वह इस अध्ययन में शामिल नहीं थी. वो कहती हैं अफ़्रीका में मर्दानगी के पारंपरिक विचारों को चुनौती देन वाली कुछ योजनाएं सफल हो रही हैं.

वो कहती हैं, ''हो सकता है कि जिस संस्कृति में वे पले-बढ़े हो, उसमें हिंसा को माफ़ कर दिया जाता हो. लेकिन इसे बदलना असंभव नहीं है.''

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