वह शख्स, जिसने 9/11 की 'साज़िश' रची

  • 12 सितंबर 2013
Image caption अमरीका बनाम मोहम्मद के मामले को शताब्दी का मुकदमा बताया जा रहा है.

न्यूयार्क में जब 9/11 की 12वीं बरसी पर मृतकों के रिश्तेदार इकट्ठे हुए तब वहां से 1,400 मील दूर एक शख्स अपने मुक़दमे का इंतजार कर रहा था. वो दावा करता है कि वह हमलों का मास्टरमाइंड था.

अगस्त की एक सुबह क्यूबा के ग्वांतानामो में अदालत के कमरे में ख़ालिद शेख़ मोहम्मद दाखिल होते हैं. दरवाजा एक क्षण के लिए खुलता है और फर्श पर सूरज की रोशनी बिखर जाती है.

गैलरी से तीन कांच की प्लेटों के पीछे से लौरा और कैरोलीन ओगोनोवस्की उन्हें देखती हैं. ये दोनों अमरीकी एयरलाइंस फ्लाइट 11 के 50 वर्षीय पायलट जॉन ओगोनोवस्की की बेटियां हैं.

ये वो पहला जहाज़ था जो 11 सितंबर 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की इमारत से टकराया था.

टॉम और जोएन मीहान भी वहां थे, उन्होंने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में बेटी 26 वर्षीय कॉलीन बार्को को खोया. रोजमेरी डिलार्ड के 54 वर्षीय पति एडी उस जेट में थे, जो पेंटागन पर गिरा.

अदालत का कमरा शांत था.

गैलरी में मौजूद किसी ने उनके हाव-भाव पर कहा कि वह छोटे कद का भारी भरकम शख्स था. पहले उन्होंने दोनों हाथों से पगड़ी ठीक की. वह यूं चल रहा था मानो लगा स्टार वार्स का कोई चरित्र हो.

Image caption उन पर आतंकवाद के साथ 2,976 लोगों की हत्या का भी आरोप है.

अदालत के चित्रकार जैनेट हैम्लिन ने कहा, ''उनकी आवाज ऊंची थी.''

अमरीका बनाम मोहम्मद

मोहम्मद और अन्य चार प्रतिवादी, वालिद बिन अताश, अमार अल-बलूची (उन्हे अबद अल-अज़ीज अली के नाम से भी जाना जाता है), रम्जी बिनालशीभ और मुस्तफा अहमद अल-हावसावी पर आर्थिक मदद करने और उन आतंकियों को प्रशिक्षित करने का आरोप है, जिन्होंने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, पेंटागन और पेनसिल्वेनिया की ओर जेट उड़ाए.

उन पर आतंकवाद के साथ 2,976 लोगों की हत्या का भी आरोप है जिस पर उन्हे फांसी की सजा सुनाई जा सकती है.

अमरीका बनाम ख़ालिद शेख़ मोहम्मद के मामले को शताब्दी का मुकदमा बताया जा रहा है. इस पूरे प्रकरण के केंद्र में हैं अल क़ायदा के सदस्य.

ख़ालिद शेख़ मोहम्मद के खिलाफ़ चल रही कानूनी कार्यवाही अदालत के कमरे में मौजूद लोगों को न केवल उन्हें देखने बल्कि अल कायदा को समझने का भी मौका दे रही हैं.

48 वर्षीय ख़ालिद शेख़ मोहम्मद एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं. माना जा रहा है कि अल कायदा द्वारा अमरीका पर हमलों के मास्टर माइंड वही थे.

अमरीकी फौजों के इराक में दाखिल होने से तीन हफ्ते पहले उन्हें पाकिस्तान में एक मार्च 2003 में पकड़ा गया.

उस समय अमरीकी डरे हुए थे. वो अनुमान लगा रहे थे कि अल कायदा कब दोबारा हमला कर सकता है.

तभी पेंटागन के अधिकारी इराक़ पर सैन्य कार्रवाई की तैयारियां कर रहे थे. बुश प्रशासन के अधिकारियों को सद्दाम हुसैन और अल कायदा के बीच संपर्क के बारे में बताया गया.

प्रमाण

उप राष्ट्रपति डिक चेनी ने एक टेलीविजन इंटरव्यू में कहा, ''जो प्रमाण मिले वो जबरदस्त हैं.''

वर्ष 2009 में अमरीकी अटॉर्नी जनरल एरिक होल्डर ने घोषणा की कि ख़ालिद शेख़ मोहम्मद का ट्रायल न्यूयॉर्क में होगा.

उसी दौरान अमरीका में सुरक्षा को लेकर भावनात्मक तौर पर बहस ज़ोर पकड़ रही थी कि क्या अल कायदा गंभीर खतरा है.

उसके बाद राष्ट्रपति बराक ओबामा औऱ उनके अधीनस्थों ने देश को इस डर से बाहर निकालने की हरसंभव कोशिश की. हालांकि तब कोई नहीं मान रहा था कि खतरा खत्म हो गया.

कंजरवेटिव नाराज हो रहे थे, कह रहे थे कि ख़ालिद शेख़ मोहम्मद अमरीका के लिए खतरा है. उन पर सैनिक अदालत में मुकदमा चलाया जाए.

होल्डर को इस योजना पर विराम लगाना पड़ा. अभियोग पक्ष ने वर्ष 2011 में ख़ालिद शेख़ मोहम्मद के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया.

तब से वे लोगों की नजरों में हैं. जेल में रहते हुए उन्होनें वैक्यूम क्लीनर को फिर से ईजाद करके दिखाया.

9/11 कमीशन रिपोर्ट के लेखकों के अनुसार, अल कायदा में ख़ालिद शेख़ मोहम्मद की छवि समय के साथ बदलती चली गई. 90 के दशक में उनकी लोकप्रियता चरम पर थी.

ख़ालिद शेख़ मोहम्मद के सहयोगी उन्हे बुद्धिमान, कार्यदक्ष और जल्दी आपा खोने वाला बताते हैं.

पूर्व सीआईए अफसर और 'अंडरस्टैंडिंग टेरर नेटवर्क' के लेखक मार्क सेगमन कहते हैं, ''बहुत ऊंचा उठने की उनकी छवि 9/11 हमलों के बाद बनी. जब ख़ालिद शेख़ मोहम्मद गिरफ्तार हुए तो उन्हे शहीद का दर्जा मिल गया.''

वैसे लंबे समय से अल कायदा के लोगों से संवाद नहीं होने से संगठन पर उनका प्रभाव खासा कम हो चुका है.

ट्रायल में देर

Image caption अभियोजन पक्ष चाहता है कि ट्रायल एक साल में शुरू हो जाए.

उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही कैंप जस्टिस नामक परिसर में एक धातु से बनी बिल्डिंग में हो रही है.

अभियोजन पक्ष चाहता है कि ट्रायल एक साल में शुरू हो जाए. लेकिन बचाव पक्ष के वकील बाउक कहते हैं कि इस मामले से जुड़े कानूनी मामलों को सुलझाने में कहीं ज्यादा समय लगेगा.

मोहम्मद के वकील का कहना है कि जब उन्हे सीआईए द्वारा रोमानिया और पोलैंड में संचालित गुप्त ठिकानों पर रखा गया तब खासी यातनाएं दी गईं.

पूछताछ में सबूत उगलवाने के लिए निर्ममता भी दिखाई गई. उनके वकील का कहना है कि इन वजहों से उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निरस्त किए जाने चाहिए.

पिछले महीने जब ख़ालिद शेख़ मोहम्मद अदालत के कमरे में दाखिल हुए तो धूप का चश्मा लगाए थे. कोर्टरूम में वह सुकून में लग रहे थे.

"मौत का सौदागर हूं और मुख्य आरोपी, जो अब शहीद होना चाहता है", जैसा कि उन्होंने वर्ष 2008 में दावा किया. उन्होंने अदालत को विस्तार से अल कायदा में खुद के मास्टर माइंड होने के बारे में बताया. कोर्ट ने उन्हे शांति से सुना.

इमेज

अल कायदा के 'पब्लिक रिलेशन डायरेक्टर' ख़ालिद शेख़ मोहम्मद ने कोशिश की कि उनकी इमेज अल कायदा सरीखी दिखे, जिसके लिए उन्होनें दाढी को लाल-नारंगी रंग में रंगा. कुर्ता पहनने के साथ मिलिट्री स्टाइल में जैकेट पहनी, जिससे लगे कि वह लड़ाका हैं.

मोहम्मद का जन्म कुवैत शहर के उपनगर में एक धार्मिक परिवार में हुआ. वह पाकिस्तान के नागरिक हैं, हालांकि उनके रिश्तेदार बलूचिस्तान से ताल्लुक रखते हैं.

11 या 12 साल की उम्र में उन्होंने टीवी पर मुस्लिम ब्रदरहुड के प्रोग्राम देखने शुरू कर दिए. इसके बाद रेगिस्तान में चलने वाले कैंपों में हिस्सा लिया. जिहाद में दिलचस्पी दिखाई.

अमरीकी रक्षा विभाग की दिसंबर 2006 की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार ने उन्हें पढाई के लिए अमरीका भेजा.

उत्तरी कैरोलीना एग्रीकल्चर एंड टैक्निकल स्टेट यूनिवर्सिटी से वर्ष 1986 में इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद वह अफगानिस्तान में युद्ध मोर्चों पर हाइड्रॉलिक ड्रिल्स लगाने का काम करने लगे.

रक्षा विभाग के अनुसार, उस समय वह अमरीका समर्थक मुजाहिदीन की मदद कर रहे थे. उन्होनें कहा, "बाद में मैं अमरीका का दुश्मन बन गया".

9/11 कमीशन रिपोर्ट के लेखकों का कहना है कि उन्होंने अमरीका में रहने के दौरान ऐसा कुछ नहीं देखा जिससे वह अमरीका विरोधी हो गए बल्कि उनका कहना था कि इसकी वजह अमरीका की इसराइल संबंधी नीतियां थीं.

मुस्लिम ब्रदरहुड

Image caption अल कायदा के लोगों से संवाद नहीं होने से संगठन पर उनका प्रभाव खासा कम हो चुका है.

जिहाद के मुस्लिम ब्रदरहुड ब्रांड से वह काफी प्रभावित रहे. सरकार के दस्तावेजों के अनुसार, वह हिंसा का सहारा लेना चाहते थे. उन्होंने खुद 2001 हमलों के लिए लक्ष्य तय किए.

9/11 कमीशन रिपोर्ट के लेखकों के अनुसार, उन्होंने 10 कामर्शियल जेट विमानों को हाईजैक करने की योजना बनाई थी. एक जेट वह खुद उड़ाना चाहते थे.

इन हमलों के कई महीने बाद में वाल स्ट्रीट जनरल पत्रकार डैनियल पर्ल एक आतंकी अहमद उमर सईद शेख से इंटरव्यू कर पाने में सफल हो गए.

शेख लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के पूर्व छात्र थे और कराची में रह रहे थे. इसके बाद पर्ल का अपहरण कर लिया गया और सिर उड़ा दिया गया.

ख़ालिद शेख़ मोहम्मद ने अदालत में कहा, "ये हत्या उन्होंने चाकू से की थी".

पाकिस्तान में गुप्त ठिकाने पर उन्होंने एक पत्रकार को बताया कि हमले की योजना इस तरह तैयार की गई थी कि ज्यादा से ज्यादा लोग मारे जाएं और अमरीका को उसी की ज़मीन पर तमाचा लगाया जा सके.

हमले के सात महीने बाद उन्हें रावलपिंडी में पकड़ा गया और पोलैंड ले जाया गया.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार