टीचर ने स्कूल में दिया बेटे को जन्म

  • 18 सितंबर 2013

पूर्वी लंदन स्थित शिगवेल के एक प्राइमरी स्कूल की अध्यापिका ने स्कूल में ही अपने बेटे को जन्म दिया.

अध्यापिका एक सहयोगी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि उसने किस तरह अपनी अध्यापिका साथी कृष वीरामनी के प्रसव में सहयोग किया.

वीरामनी को तय तारीख के एक सप्ताह पहले ही प्रवस पीड़ा होनी शुरू हो गई. इसके बाद मैनफोर्ड प्राइमरी स्कूल की तीन सहयोगियों ने उसके बेटे जोनाह को जन्म देने में उसकी मदद की.

तीस वर्षीया वीरामनी ने बताया कि हर किसी ने उसकी मदद की और जिसकी वजह से बहुत ही सहज तरीके से बच्चे का जन्म हुआ.

समय पर पहुंचा पति

उन्होंने बताया कि किस्मत से उसका पति भी बेटे के जन्म से पहले ही स्कूल पहुंच गया.

वीरामनी स्कूल में सुबह की मीटिंग के लिए गईं, लेकिन अस्वस्थ महसूस करने की वजह से जल्दी ही घर जाने की इच्छा जताई.

वीरामनी ने कहा कि उन्होंने अपने पति को मैसेज किया की वह आकर उसे ले जाए और तुरन्त घर जाने की इच्छा जाहिर की.

वीरामनी ने कहा कि उसने सोचा भी नहीं था कि इस तरह से दर्द होना शुरू हो जाएगा.

जबकि वीरामनी का पति विजय वीरामनी उसे ले जाने के लिए रास्ते में ही था कि फोन आया कि वीरामनी को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई है.

इसके बाद सहायक अध्यापकों डीता गोज़नोवसी, चेरिस स्वोर्ड और सैम मुस्तफा ने क्लास रूम में उनके बेटे को जन्म देने में मदद की.

उन्होंने बताया कि यह सब काफी जल्दबाजी में हुआ. बीस मिनट की फोन कॉलों के बीच मेरे पास मेरा बेटा जोनाह था.

जोनाह वीरामनी की दूसरी संतान है. जबकि पहली संतान अस्पताल में ही हुई थी.

जोनाह को जन्म देने के बाद मां-बेटे दोनों को रोमफोर्ड अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में उन्हें छुट्टी दे दी गई.

वीरामनी ने कहा कि हम लोग मजाक में कहते हैं कि जोनाह पहले ही दिन अपने स्कूल में देरी से आया क्यों कि उसके जन्म से पहले ही स्कूल की घंटी बज चुकी थी.

स्कूल ने अब उस क्लास रूम का नाम जोनाह के नाम पर रख दिया है.

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