क्या स्कूलों में बच्चों को यौन शिक्षा मिलनी चाहिए?

पोर्न
Image caption स्कूलों में यौन शिक्षा को लेकर बहस छिड़ी हुई है

कहीं आपके बच्चे इंटरनेट पर आपत्तिजनक तस्वीरें या वीडियो तो नहीं देख रहें? आज के ज़माने में बहुत बार माता-पिता को ये चिंता रहती है. स्मार्टफ़ोन और टैबलेट के आने से बच्चों की गतिविधियों पर नज़र रखना लगातार मुश्किल होता जा रहा है.

ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि क्या स्कूलों में सेक्स की शिक्षा देना पोर्नोग्राफ़ी की तरफ़ झुकाव को कम करने का कारगर तरीक़ा है.

इंग्लैंड में मिडलसेक्स यूनिवर्सिटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ बड़ी संख्या में बच्चे की पहुँच पोर्नोग्राफ़ी तक है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पोर्नोग्राफ़ी से लोगों का सेक्स और रिश्तों के प्रति नज़रिया बदल जाता है और इस वजह से कई बार किशोर बेहद कम उम्र में यौन संबंध बना लेते हैं. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बात के ज़्यादा सुबूत नहीं है कि पोर्न देखने से सीधे तौर पर बर्ताव पर क्या असर पड़ता है.

रिपोर्ट की सह लेखिका डॉक्टर मरिंडा हॉरवथ स्कूल में यौन शिक्षा पर ज़ोर देते हुए कहती हैं, “सेक्स और रिश्तों के बारे में बच्चों से बात करने के लिए यौन शिक्षा एक ज़रूरी और अहम शुरुआत हो सकती है. ऐसा करने से सेक्स से जुड़ी सामग्री देखने की ललक कम होगी. पर ये शिक्षा उम्र के हिसाब से दी जानी चाहिए.”

कैसे मिले यौन शिक्षा

Image caption बच्चों में पोर्न देखने की समस्या चिंता का विषय बनी हुई है

डॉक्टर मरिंडा का कहना है, “ बच्चों और युवाओं को वो जगह और आज़ादी दी जानी चाहिए कि वो पोर्नोग्राफ़ी और इससे जुड़े अनुभवों पर बात कर सकें. इस मुद्दे पर बच्चों और युवाओं के पास कहने के लिए बहुत कुछ है. शोध का केंद्र बिंदु बच्चों को ही होना चाहिए लेकिन पोर्न से जुड़े शोध में बच्चों को ध्यान में नहीं रखा जाता.”

डॉक्टर हॉरवथ के शोध के मुताबिक़ पोर्न देखने की ललक के पीछे की वजहों में कौतुहूल, लुत्फ़ उठाना, साथियों का दबाव रहता है.

लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी के डॉक्टर मार्क लिमर कहते हैं, “हमें बच्चों को ये समझाना होगा कि सेक्स की रिश्तों में अपनी जगह है और ये बहुत निजी चीज़ है. लेकिन हम बच्चों को हमेशा यही सिखाते रहते हैं कि ये मत करो जबकि हमें उन्हें समझाना चाहिए.”

डॉक्टर मार्क लिमर का मानना है कि बच्चे पोर्नोग्राफ़ी की तरफ़ तब आकर्षित होते हैं जब सेक्स और रिश्तों से जुड़े उनके सवालों का क्लासरूम में उस तरह से जवाब नहीं दिया जाता जैसे धूम्रपान आदि के बारे में बताया जाता है.

हालांकि यौन शिक्षा कैसे दी जाए इस पर भी काफ़ी बहस हुई है.

ऑनलाइन पोर्नोग्राफ़ी

सेक्स एजुकेश्न फ़ोरम नाम की संस्था में काम करने वाली लूसी कहती हैं, “प्राइमरी स्कूल में बच्चों को गुप्त अंगों के बारे में सही जानकारी दी जानी चाहिए ताकि वयस्क भी इस पर बात करते हुए असहज महसूस न करें. बच्चों को समझाना होगा कि क्या क़ानूनी है और क्या ग़ैर क़ानूनी, उन्हें सेक्सटिंग के बारे में बताना होगा- यानी फ़ोन पर अश्लील संदेश या तस्वीर भेजना.”

वे कहती हैं कि हम ये इंतज़ार नहीं कर सकते कि बच्चे पोर्नोग्राफ़ी की ओर बढ़े बल्कि इस बारे में पहले से खुल कर बच्चों से बात करनी चाहिए.

ब्रिटेन में स्वतंत्र नियामक संस्था ऑफ़कॉम के सर्वे के मुताबिक़ बच्चे इंटरनेट पर ज़्यादा वक़्त बिता रहे हैं और इस बात के आसार ज़्यादा हैं कि वे अकेले में इंटरनेट पर समय बिताते हैं.

अगर किशोर अकेले में अपने कमरों में इंटरनेट पर जाते हैं तो इस बात का ख़तरा रहता है कि वे ऑनलाइन पोर्नोग्राफ़ी देखेंगे.

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