ट्यूनीशिया: महिलाओं का जिहाद-अल-निकाह

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Image caption ट्यूनीशिया सरकार के गृहमंत्री का कहना है कि उनके देश से महिलाएं सीरिया जा रही हैं.

ट्यूनीशिया के गृहमंत्री ने देश की नेशनल एसेंबली में कहा है कि ट्यूनीशिया की महिलाएँ सीरिया जाकर अपनी मर्ज़ी से असद सरकार विरोधी विद्रोहियों के साथ शारीरिक संबंध बना रही हैं.

समाजार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ ट्यूनीशिया के गृहमंत्री लोत्फी बेन जेदाऊ ने सांसदों को बताया है, "ये महिलाएँ 20, 30, 100 जिहादियों के साथ शारीरिक संबंध बनाती हैं. महिलाएँ ये संबंध "जिहाद अल-निकाह" के नाम पर बनाती हैं और गर्भवती होकर ट्यूनिशिया वापस लौटती हैं."

यह बयान देते हुए बेन जेदाऊ ने यह साफ़ नहीं किया कि ट्यूनीशिया से सीरिया जाने वाली महिलाओं की तादाद कितनी है.

उन्होंने यह भी नहीं बताया कि अब तक कितनी महिलाएँ ट्यूनीशिया से गर्भवती होकर लौटी हैं.

सलाफ़ियों का समर्थन

"जिहाद अल-निकाह" की अवधारणा के तहत कोई मुस्लिम महिला विवाहेतर शारीरिक संबंध बना सकती है.

"जिहाद अल-निकाह" को कुछ सलाफ़ी सुन्नी मुस्लिम संगठनों का समर्थन प्राप्त है. जिनका मानना है कि यह जिहाद का एक न्यायोचित तरीका है.

गृहमंत्री के बयान के बाद ट्यूनीशिया के महिला मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि "जिहाद अल-निकाह" के लिए सीरिया जाने वाली महिलाओं की बढ़ती तादाद पर नियंत्रण के लिए योजना बनाई जा रही है.

महिला मंत्रालय ने एक बयान में कहा है, "मंत्रालय "जिहाद अल-निकाह" को बढ़ावा देने वालों को हतोत्साहित करने के लिए प्रस्तुत सरकारी या ग़ैरसरकारी योजनाओँ को पूरी मदद देगा."

मंत्रालय ने यह भी कहा है, "मंत्रालय ऐसी योजना लाएगा जिसके तहत महिलाओं को इस कवायद के ख़तरों के प्रति आगाह करने, संवेदनशील बनाने और शिक्षित बनाने का कार्य किया जाएगा."

ट्यूनीशिया के मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार देश से सैकड़ों महिलाएँ "जिहाद अल-निकाह" के लिए सीरिया जा रही हैं. इन ख़बरों में यह भी कहा गया है कि ट्यूनिशिया के युवक भी भारी तादाद में असद सरकार के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए सीरिया जा रहे हैं.

हालाँकि बेन जेदाऊ ने कहा है कि इस साल मार्च में गृहमंत्री बनने के बाद उनकी सरकार ने छह हज़ार युवकों को सीरिया जाने से रोका है.

इन मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि ट्यूनीशिया के सैकड़ों नौजवान पिछले 15 साल में मुख्यतः तुर्की या लीबिया के रास्ते अफ़ग़ानिस्तान, इराक़ और सीरिया में लड़ने के लिए गए हैं.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार ट्यूनीशिया के प्रमुख सलाफ़ी आंदोलन अंसार अल-शरिया के नेता अबु इयाद की पिछले दस साल में ट्यूनीशिया और अफ़ग़ानिस्तान के अमरीकी दूतावासों पर हमलों में प्रमुख भूमिका रही है.

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