जर्मनी में क्यों पढ़ना चाहते हैं युवा?

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ब्रिटेन के ब्रिस्टल के राइस कहते हैं, "मुझे लगता है कि जब हम लोग वापस जाएंगे तो सभी प्रशिक्षुओं को नौकरी की गारंटी होगी, इसलिए मुझे लगता है कि हम लोग ठीकठाक रहेंगे."

राइस और उनके साथी बर्लिन में एक मेज के चारों ओर जमा हैं जहाँ चारों ओर शोरगुल है.

सिर्फ़ 19 साल के राइस इस प्रशिक्षण केंद्र में अपने ग्रुप में सबसे कम उम्र वाले हैं.

राइस उन 2,200 युवाओं में से है जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल कंपनी साइमंस ने 45 हज़ार लोगों में से चुना है.

एक और प्रशिक्षु हैं गैब्रिएल जिनका कहना है कि वो जर्मन तौर तरीके सीखने के लिए बर्लिन आए हैं. वे नॉर्थेम्पटन के हैं. उनका कहना है, "वे बहुत स्पष्ट होते हैं और तफ़सील से बताते हैं."

ब्रिटेन के औद्योगिक संगठन कंफेडरेशन ऑफ बिज़नेस इंडस्ट्रीज़ ने इस बारे में हाल ही में चेतावनी दी थी कि ब्रिटेन की पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था, ए-लेवल के बाद यूनिवर्सिटी डिग्री, अच्छी नौकरी का रास्ता न होना...इससे ब्रिटेन में दक्षता का संकट और गहराएगा.

कंफेडरेशन ऑफ बिज़नेस इंडस्ट्रीज़ ने कहा था कि ऐसी और योजनाएं शुरू की जानी चाहिए जिनमें प्रशिक्षुओं को सीखते हुए पैसे भी मिले, जिन्हें कंपनियां समर्थन दें. इस संगठन ने व्यावसायिक शिक्षा को लेकर जर्मनी की मिसाल दी थी.

'शानदार अवसर'

Image caption स्टॉकमैन का कहना है कि ये ट्रेनिंग कंपनियों और युवाओं दोनों के लिए ही ठीक है.

सीमंस के प्रशिक्षु पूरे यूरोप से कंपनी के 3 साल के कार्यक्रम के लिए आए हैं और इंजीनियरिंग सीखते हुए ही उन्हें वेतन भी मिलेगा.

मैड्रिड के मिग्वेल वापस स्पेन जाना चाहते हैं, हालांकि वहां नौकरी को लेकर हालात अच्छे नहीं हैं और दो में से एक युवा बेरोज़गार है.

लिथुआनिया के वैनियस कहते हैं कि सभी जानते हैं कि 'मेड इन जर्मनी' का क्या मतलब है.

मिग्वेल कहते हैं, "स्पेन में हमारे पास सैंद्धांतिक और प्रायोगिक पढ़ाई एक साथ करने का अवसर नहीं होता."

सीमंस के विशाल ट्रेनिंग सेंटर में एक ब्रितानी लड़की जर्मन सीखने की कोशिश कर रही है. जर्मन सीखना इन सभी के लिए ज़रूरी है.

सभी प्रशिक्षुओं को संस्कृति को समझने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, बैंक खाते खोलने सहित दूसरी चीज़ों में मदद दी जाती है.

जर्मनी का व्यवासायिक शिक्षा तंत्र कई दशकों से समाज का हिस्सा है. यहां एक यूनिवर्सिटी डिग्री का उतना महत्व नहीं है जितना दूसरे विकसित देशों में है.

जो लोग विश्वविद्यालय नहीं जाना चाहते वो ऐसे शिक्षा कार्यक्रमों में जा सकते हैं जहां वो हफ़्ते के कुछ दिन उस कंपनी के साथ काम करें जो उन्हें पैसे दे और उन्हें ज़रूरी हुनर सिखाए. बाकी समय वे स्कूल में बिताते हैं.

औद्योगिक संगठन भी इसमें शामिल होते हैं ताकि काम और पढ़ाई में अंतर न हो.

प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षुओं के पास इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, विक्रय और विपणन, कृषि और जहाजरानी क्षेत्र में नौकरियां होती हैं.

तीन में से दो जर्मन इस व्यवस्था के ज़रिए आगे बढ़ते हैं.

'वफ़ादार और गौरवान्वित'

बर्लिन के ओपन यूरोप थिंक टैंक में अर्थशास्त्री नोरा हेस कहती हैं, "ये बहुत प्रायोगिक तरीका है, जहां युवाओं को आंशिक रूप से नौकरी दी जाती है और आंशिक रूप से पढ़ाई में मदद दी जाती है."

सीमंस का प्रशिक्षण केंद्र चलाने वाले मार्टिन स्टॉकमैन कहते हैं कि इस तरह के प्रशिक्षण कंपनी और युवाओं दोनों ही के लिए अच्छा निवेश है.

वो कहते हैं, "उनमें से करीब 90% पढ़ाई पूरी करने के बाद सीमंस में ही रहते हैं."

सीमंस का कहना है कि ये प्रतिभा का पलायन नहीं है.

Image caption राइस को उम्मीद है कि इस ट्रेनिंग से उन्हें नौकरी मिलेगी.

स्टॉकमैन कहते हैं, "वे सभी सीमंस के साथ काम करते हुए भी घर जा सकते हैं, अपने देश में काम कर सकते हैं."

जर्मनी की व्यावसायिक शिक्षा व्यवस्था की वकालत करने वाले कहते हैं कि मंदी के बावजूद जर्मनी में बेरोज़गार युवाओं की संख्या कम है.

जर्मनी में युवा बेरोज़गार 8% से कम हैं, इसकी तुलना में स्पेन में 56% और इटली में 38% युवा बेरोज़गार हैं.

सीमित ज्ञान

हालांकि कुछ लोगों का तर्क है कि इस शिक्षा व्यवस्था की कुछ कमियां भी हैं.

म्यूनिख का इफो इंस्टीट्यूट कहता है कि इससे युवाओं को नौकरी मिलने में आसानी होती है लेकिन जब वो बुज़ुर्ग हो जाते हैं तो उनका हुनर किसी काम का नहीं रहता.

इसके अलावा उनका ज्ञान उन्हें प्रशिक्षण देने वाली कंपनी तक ही सीमित रहता है.

इसके बावजूद एक ऐसे संकट में जिसने पूरे यूरोप में युवाओं के नौकरी पाने के अवसर को नुकसान पहुंचाया है, ये शिक्षा व्यवस्था उम्मीद जगाती है.

राइस का कहना है कि जो तकनीकी प्रशिक्षण वो ले रहे हैं उसकी वजह से वो अपने भविष्य के प्रति आश्वस्त हैं.

लेकिन उनका कहना है कि ब्रिटेन में, जहां 16 से 24 साल की उम्र के 9 लाख 60 हज़ार लोग बेरोज़गार हैं, उनके कई दोस्तों का भविष्य अनिश्चित है.

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