परमाणु मसले पर ईरान बातचीत के लिए तैयार

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने संयुक्त राष्ट्र की महासभा में कहा है कि परमाणु मसले पर उनका देश 'तयशुदा वक़्त में नतीजे देने वाली' बातचीत में शामिल होने के लिए तैयार है.

न्यूयॉर्क में चल रही संयुक्त राष्ट्र महासभा की सालाना बैठक में राष्ट्रपति रूहानी ने कहा कि ईरान के ख़िलाफ़ लगाए गए प्रतिबंध 'हिंसक' हैं.

रासायनिक हथियारों से जुड़े समझौते को स्वीकार करने के सीरिया के फ़ैसले का उन्होंने स्वागत किया और साथ में ऐसे हथियारों के इस्तेमाल की निंदा भी की.

उन्होंने महासभा से कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी विवाद को सुलझाने के लिए कूटनीतिक तरीक़ा अपनाया जाना चाहिए.

राष्ट्रपति रूहानी ने अंतरराष्ट्रीय मसलों पर खुला रवैया अपनाए जाने की अपील भी की.

विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम की वजह से ईरान को संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है.

'सार्थक समझौते'

हालांकि इस पर ईरान का कहना है कि वह शांतिपूर्वक उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्द्धन कर रहा है.

लेकिन अमरीका, इसराइल और उसके सहयोगी देशों को संदेह है कि ईरान के नेता परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

इससे पहले अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि ईरान के ज़रिेए हाल में उठाए गए क़दम परमाणु कार्यक्रम पर 'सार्थक समझौते' का आधार बन सकते हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासभा की सालाना बैठक में भाषण देते हुए बराक ओबामा ने कहा, ''अब कथनी और करनी में मेल दिखाने का वक़्त है कुछ इस ढंग से जो पारदर्शी हों और जिनकी जांच की जा सके.''

यानी अमरीकी राष्ट्रपति ईरान के परमाणु मुद्दे पर कूटनीति को तरजीह देने पर ज़ोर दिया है.

हालांकि उन्होंने कहा कि दोनों मुल्कों के संबध रातों-रात तो ठीक नहीं हो सकते. ओबामा ने कहा कि विदेश मंत्री जॉन केरी ईरानी हुकूमत से परमाणु मुद्दे पर सीधी बातचीत करेंगे.

'लंबी डगर पर बड़ा क़दम'

दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों के अभाव के इतिहास की बात करते हुए ओबामा का कहना था, "मैं नहीं समझता कि दोंनो देशों के बीच संबंधों के कठिन इतिहास को रातोंरात दूर किया जा सकता है क्योंकि दोनों के बीच अब भी विश्वास का गहरा अभाव है. लेकिन मैं समझता हूं कि अगर हम ईरान के परमाणु मुद्दे को सुलझाने में कामयाब हो जाएं तो हमारे बीच आपसी हितों और आदर के साथ अलग तरह के रिश्ते की ओर ले जाने वाली एक लंबी डगर पर एक बड़ा क़दम होगा."

गुरूवार को अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी और ईरानी विदेश मंत्री जव्वाद ज़रीफ़ ईरान के परमाणु मुद्दे पर बातचीत के लिए मुलाक़ात करेंगे.

पिछले 30 वर्षों से अधिक समय में दोनों देशों के बीच विदेश मंत्रीय स्तर पर यह पहली मुलाक़ात होगी.

इसके अलावा यह भी उम्मीद की जा रही है कि अमरीकी और ईरानी राष्ट्रपतियों के बीच भी भेंट हो सकती है.

सालों बाद मुलाक़ात

साल 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति के बाद 30 सालों से अधिक समय से अमरीका और ईरान के बीच कूटनीतिक संबंध नहीं रहे हैं.

हाल के वर्षों में दोंनो देशों के बीच तनाव भी बढ़ा है.

लेकिन इस वर्ष ईरान में हसन रूहानी के नए राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से दोनो देशों ने पर्दे के पीछे कूटनीति जारी रखी.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने एक दूसरे को पत्र भी लिखे जिसमें दोनो नेताओं ने कूटनीति के ज़रिए मसले सुलझाने की बात कही.

सीरिया

ओबामा ने सीरिया के रासायनिक हथयारों को नष्ट करने संबंधी प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जल्द लाए जाने की मांग की बात भी अपने भाषण में की.

महासभा के 68वें वार्षिक अधिवेशन में बोलते हुए ओबामा ने कहा, "अगर हम एक प्रस्ताव पर अब भी नहीं सहमत हो सकते तो इससे ये लगेगा कि संयुक्त राष्ट्र बुनियादी अंतर्राष्ट्रीय क़ानून को भी लागू कराने में असमर्थ है. लेकिन अगर हम कामयाब हो गए तो यह संदेश जाएगा कि रासायनिक हथियारों की 21वीं सदी में कोई जगह नहीं है और यह भी संदेश जाएगा कि संयुक्त राष्ट्र जो कहता है उसको निभाता भी है."

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस द्वारा समर्थित प्रस्ताव लाया जा रहा है जिसमें सीरिया के रासायनिक हथियारों को अंतर्राष्ट्रीय निगरानी में नष्ट करने की बात कही जाएगी.

लेकिन रूस इस प्रस्ताव में सीरिया पर किसी प्रकार के हमले की बात को शामिल करने का विरोध करता है.

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