राजनीतिक परिवार, वारिस और विरासत

  • 3 अक्तूबर 2013
राजनीति, परिवार, वंश

कई लोगों का राजनीतिक बहसों से पहला परिचय टीवी या अख़बार के जरिए नहीं होता बल्कि परिवार के साथ खाने की टेबल पर बात करते हुए होता है जहां माता-पिता किसी पार्टी के बारे में भला-बुरा कह रहे होते हैं.

ब्रिटेन की लेबर पार्टी के नेता एड मिलिबैंड की परवरिश भी ऐसे ही माहौल में हुई. उनके पिता राल्फ़ एक वामपंथी थे, उनकी मां मैरियन प्रगतिवादी विचारों के लिए अभियान चलाती थी.

लेकिन उनके परिवार का इतिहास अब एक कड़वे सार्वजनिक झगड़े की वजह बन गया है.

शनिवार को डेली मेल अख़बार ने उनके पिता राल्फ़ मिलिबैंड के बारे में एक लेख छापा जिसका शीर्षक था, "वो आदमी जो ब्रिटेन से नफ़रत करता था".

डेली मेल ने इस हमले को यह कहते हुए जायज़ ठहराया कि राल्फ़ मिलिबैंड ने अपने राजनीतिक विचार अगली पीढ़ी को दिए हैं.

डेली मेल के संपादकीय में लिखा गया, "हम ये नहीं कहते कि पिताओं के अनैतिक विचार उनके बेटों को मिलते हैं लेकिन जब प्रधानमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा रखने वाले बेटे अपने पिता की सीख को स्वीकार करते हैं, जैसा कि लगता है कि एड मिलिबैंड ने किया है, तो मामला अलग होता है."

इससे एड मिलिबैंड ज़बरदस्त ग़ुस्से में हैं. उनका कहना है कि उनकी राजनीति उनके मार्क्सवादी पिता से बहुत अलग है. उनका कहना है, "मैंने अलग रास्ता चुना और मेरा नज़रिया भी अलग है."

परिवार कितने ज़िम्मेदार?

इस पूरे विवाद से सवाल उठता है कि लोगों के राजनीतिक विचारों को उनके परिवार किस हद तक आकार देते हैं.

जिन लोगों ने इस पूरे मामले में मिलिबैंड का साथ दिया है उन्होंने डेली मेल के ही तर्क का पालन करते हुए ये याद दिलाया है कि डेली मेल के मौजूदा मालिक के पूर्वज फ़र्स्ट विस्काउंट रॉदरमीर ने हिटलर से मुलाक़ात की थी और 1934 में ओस्वाल्ड मोस्ले के फ़ासीवादियों की तारीफ़ में एक लेख भी लिखा था.

दुनिया में कई प्रभावी राजनीतिक परिवार हैं. जो देश कुलीनों वंशों के शासन की परंपरा को बरसों पहले छोड़ चुके हैं वहां भी खास राजनीतिक परिवारों की दखल देखी जा सकती है. जैसे अमरीका का बुश परिवार जिसने अमरीका को दो राष्ट्रपति दिए हैं और भारत में गांधी परिवार जिसके तीन सदस्य भारत के प्रधानमंत्री रह चुके हैं.

लेकिन ऐसे नेताओं की भी कमी नहीं है जिन्होंने अपने पूर्वजों के विचारों को नकार दिया.

ब्रिटेन के कंज़र्वेटिव नेता और कैबिनेट मंत्री माइकल पोर्टिलो के पिता स्पेन के वामपंथी नेता थे जो गृहयुद्ध के दौरान वहां से भाग निकले थे.

लेबर प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली और टोनी ब्लेयर कंज़र्वेटिव परिवारों में बड़े हुए. (एटली के पोते अर्ल एटली अब हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में कंज़र्वेटिव नेता हैं.)

जवानी में विद्रोह की भावना के लिए और कुछ नहीं तो कम से कम विपरीत विचार तो ज़रूरी हैं ही. सिर्फ़ वामपंथी परिवारों में ही माता-पिता विचारों को आकार देने में अहम भूमिका नहीं निभाते.

Image caption सर निकोलस स्कॉट और विक्टोरिया स्कॉट में सार्वजनिक रूप से बहस हुई थी.

मार्गरेट थैचर अक्सर अपने पिता के रचनात्मक प्रभाव की चर्चा करती थीं. उनके पिता मेथडिस्ट प्रचारक थे और उनकी वजह से मार्गरेट थैचर को कड़ी मेहनत और किफ़ायत से खर्च करने पर काफी पुख्ता यकीन था.

चुनौतियां

ये सही है कि कई नेताओं के बच्चों की राजनीतिक दलों और विचारधाराओं में कोई दिलचस्पी नहीं होती.

कुछ कहते हैं कि वे अपने माता-पिता की दिलचस्पी न होने के बावजूद राजनीति में सक्रिय हुए.

रैचल जॉनसन ब्रिटेन के सबसे प्रमुख राजनीतिक परिवारों में से हैं.

उनके पिता स्टैनले कंजर्वेटिव पार्टी की ओर से यूरोपीय संसद के सदस्य थे.

उनके भाई बोरिस लंदन के मेयर और जो 10 डाउनिंग स्ट्रीट में पॉलिसी यूनिट के प्रमुख रहे.

लेकिन वो ज़ोर देकर कहती हैं कि जब वो बड़ी हो रही थीं तब राजनीति पर कभी कभार ही चर्चा होती थी. जबकि उनकी मां लेबर पार्टी समर्थक थीं. वो कहती हैं, "हमारा घर राजनीतिक रंग में रंगा हुआ नहीं था, मुझे सिर्फ़ ये याद है कि मैंने अपने पिता के लिए प्रचार किया था, इसलिए नहीं कि वो कंज़र्वेटिव थे बल्कि इसलिए कि वो मेरे पिता थे."

मिलिबैंड परिवार की राजनीतिक सफलता इस बात का सबूत कही जा सकती है कि राजनीति पिता से बेटे को आसानी से नहीं मिल सकती.

हालांकि एड ने गर्मजोशी से उन "मूल्यों" का जिक्र किया था जो उन्हें बड़े होते हुए मिले. वो लेबर पार्टी के शीर्ष तक पहुंचे हैं हालांकि उनके पिता मानते थे कि लेबर पार्टी कभी सामाजिक परिवर्तन हासिल नहीं कर सकती.

नाज़ुक हालात

इसके बावजूद जब बच्चे अपने माता-पिता के राजनीतिक रास्तों से हटते हैं तो उनके सामने नाज़ुक हालात पैदा हो जाते हैं.

साल 1994 में सर निकोलस स्कॉट कंज़र्वेटिव सरकार में मंत्री थे. उनकी सबसे मुखर आलोचक उनकी बेटी विक्टोरिया थीं.

विक्टोरिया लेबर पार्टी की सदस्य थी और उन्होंने एक बार सार्वजनिक रूप से अपने पिता की आलोचना की थी.

अब विक्टोरिया कहती हैं कि इससे तनाव पैदा हो गया था जबकि अपने परिवार में उन्हें स्वतंत्र रूप से सोचना सिखाया गया था. (बाद में सर निकोलस ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है.)

वो कहती हैं, "हम इस भावनात्मक और निजी झगड़े के लिए तैयार नहीं थे. परिवार में सब सोचते थे कि मैंने अपने पिता को धोखा दिया है, भले ही वो ऐसा न मानते हैं."

नॉटिंघम विश्वविद्यालय के एलियास दिनास ने विचारों के विकास पर माता-पिता के प्रभाव को लेकर शोध किया है.

दिनास का कहना है, "ऐसी कई किताबें हैं जिनमें कहा गया है कि आप के माता-पिता जितने राजनीतिक होंगे आप का भी युवा होने पर राजनीति में उतना ही रुझान होगा लेकिन इसकी ज़्यादा संभावना है कि आप बड़े होने पर अपने माता-पिता के विचारों को छोड़ देंगे."

अगर ये सच है तो अपने राजनीतिक विचार अपने बच्चों को देने का सबसे बढ़िया तरीका यही है कि इस बारे में चुप्पी साधे रखी जाए.

जाहिर है कि मिलिबैंड परिवार में ये विकल्प नहीं था.

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