ब्रिटेन पाकिस्तानी चरमपंथियों के निशाने पर: एमआई-5

  • 9 अक्तूबर 2013
Image caption एंड्र्यू पार्कर अप्रैल में सुरक्षा एजेंसी एमआई-5 के निदेशक बने थे.

ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसी एमआई-5 के निदेशक ने चेतावनी दी है कि ब्रिटेन में रह रहे हज़ारों इस्लामिक चरमपंथियों के लिये ब्रितानी जनता हमले के लिए एक आसान लक्ष्य हो सकती है.

अप्रैल में एमआई-5 की कमान संभालने के बाद उसके निदेशक एंड्र्यू पार्कर ने पहली बार सार्वजनिक भाषण दिया.

उन्होंने कहा, ''अल-क़ायदा और पाकिस्तान तथा यमन में इससे जुड़े संगठन ब्रिटेन के लिए सीधे और तात्कालिक ख़तरे हैं. .''

उन्होंने आगे कहा कि, ''सुरक्षा एजेंसियों को संचार के उन सभी साधनों पर नज़र रखनी चाहिए, जिन्हें चरमपंथी आजकल हमले के लिए इस्तेमाल करते हैं. ब्रिटेन में बड़े स्तर पर हमले हो सकते हैं.''

विवाद

पार्कर ने स्पष्ट किया कि पिछले एक दशक में सुरक्षा व्यवस्था में काफ़ी निवेश हुआ है, लेकिन वास्तविकता यही है कि एमआई-5 ने ब्रिटेन में तेज़ी से हो रही घुसपैठ के बहुत कम मामलों पर ध्यान दिया है.

उन्होंने कहा कि अभी भी बहुत सी चीज़ें सीखना बाक़ी है.

एमआई-5 में पिछले 30 सालों से काम कर रहे एड्र्यू पार्कर इससे पहले डिप्टी महानिदेशक थे और 2005 में लंदन में हुए विस्फोट के समय वो इसके आतंकवाद निरोधक डिवीज़न के निदेशक रहे.

अपने भाषण में उन्होंने अल-क़ायदा और दक्षिण एशिया व अरब प्रायद्वीप में इससे जुड़े संगठनों को ब्रिटेन के लिये त्वरित ख़तरा बताया.

उनके मुताबिक़ पाकिस्तान और यमन में मौजूद ये चरमपंथी तत्व, पाकिस्तान और यमन में पिछले चार सालों में हवाई मार्ग से तीन गुना ज्यादा विस्फोटक की तस्करी करने में सफल रहे हैं.

सीरिया में चल रहे संघर्ष पर पार्कर ने कहा कि सीरिया जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति से एमआई-5 ने पूछताछ की थी.

उन्होंने कहा कि सीरिया में चरमपंथी सुन्नी समूह पश्चिमी देशों पर हमला करने के इच्छुक थे.

एयरपोर्ट पर पूछताछ

उनके अनुसार, ''पश्चिमी देशों के लिए यह शुरु से ही चिंता का विषय रहा है कि ब्रिटेन से सीरिया गए जिहादी, नए गुर सीखकर वापस आने के बाद यहाँ की जनता पर क़हर बरपाएंगे.''

ब्रिटेन आने वाले लोगों को रोककर एयरपोर्ट पर पूछताछ की जा रही है और कई लोगों को चरमपंथी होने के शक पर गिरफ़्तार भी किया गया है.

पार्कर ने कहा, ''11 सितम्बर 2001 से 31 मार्च 2013 के दौरान 330 लोगों को आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होने का दोषी पाया गया है. इस साल आतंकवाद से संबधित चार बड़े मामलों की सुनवाई हुई.''

इन मामलों में लंदन में हुए 7/7 के हमले की तरह एक और हमला करने की योजना भी शामिल थी. उन्होंने कहा कि अब तक 24 चरमपंथियों को 260 साल से ज्यादा की सज़ा सुनाई जा चुकी है.

तकनीक का फ़ायदा

उन्होंने कहा कि, ''चरमपंथी अब ई-मेल, आईपी टेलीफ़ोनी, सोशल नेटवर्किंग, चैटिंग सेवाओं और मोबाइल में मौजूद अनगिनत संचार के साधनों का प्रयोग भी कर रहे हैं''.

पार्कर के मुताबिक़ अगर सुरक्षा एजेंसियों को देश की हिफ़ाज़त करनी है तो एमआई-5 के लिए संचार की सभी जानकारियां हासिल करना बहुत ज़रूरी है.

अमरीका और ब्रिटेन दोनों के ख़ुफ़िया अधिकारियों को उस समय निराशा हाथ लगी थी जब अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के पूर्व कर्मचारी एडवर्ड स्नोडेन ने ख़ुफ़िया डाटा हासिल कर, रूस में शरण ले ली थी.

पार्कर ने कहा, ''ब्रिटेन की संचार सुरक्षा एजेंसी जीसीएचक्यू के पास मौजूद लगभग अट्ठावन हज़ार ख़ुफ़िया फ़ाइलों ने पिछले दशक में ब्रिटेन को कई हमलों से बचाया है.''

अंत में, पार्कर ने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि आतंकी हमले का ख़तरा पहले से ज्यादा बढ़ गया है लेकिन अब यह ख़तरा अधिक अप्रत्याशित और अधिक जटिल हो गया है."

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