20वीं सदी की पहली 'सेक्स सिंबल'

अमरीका
Image caption जोसेफिन बेकर अपने दत्तक पुत्र के साथ पश्चिमी बर्लिन के एक स्टेज शो में.

वो अपने ज़माने की विद्रोहिणी थीं. रंगभेद के खिलाफ खड़ी एक स्त्री. बिंदास, दुविधामुक्त. अपनी शर्तों पर जीने वाली. जोसेफिन बेकर. एक डांसर, एक अभिनेत्री और 20वीं सदी की पहली 'सेक्स सिंबल'.

2 अक्टूबर, 1925. पेरिस का सॉन्ज अलिज़ा थिएटर खचाखच भरा हुआ था. दर्शक दीर्घा में यूरोप के कुछ प्रतिष्ठित और सभ्य लोग बैठे थे. इनमें लेखक, कलाकार और संगीत संयोजक भी शामिल थे. सभी डांस शो देखने आए थे.

शो शुरू हुआ. मंच पर 19 साल की जोसेफिन बेकर और डांस पार्टनर जोविएलिक्स की जोड़ी आई. वे दोनों लगभग निर्वस्त्र होते हैं. उनके कामुक नृत्य से सभी स्तब्ध रह जाते हैं.

जोसेफिन बेकर के दत्तक पुत्र जीन क्लूड बेकर ने बताया, "उनका उठना गिरना, एक दूसरे को स्पर्श करना, लोग अपलक निहार रहे थे. जैज़ की धुन पर थिरकती एक काली अमरीकी स्त्री शिष्ट गोरों की सभ्यता को चुनौती दे रही थी."

पहली काली 'सेक्स सिंबल'

भीड़ जोश में उठ खड़ी होती है और अमरीका की पहली काली 'सेक्स सिंबल' का जोर-शोर से स्वागत करती है.

जिनेट फ्लानल, न्यूयॉर्कर पत्रिका की पेरिस संवाददाता, बताती हैं, "वह मंच पर पूरी तरह निर्वस्त्र उतरीं. उनकी देह के बीचों बीच गुलाबी पंखों का बस एक नरम आवरण पड़ा था. देह का पोर पोर थिरक रहा था. एक काले आदमी के कंधे पर नाचती हुई एक काली स्त्री. और उनके हुस्न और नृत्य के सम्मोहन में चिल्लाते गोरे. उनकी देह में गज़ब की फुर्ती और लचक थी. चमकती, सम्मोहित करती काली देह. उस नई मॉडल ने यह साबित कर दिया था कि ब्लैक ब्यूटीफुल होता है. और मरदानें गोरे उनकी एक झलक के लिए परेशान थे."

जोसेफिन सुंदरता के स्थापित मापदंडों पर भले खरी ना उतरती हों, मगर उनकी मनमोहक शख्सियत ने कॉमेडी कोरस के क्षेत्र में अपनी छाप गहरी छाप छोड़ी. उनकी आंखें खूब मटकती थीं और अंगों में इस कदर उतार-चढ़ाव होता था मानों समूचा बदन रबर का बना हो.

साल 1922 में मात्र 16 साल की उम्र में जोसेफिन बेकर अमरीका के सबसे लोकप्रिय शो में शामिल हुईं और जल्दी ही देश की सबसे जानी मानी कोरस गर्ल बन गईं.

वे हर सप्ताह 135 डॉलर कमा रही थीं और ये काफी ज्यादा पैसा था, खास कर उन दिनों.

कमतर आंकी जाती थीं

लेकिन इसके बावजूद वे अमरीका के उन महंगे शोरूम में नहीं जा पातीं थीं जहां बाकी धनी गोरे अमरीकी जाते थे.

काले होने के कारण वे हर हाल में कमतर करके ही आंकी जाती थी. दोयम दर्जे के नागरिक जैसा व्यवहार उनके साथ किया जाता था.

फिर भी बहुत लोग ऐसे भी थे जो उनकी चमड़े के रंग की उपेक्षा नहीं करते बल्कि उन्हें बहुत पसंद करते थें.

अपनी पहली प्रस्तुति के एक ही महीने के बाद उनका नाम और मशहूर हो गया जब उन्होंने 'बनाना डांस' किया.

उनकी इस हंगामेदार प्रस्तुति ने अमरीका को और उत्सुक और किशोरों को उनका दीवाना बना दिया था.

जोसेफिन शायद ही कभी स्कूल गई हों. वे अपनी मां, जो कपड़े धोने का काम करती थी, की मदद किया करती थी. वे बताती हैं कि उन्होंने बचपन से गोरों के आगे झुकना ही सीखा.

वे कहती हैं, "मुझे लगता था कि मैं गोरों से कमतर हूं, क्योंकि लोग हमारे बारे में ऐसी ही बातें करते थें. दुनिया के कई दूसरे लोगों की तरह मुझे भी यही लगता था कि मैं उनके आगे कुछ भी नहीं हूं. कई बार मुझे कहा जाता था, कि गोरों को आंख उठा कर भी मत देखो."

उन्होंने खुद को इन रूढिवादी छवियों की कैद से बाहर निकाला.

कलमकारों की प्रेरणा बनीं

जोसेफिन बेकर की शख्सियत और जादुई हुस्न ने उस समय के मशहूर लेखक अर्नेस्ट हेमिंग्वे के साथ साथ कई जाने-माने लेखकों को प्रेरित किया.

कोई लेखक उन्हें 'आग' कहता है, तो कोई कहता है वे काफी प्रतिभाशाली और असाधारण व्यक्तित्व की मलिका हैं.

इस तरह वे कुलीन वर्ग की दुलारी बन गई थीं. हर गोरा उनसे प्यार कर बैठता था. उनसे संबंध बनाने को आतुर रहता था.

अपने प्रतिभा के बल पर वह अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में पहली काली अभिनेत्री भी बनीं. उस समय किसी काली स्त्री को फिल्मों में हमेशा बेहद मामूली भूमिकाएं ही मिला करती थीं. उन्होंने गायकी में भी अपना करियर शुरू किया.

सुपरस्टार बन सफलता के ऊंचे शिखर पर पहुंच कर भी वे अपनी जन्मभूमि को नहीं भूलीं.

खूबसूरत जासूस

Image caption अमरीका की पहली काली सेक्स सिंबल जोसेफिन फिल्मों में भी मुख्य किरदार निभाने लगी थीं.

साल 1937 में वे फ्रांस की नागरिक बन गईं. जब दूसरा विश्व युद्ध शुरू हुआ तो फ्रांसीसी गुप्तचर सेवा के प्रमुख ने उन्हें देश के लिए जासूसी करने को कहा. गुप्तचर विभाग को भरोसा था कि वे यूरोप के संभ्रात वर्ग तक आसान से पहुंच सकेंगी.

जोसेफिन के बेटे जीन क्लूड बेकर बताते हैं, "वे जर्मनी के दूतावासों में धड़ल्ले से पहुंच जाती थीं, क्योंकि वे एक स्टार थीं. वे बेरोक-टोक कहीं भी आ जा सकती थीं. जब उन्हें कोई जर्मन सिपाही रोकता, वे गीत गुनगना देती थीं."

देश के प्रति अपने इस योगदान के लिए उन्हें फ्रांस का सर्वोच्च सम्मान दिया गया.

12 अनाथ बच्चे गोद लिए

सुपरस्टार जोसेफिन बेकर के बाद के जीवन को रुढिमुक्त परिवार के रूप में ख्याति मिली.

उन्होंने दुनिया भर से 12 अनाथ बच्चों को गोद लिया. एक बड़े परिवार के रूप में उनको पाला पोसा.

बेकर का यह कदम रंग और जाति पर टिके भेदभाव को खत्म करने के लिए था.

12 अनाथ बच्चों में जीन क्लूड बेकर अंतिम बच्चे थे. उन्हें 14 साल की उम्र में गोद लिया गया.

जीन याद करते हैं, "हम बोगोंडी में रहते थें. पिता ने हमें छोड़ दिया था. वे पास आईं और मुझे प्यार से अपनी गोद में उठाते हुए कहा, तुम्हारे पिता नहीं तो क्या हुआ, आज से तुम्हारी दो-दो माएं हैं."

वे कहते हैं कि यह सब कल्पना से परे लगता है, मगर उनके जीने का ढंग यही था.

क्लूड बेकर उनके साथ तब तक रहे जब तक उनकी मृत्यु अप्रैल 1975 में नही हो गई.

(बीबीसी विटनेस कार्यक्रम के आधार पर)

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