देश जहाँ हर दसवां नागरिक किताब लिख रहा है

  • 14 अक्तूबर 2013
books, किताबें

आइसलैंड की आबादी तीन लाख से थोड़ी ज़्यादा है लेकिन यहां दुनिया में सबसे ज़्यादा लेखक हैं, सबसे ज़्यादा किताबें छपती हैं और किताब पढ़ने की प्रति व्यक्ति दर भी सबसे ज़्यादा है.

राजधानी में आपको हर तरफ़ लेखक मिलेंगे.आइसलैंडिक भाषा में एक कहावत है जिसका शब्दश: मतलब है कि हर किसी के पेट में एक किताब होती है या फिर हर कोई एक किताब को जन्म देता है.

हर दस में से एक आइसलैंड निवासी की किताब छपेगी. युवा लेखक क्रिस्टीन एरिकस्कडॉटिर मानती हैं कि ऐसे में हालात प्रतिस्पर्धात्मक हो जाते हैं.

वे कहती हैं, "हां, होड़ तो होती है. मेरी बात करें तो मैं अपनी मां और पार्टनर के साथ रहती हूं और दोंनो ही पेशेवर लेखक हैं. लेकिन आपस में मुक़ाबला ज़्यादा न हो इसलिए हम कोशिश करते हैं कि हमारी किताब हर दूसरे साल छपे."

आइसलैंड में गाथाओं का इतिहास है जो 13वीं सदी से शुरु हुआ. ये गाथाएं देश के उन नोर्स उपनिवेशियों की कहानी बताती हैं जो इस द्वीप में नौवीं सदी के अंत में आना शुरु हुए थे.

ये गाथाएं नैपकिन और कॉफ़ी के प्यालों पर लिखी जाती हैं. हर झरने से कोई प्राचीन नायक या नायिका की कहानी जुड़ी हुई है.

हर जगह कहानी, हर कोई लेखक

Image caption आइसलैंड में दुनिया में सबसे ज़्यादा लेखक हैं और सबसे ज़्यादा किताबें छपती हैं.

यहां तक कि आपको घुमाने वाले गाइड भी अपनी कविताएं सुनाते हैं और आपके टैक्सी ड्राइवर के पिता और दादा भी जीवनियां लिखते हैं. सार्वजनिक स्थलों पर बेंचों पर बारकोड हैं जिससे वहां बैठने पर आप अपने स्मार्टफ़ोन पर कहानी सुन सकते हैं.

रेक्याविक में किताब मेले के दौरान मैन बुकर पुरस्कार की विजेता, किरण देसाई भी मिलेंगी, डगलस कूपलैंड भी और आइसलैंड के अपने साहित्यिक सितारे गर्डुर क्रिस्टनी और स्योन भी.

अगला मैग्नुसडॉटिर नए आइसलैंडिक साहित्य केंद्र की प्रमुख हैं जो साहित्य और अनुवाद के लिए सरकार की ओर से मदद देता है.

अगला कहती हैं, "यहां लेखकों की कद्र होती है. वे अच्छा जीवन बिताते हैं. कुछ को तो तनख़्वाह भी मिलती है. लेखक आधुनिक गाथाएं, कविताएं, बच्चों की किताबें, साहित्यिक और उत्तेजक किताबें, सब कुछ लिखते हैं. लेकिन सबसे ज़्यादा तेज़ी अपराध से जुड़ी किताबों में हुई है."

आइसलैंड में किसी दूसरे नॉर्डिक देश के मुक़ाबले अपराध से जुड़े उपन्यासों की बिक्री दोगुनी है.

वजह

तो आखिर यहां किताबों और लेखकों की इस असाधारण संख्या की वजह क्या है?

इसकी वजह है बढ़िया लेखक जो अनोखे किरदारों वाली दिलचस्प कहानियां सुनाते हैं. साथ ही आइसलैंड की प्राकृतिक सुंदरता, उसके ज्वालामुखी, परी कथाओं जैसी झीलें-ये सब कहानियां के लिए सटीक पृष्ठभूमि हैं.

इसलिए शायद हैरानी की बात नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र के सांस्कृतिक संगठन यूनेस्को ने रेक्याविक को साहित्य का शहर घोषित किया है.

एक उपन्यासकार सोल्वी ब्योर्न सिगुर्डसॉन कहते हैं, "हमारा देश कहानीकारों का देश है. अपने प्राचीन काव्यों और मध्यकालीन गाथाओं की वजह से हमारे इर्द-गिर्द हमेशा से ही कहानियां रही हैं. वर्ष 1944 में डेनमार्क से आज़ादी मिलने के बाद साहित्य ने हमारी पहचान बनाने में मदद की."

Image caption आइसलैंड की प्राकृतिक सुंदरता और इसकी मध्यकालीन गाथाएं यहां के लेखकों की प्रेरणास्रोत हैं.

सिगुर्डसॉन कहते हैं कि साल 1955 में हालडॉर लैक्सनेस के साहित्य का नोबेल पुरुस्कार जीतने से आधुनिक आइसलैंडिक साहित्य दुनिया के नक्शे पर अंकित हुआ.

लैक्सनेस की लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्थानीय लोग अपनी पालतू बिल्लियों का नाम उनके नाम पर रखते हैं और उनका घर एक पर्यटक स्थल है.

लेकिन आइसलैंड में लेखकों की बढ़ती तादाद की वजह से प्रकाशकों पर काफ़ी दबाव है.

साल के इस समय, क्रिसमस से पहले, आइसलैंड में किताबों की बाढ़ आ जाती है क्योंकि इसी वक्त ज़्यादातर किताबें प्रकाशित होती हैं.

लोगों के घरों में किताबों की सूची भेज दी जाती है. हर किसी को क्रिसमस पर तोहफ़े में किताब मिलती है.

यूनेस्को सिटी ऑफ़ लिटरेचर परियोजना की मैनेजर क्रिस्टीन विडारडॉटिर कहती हैं, "यहां तक कि जब मैं हेयरड्रैसर के पास भी जाती हूं तो वहां भी वो लोग मुझसे मशहूर लोगों के बारे में जानकारी नहीं बल्कि क्रिसमस पर भेंट करने के लिए किताबों के बारे में पूछते हैं."

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