भारत के चलते नहीं मिली नेपाल के पांच शिखरों को मान्यता?

बीबीसी को जानकारी मिली है कि आठ हज़ार मीटर से ज्यादा ऊँचाई वाले पाँच पर्वत शिखरों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने के लिए नेपाल की कोशिश को फिलहाल आगे नहीं बढ़ाया जाएगा.

भारत और पाकिस्तान इस मुद्दे पर फैसला नहीं ले सके, जिस वजह से इस योजना पर रोक लग गई. इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहणऔर चढ़ाई संघ की वार्षिक बैठक में फैसला लिया जाना था.

नेपाल के पर्यटन में पर्वतारोहण का अहम हिस्सा है.

अगर नेपाल को अपनी नई चोटियों के लिए मान्यता मिल जाती तो इससे नेपाल को एक मिसाल कायम करने में मदद मिलती क्योंकि वो भविष्य में पर्वतारोहियों के लिए नई चोटियों को खोलना चाहता है.

एवरेस्ट की बात की जाए तो उस पर्वत शिखर के रास्तों पर काफ़ी भीड़ हो गई है और इस कारण पर्वतारोहियों के लिए नई चोटियों को खोलने की मांग हो रही है.

नेपाल प्रशासन को उम्मीद थी कि पर्वतारोहण की सर्वोच्च संस्था की पिछले हफ्ते हुई वार्षिक बैठक में यूआईएए पांच नई चोटियों को मान्यता दे देगा.

चोटियां

इनमें से तीन चोटियां दुनिया के तीसरे सबसे ऊंचे पर्वत कंचनजंगा पर हैं जिनमें से दो नेपाल-भारत सीमा पर हैं वहीं एक नेपाली क्षेत्र में अंदर आती है. इसके अलावा दो नई चोटियां माउंट एवरेस्ट के पास नेपाल-चीन सीमा पर है.

वहीं सबसे ऊंची नई चोटी यारलुंग खांग जिसे कंचनजंगा वेस्ट कहा जा रहा है, वो 8,505 मीटर ऊंची है और वो नेपाल में हैं.

नेपाल का कहना है कि उन्होंने अपनी इन पांच नई चोटियों के लिए चीन का समर्थन पहले ही हासिल कर लिया है.

नेपाल पर्वतारोहण संघ के पूर्व अध्यक्ष और यूआईएए के सदस्य आंग त्सेरिंग शेरपा का कहना है, ''भारत और पाकिस्तान भी इस मामले को लेकर सकारात्मक हैं लेकिन उनका कहना है कि उन्हें अपनी पर्वतारोहण संस्था से स्वीकृति पाने के लिए अधिक समय चाहिए और इसलिए इस पर बैठक में फैसला नहीं लिया जा सकता.''

यूआईएए ने साल 2012 में अपनी परियोजना अरुगा के तहत ये पहल की थी कि अगर किसी पहाड़ शिखर की ऊंचाई 8000 मीटर से ज्यादा होती है तो उसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिल सकती है. इस परियोजना में नेपाल ने अपने पांच और पाकिस्तान ने एक पर्वत शिखरों को सामने रखा.

लेकिन यूआईएए पर्वतारोहण आयोग के अध्यक्ष पिअर हब्लेट ने बीबीसी को बताया,'' इस मुद्दे पर चीन, भारत, नेपाल और पाकिस्तान की राय और सलाह लिए बगैर फैसला लेना संभव नहीं है. इसलिए मैंने उन देशों के यूआईएए सदस्यों को लिखा कि वो अपने स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करें.''

उनका कहना था कि उन्हें नेपाल पर्वतारोहण संघ और नेशनल पब्लिक अथॉरिटी से तुरंत और सकारात्मक जवाब मिला वहीं चीन भी अरुगा परियोजना के पक्ष में है लेकिन भारत का माउंटनेरिंग फाउंडेशन और पाकिस्तान एलपाइन क्लब अपने-अपने देशों में संबंधित प्रशासन से बात करेंगे और उन्होंने अधिक समय की गुजारिश की है.''

फैसला

जब इस बारे में बीबीसी ने इंडियन माउंटनेयरिंग फाउंडेशन के अध्यक्ष कर्नल एचएस चौहान से फैसले में देरी का कारण पूछा तो उनका कहना था, "ये इस मसले का एक पहलू है और इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कहूंगा.''

सूत्रों से पता चला है कि इस मुद्दे पर भारत में चर्चा हो रही है. इसका एक कारण जो दिया जा रहा है वो ये कि भारत में पड़ने वाला कंचनजंगा सिक्किम के लोगों के लिए धार्मिक महत्व रखता है और इसी क्षेत्र में ये पहाड़ पड़ते हैं.

सीमा पर पड़ने वाले इन पहाड़ों को मान्यता देने का मतलब ये होगा कि उस पर नेपाल के पर्वातारोही भी जा सकेंगे.

पाकिस्तान के पर्वतारोहण अधिकारियों का कहना है कि वे इस प्रस्ताव पर कोई फैसला नहीं ले सकते क्योंकि उनके पास क़ानूनी अधिकार नहीं है.

पाकिस्तानी एलपाइन क्लब के कार्यपालक सदस्य करार हैदरी का कहना है, ''हम इस मामले में स्वयं फैसला लेने की स्थिति में नहीं है क्योंकि पिछली सरकार के दौरान पर्यटन मंत्रालय को भंग कर दिया गया था और इस समय संघीय स्तर पर कोई संस्था नहीं है.''

उन्होंने कहा कि, "इस मसले पर हम पाकिस्तान सरकार के साथ काम कर रहे हैं और उम्मीद है कि यूआईएए की अगली आम सभा से पहले हम इस बारे में कोई निर्णय कर लेंगे."

पाकिस्तानी अधिकारियों ने पहले ही पाकिस्तान-चीन सीमा पर चिन्हित 8,000 मीटर ऊंची चोटी को अंतरराष्ट्रीय मान्यता देने की इच्छा जताई है. पाकिस्तानी अधिकारी ऐसी ही कुछ और चोटियों को मान्यता दिलाने की कोशिश भी कर रहे हैं.

दूसरी ओर शेरपा का कहना है कि कंचनजंगा की नई चोटी के प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं होता है तो नेपाल केवल तीन चोटियों के लिए मान्यता लेगा.

पर्यटन

उनका कहना था, ''पर्वतारोही नए रास्ते बना रहे हैं , नए लक्ष्य बना रहे है और ये हमारा दायित्व है कि नई पीढ़ी के लिए इसे और रोचक बनाया जाए.''

नेपाल के पर्यटन मंत्रालय में संयुक्त सचिव पूर्ण चंद्र भट्टाराई सरकार की पर्वतारोहण प्राधिकरण के भी प्रमुख हैं. उनका कहना है, हिमालय में कई ऐसी चोटियां है लेकिन हमें इसके लिए एक बेहतर सर्वेक्षण की जरुरत है.

उनका कहना था, ''हम एक विशेष परियोजना पर काम कर रहे हैं जिसकी शुरुआत जल्द ही होगी.''

नेपाल को बीते साल पर्यटन से हुई कुल 36 करोड़ डॉलर की आमदनी में पर्वतारोहण से होने वाली आय की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी थी.

अधिकारियों और पर्वतारोहण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नई चोटियों को खोला जाता है तो यह आंकड़ा काफी बढ़ सकता है.

नेपाली अधिकारियों का कहना है कि वो इस बात को लेकर सतर्क हैं कि नए पर्वतों से उन पर्वतारोहियों के पिछले रिकार्ड को किसी तरह की चुनौती न मिले, जो दुनिया भर में 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों पर चढ़ चुके हैं.

शेरपा ने बताया कि, "ऐतिहासिक रूप से मान्यता प्राप्त 8,000 मीटर से ऊंची चोटियों और नई चोटियों के बीच अंतर बनाए रखना महत्वपूर्ण है."

उन्होंने कहा कि अगर कोई सबसे ऊंचे सभी 14 पर्वतों पर चढ़ना चाहता है तो निश्चित रूप से उन्हें प्रत्येक पर्वत की मुख्य चोटी पर चढ़ना होगा है और नव चिन्हित सहायक चोटियों पर चढ़ना उनके लिए अनिवार्य नहीं है.

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