अफगानिस्तान के सिल्क रोड की खोज

Image caption अफगानिस्तान का बल्ख प्रांत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजे हुए है.

उत्तरी अफगानिस्तान का बल्ख प्रांत दुनिया की कुछ बेहद महत्वपूर्ण ऐतिहासिक विरासतों को सहेजे हुए है. इसके कुछ प्राचीन शहरों को दुनिया के सभी शहरों का जनक कहा जाता है. अपनी पहली यात्रा के करीब 10 वर्षों के बाद लीनी ओ डोनेल ने एक पुरातत्वविदों के एक दल के साथ इस इलाके का दौरा किया.

उत्तरी अफ़गानिस्तान के मैदानों में गर्म हवाओं और धुंधले रंग की धूल और उसके बीच महिलाओं के लहराते हुए बुर्के.

ये बल्ख के तराई इलाकों की समतल भूमि है, जिसके प्राचीन व्यापारिक मार्ग ने खानाबदोशों, योद्धाओं, साहसी लोगों और धर्म प्रचारकों का ध्यान अपनी ओर खींचा.

इन लोगों ने अपने पीछे यहां ऐसे रहस्यों को छोड़ा जिन्हें पुरातत्वविदों ने खोजना शुरू ही किया है.

शक्ति का केन्द्र

इस क्षेत्र के बदौलत हजारों सालों तक अफगानिस्तान एशिया में राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक शक्ति का केंद्र बना रहा.

पिछली बार साल 2001 में मैंने बैक्ट्रियन मैदान की यात्रा की. अमरीका में हुए 9/11 के हमले के बाद ब्रिटिश और अमरीकी फौजों की तालिबान के खिलाफ कार्रवाई शुरू होने के कारण मुझे वापस लौटना पड़ा.

Image caption बल्ख के ख्वाजा परसा मस्ज़िद में मरम्मत का काम जारी है.

अब मैं करीब 12 साल बाद अफ़गान और फ्रांसीसी पुरातत्वविदों के साथ दुनिया के कुछ बेहद पुराने और ऐतिहासिक महत्व के स्थलों की खोज में वापस लौटी हूं.

ये स्थल न सिर्फ अफ़गानिस्तान के अतीत के बारे में हमें बताते हैं बल्कि भारत और चीन में मानव सभ्यता के विकास पर भी रोशनी डालते हैं.

बैक्ट्रियन मैदान अफगानिस्तान के छिपे इतिहास का ख़जाना है. रेत के इन टीलों से सिकंदर की सेना गुजरी थी, उसने बल्ख के राजा को मारा और उसकी ख़ूबसूरत बेटी रोक्सेन से शादी की.

इसके करीब 1,500 साल बाद चंगेज़ खान का आगमन हुआ जिसने विविधता के केन्द्र रहे शहरों को धवस्त किया.

शहरी सभ्यता

करीब 3500 साल पहले एकेश्वरवादी धर्म की स्थापना करने वाले दार्शनिक ज़ोरास्टर यही रहते थे. 13वीं शताब्दी के महान कवि रूमी का जन्म भी बल्ख में ही हुआ था.

इन प्राचीन धरोहरों की उम्र का पता करने के लिए फ्रांसीसी पुरातत्वविद् अध्ययन कर रहे हैं.

दौलताबाद के पास एक छोटा सा गांव ज़ैदियां है. इस इलाके में तालिबान काफी सक्रिय हैं. इसलिए हम हथियारबंद सुरक्षा घेरे के साथ ही वहां जा सकते हैं.

हमारे सामने मिट्टी से बना हुआ एक अनाम टावर था. इसे 12 शताब्दी में बनाया गया था.

Image caption नौ गुंबदों वाली मस्ज़िद के अवशेष.

चश्मा-ए-शिफ़ा के मरु उद्यान में एन्विल के आकार की एक विशाल चट्टान शहरी सभ्यता का प्रमाण देती है, जहां ईसा से 600 साल पहले पारसी पुजारी हजारों लोगों की मौजूदगी में धार्मिक कर्मकांड करते थे.

तालिबान का असर

फ्रांसीसी पुरातत्वविद् यहां करीब पिछले 100 वर्षों से काम कर रहे हैं, हालांकि युद्ध के कारण उनका काम बाधित होता रहा है.

अफगानिस्तान में तालिबान का प्रभाव बढ़ने के कारण भी ऐतिहासिक खोजों में बाधा आई है क्योंकि तालिबान का मानना है कि अफगानिस्तान का इतिहास 7वीं सदी में इस्लाम के आगमन के साथ ही शुरू होता है.

हकीकत यह है कि अफगानिस्तान में इस्लाम ने बौद्ध धर्म की जगह ली. तालिबान ने साल 2001 में गौतम बुद्ध की प्रतिमा को गिराकर इतिहास के प्रति अपने निरादर को जताया था.

आज पुरातत्वविद् इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि अफगानिस्तान ने हजारों वर्षों तक दुनिया के बड़े हिस्से में समृद्धि और दर्शन को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

उनके लिए अतीत की महानता भविष्य के लिए एक उदाहरण है, और बल्ख में अतीत अपने पूरे शबाब पर है.

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