ऑनलाइन पोर्न: किस उम्र से बच्चों को मिले यौन शिक्षा?

  • 20 अक्तूबर 2013
Image caption लिनेट स्मिथ का पोर्न के बारे में शिक्षित करने का तरीका ही अलग है

ऑनलाइन पोर्नोग्राफी ने ब्रिटेन के प्राइमरी स्कूलों की चिंता बढ़ा दी है. कुछ स्कूल छात्रों को इस बारे में शिक्षित भी कर रहे हैं. बड़ा सवाल ये भी है कि इसकी सही उम्र क्या हो?

उत्तरी लिंकनशायर में बर्टन के कैसलडाइक प्राइमरी की मुख्य शिक्षिका रोजी पुग ने इसका असरदार तरीका निकाला है. वो छोटे बच्चों को इससे बचाने की बेहतर समझ विकसित कर रही हैं. उनके स्कूल में बच्चों को कम उम्र से ही इस बारे में शिक्षित किया जाने लगा है.

उन्हें डर है कि उनके छात्रों में कुछ ऐसे बच्चे हैं, जो गलत असर में आ सकते हैं क्योंकि उन्होंने कई परिवारों से ऐसी बातें सुनीं, जो आंखें खोलने वाली थीं.

ये डर तब और बढ़ा जब उन्होंने इस साल के शुरू में एक रिपोर्ट पढ़ी जिसके अनुसार एक तिहाई से ज्यादा स्कूलों में सेक्स और संबंधों पर उपयुक्त शिक्षा का अभाव उनमें यौन शोषण के साथ असंगत यौन व्यवहार का खतरा बढ़ा रहा है.

बीबीसी संवाददाता ने लिनेट स्मिथ के कैसलडाइक स्कूल में सात से नौ साल के बच्चों के बीच एक सत्र बिताया.

स्मिथ न केवल बच्चों को यौन शिक्षा देती हैं बल्कि आसपास के हम्बरसाइड, उत्तरी लिंकनशायर और यॉर्कशायर जैसे इलाकों की शिक्षकों को भी प्रशिक्षित भी करती हैं.

चित्रों के सहारे समझाना

उनका तरीका सहज-सरल है, वो हाथ से बने चित्रों का सहारा लेती हैं. हर चित्र को दिखाने के बाद बच्चों से थम्स-अप या अंगूठा नीचे कर अच्छी और खराब बातों पर प्रतिक्रिया जाहिर करने को कहती हैं.

लिनेट चित्रों वाले कार्डों के सेट को स्कूल के नए यानी चार साल के बच्चों से सेकेंडरी स्कूल में जाने वाले 10-11 साल तक के बच्चों को दिखाती हैं.

बच्चे इसे आनंददायक पाते हैं. कुछ हंसते हैं, कुछ चिढ़ से चिल्लाते हैं, लेकिन आधे घंटे के सत्र में 30 बच्चों की पूरी क्लास, टीचर और अस्सिटेंट शामिल होते हैं ताकि गंभीर मुद्दे सुलझाया जा सके.

Image caption चित्रों के सहारे पोर्न को समझाने का असरदार तरीका

वैसे ये सवाल भी है कि शिक्षित करने की सही उम्र क्या हो? नेशनल एसोसिएशन ऑफ हेड टीचर्स (एनएएचटी) के महासचिव रसेल हॉबी कहते हैं कि संभव है कि ये शिक्षा प्राइमरी के सभी बच्चों के अनुकूल नहीं हो. वह कहते हैं, '' मासूमियत बहुत कीमती है. लिहाजा ऐसी शिक्षा बहुत जल्दी नहीं दी जानी चाहिए.''

मिस स्मिथ कहती हैं कि वो उस उम्र को जानना चाहती हैं जहां पहुंचकर बच्चे इन प्रभावों में आने लगते हैं.

वैज्ञानिक नाम

वह कहती हैं , '' हमारा पहला कार्ड उस लड़की का है, जिसने कपड़े नहीं पहने हैं. ऐसा लग रहा है कि वह नहाने जा रही है.''

लिनेट बच्चों से इस लड़की के शरीर के उन अंगों की सूची बनाने को कहती हैं, जिन्हें नहीं छूना चाहिए.

जवाब मिलता है, 'विज़र' और 'लूसी'. वह प्रचलित शब्दों की बजाए वैज्ञानिक नामों के उच्चारण पर जोर देती हैं. गुप्तांग, लिंग और योनि का जिक्र आने पर सारी क्लास समवेत स्वर में गाती है.

लिनेट कहती हैं कि जानकारी और समझ से बच्चों को सुरक्षित रखा जा सकता है.

कार्डों में बताया गया है कि अच्छे और खराब स्पर्श क्या हैं. अच्छे स्पर्श पर बच्चे थम्स-अप करते हैं.

इसी तरह आपत्तिजनक चित्र आते ही पूरी क्लास एक साथ अंगूठा नीचे करके उसे खराब बताती है.

Image caption बच्चे इन चित्रों के संदेश को आसानी से समझते हैं

किसी से जरूर बताएं

अगले कार्ड में एक बड़े बच्चा कम उम्र के बच्चे को स्मार्टफोन पर डाउनलोड की गई एक गंदी तस्वीर दिखा रहा है.

बच्चे एक साथ चिल्लाते हैं, ''गलत, गलत, गलत.''

लिनेट बच्चों से कहती हैं,'' किसी को भी तुम्हें इस तरह की चीजें नहीं दिखाना चाहिए. अगर कोई ऐसा करे तो तुरंत किसी को बताओ.'' हर बच्चे से कहा जाता है कि वो ये सोचें कि ऐसा हो तो वो घर और स्कूल में किससे बताएं.

इसके बाद एक चित्र आता है, जिसमें सोफे के पीछे दो वयस्कों को पोर्न फिल्में देखते दिखाया गया है.

लिनेट कहती हैं, ''बहुत सी ऐसी फिल्में होती हैं जहां एक्टर बिना कपड़ों के होते हैं, जिसे बड़े हो रहे बच्चे देखना चाहते हैं लेकिन ये छोटे बच्चों के लिए नहीं है.''

इस पर क्लास में मौजूद एक बच्चा बोलता है, '' मेरा भाई ऐसी पिक्चर्स देखता है, वह 20 साल का है.''

लिनेट कहती हैं, ''ज्यादातर छोटे मासूम बच्चे ऐसे हैं, जो केवल अपने शरीर के बारे में जानना चाहते हैं, वो सेक्स से भयभीत होकर दूर भागते हैं. यहां तक की 14 साल की उम्र तक भी वो ऐसा ही करते हैं.''

लिनेट कहती हैं, '' मैं 90 के दशक के मध्य से ये सेक्स शिक्षा दे रही हूं और इन मामलों में विकास को देख रही हूं. वर्ष 2002 तक इंटरनेट हर किसी को सुलभ हो गया. कहीं अधिक युवा बच्चे पोर्नोग्राफीदेखने लगे. 10-11 साल के बच्चे अक्सर उत्सुकता से पूछते मिलते कि उन्होंने क्या देखा.

उनका कहना है कि कई बार ऐसा एक्सपोजर असंतुलित सेक्स व्यवहार की ओर धकेल देता है, जो बच्चे को सेक्स शोषण की ओर भी ले जाता है.

बच्चे शुरुआती उम्र में सेक्स के बारे में बहुत कम सवाल पूछते हैं, खासकर तब जबकि उन्होंने ऑनलाइन या मीडिया में कुछ देखा हो या जिसे वो नहीं समझते.

Image caption बच्चों से कहा गया इन्हें देखने से दूर रहें

वह तर्क देती हैं कि सेक्स और संबंधों पर शिक्षा की बहुत जरूरत है.

वो बच्चों से पहले अभिभावकों का सत्र भी बुलाती हैं जिसमें उन्हें समझाती हैं कि प्राइमरी स्कूल के शुरुआती बरसों में बच्चों को इस बारे में बताना कितना जरूरी है. अभिभावकों को भी बच्चों के ऐसे सवालों के सहजता से जवाब देने चाहिए. अगर जवाब नहीं है तो रिसर्च करिए और किताबों में इसे खोजिए.

हमेशा बच्चों से बात करिए

कभी ये मत कहिए कि जब तुम बड़े हो जाओगे तब इस बारे में बात करेंगे, क्योंकि ये कहने का मतलब होगा कि जाओ और गुगल पर इसे देख लो.

अगर वो महसूस करेंगे कि वो इस बारे में आपसे बात कर सकते हैं तो अपने किशोरवय बरसों में जानकारी के लिए आपके ही पास आएंगे.

कुछ मांओं ने कहा कि जब उन्होंने स्कूल के पत्र को पढ़ा तो घबरा गईं लेकिन लिनेट के स्पष्टीकरण ने उन्हें आश्वस्त किया.

एक मां ने कहा जब मैं स्कूल में थी तब ये हालात नहीं थे, अब तो टीवी पर सुबह सात बजे भी सेक्सपरोसा जाने लगा है. मैं नहीं जानती कि इसके बारे में कैसे बताया जाए लेकिन आपको बताना ही होगा.

एनएएचटी ने प्राइमरी स्कूलों में ऑनलाइन के खतरों पर बातचीत को जल्दी शुरू करने को कहा है लेकिन मिस्टर हॉबी कहते हैं कि बच्चों को आगाह किया जाए कि आनलाइन उन्हें क्या देखना चाहिए और इस बारे में उन्हें सलाह दी जाए.

वह कहते हैं कि स्कूलों में बच्चों को इन दुष्प्रभावों से बचाने और मासूमियत बरकरार रखने के बीच एक रेखा खींचनी जरूरी है. मिस्टर हॉबी कहते हैं कि इस बारे में पेरेंट्स से पूरी बातचीत के बाद ही किसी फैसले पर पहुंचा जाए.

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