हार्ट इम्प्लांट के ज़रिए था आंतकवादी हमले का ख़तरा: डिक चेनी

  • 22 अक्तूबर 2013
Image caption अमरीका के पूर्व उपराष्ट्रपति डिक चेनी ने बताया है कि उन्हें अपने हार्ट इम्प्लांट में इसलिए बदलाव करना पड़ा क्योंकि उन्हें आतंकवादी हमले का डर था.

हार्ट इम्पलांट और ‘आतंकवादी हमले’ का ख़तरा...सुनने में अजीब लग सकता है लेकिन अमरीका के पूर्व उपराष्ट्रपति डिक चेनी ने बताया है कि उन्हें अपने हार्ट इम्प्लांट में इसलिए बदलाव करना पड़ा क्योंकि उन्हें आतंकवादी हमले का डर था.

डिक चेनी के डॉक्टर जॉनथन राइनर ने चेनी को लगे इस उपकरण की वायरलेस प्रक्रिया को बंद कर दिया था ताकि कोई तकनीक के ज़रिए वायरलेस से छेड़छाड़ न करे. इस वजह से दिल का दौरा भी पड़ सकता था.

डॉक्टर राइनर ने एक कार्यक्रम में बताया था, “11 सितंबर 2001 में जब अमरीका में हमला हुआ था, उस दिन डिक चेनी के खून में पोटाशियम की मात्रा बहुत अधिक हो गई थी. ये मात्रा इतनी अधिक थी कि इससे दिल की धड़कन असामान्य हो सकती थी और दौरा पड़ सकता था. मुझे डर लगने लगा कि उस रात डिक चेनी की मौत हो जाएगी.”

'इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूर रहें'

एक सुरक्षा कंपनी डंबाला के अधिकारी एड्रियान कहते हैं, “इम्पलांटेबल कोर्डियोवरटर डिफ़िरिलेटर्स (आईसीडी) में इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल के ज़रिए छेड़छाड़ की जा सकती है. हालांकि चेनी पर हमले की आशंका कम ही थी.”

आईसीडी के ज़रिए दिल की धड़कन पर नज़र रखी जाती है और अगर धड़कन में अनियमितता दिखती है तो ये उपकरण दिल तक कम उर्जा वाली तरंग भेजता है, जिससे दिल सामान्य गति से धड़कने लगता है.

अमरीकी हार्ट एसोसिएशन ने भी आगाह किया है कि आईसीडी इस्तेमाल करने वाले लोगों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में ज़्यादा संपर्क में नहीं आना चाहिए. इसमें मोबाइल फ़ोन, मेटर डिटेक्टर भी शामिल हैं. हालांकि संस्था का कहना है कि रिस्क कम ही होता है.

बीबीसी से बातचीत में 'इंस्टीट्यूट ऑफ रिस्क मैनेजमेंट' के प्रवक्ता ने माना कि इन उपकरणों को सुरक्षित रखने की ज़रूरत है और इन्क्रिप्शन के ज़रिए डाटा को संभाल कर रखने की कोशिश की गई है.

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