इंटरनेट पर 'बच्चे जोखिम में'

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Image caption एक सर्वे के मुताबिक बच्चे इंटरनेट पर जोखिम भरे काम कर रहे हैं.

नौ से 11 साल के बच्चे इंटरनेट पर जोखिम भरे काम कर रहे हैं. एक सर्वे में इस ओर इशारा किया गया है.

कई बच्चे निजी जानकारी साझा कर रहे हैं और ऐसे गेम खेल रहे हैं जो काफ़ी बड़े बच्चों के लिए बनाए गए हैं, आईएससी-2 आईटी सिक्योरिटी एजुकेशन ग्रुप के सर्वे में ये बात सामने आई है.

इसके अलावा जिन 1,162 बच्चों पर ये सर्वे किया गया, उनमें से 18% का कहना था कि वे जिन लोगों से इंटरनेट पर मिले हैं उनसे वास्तविक जीवन में भी मिलने की उनकी योजना है.

इसी बीच, एक दूसरे सर्वे के मुताबिक इंग्लैंड में 55% बच्चे इंटरनेट पर डराने-धमकाने को रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा मानते हैं.

सुरक्षा विशेषज्ञों ने अभिभावकों से कहा है कि बच्चे ऑनलाइन क्या करते हैं उसमें शामिल होकर उन्हें सुरक्षित रखा जाना चाहिए.

आईएससी-2 संस्था के टिम विल्सन का कहना है, "प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे इंटरनेट के बारे में अपने माता-पिता से ज़्यादा जानते हैं." आईएससी 2 संस्था स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को इंटरनेट पर सुरक्षित रहने के बारे में बताती है.

विल्सन कहते हैं, "बच्चे असल में कई जोखिम भरे काम करते हैं जिनके बारे में शायद माता-पिता को भी पता नहीं होता. ऐसा नहीं है कि उनकी अभिभावकों के लिए कोई दुर्भावना होती है, बस बात यही है कि अभिभावक टेक्नोलॉजी को नहीं समझते."

देर रात तक काम

इस सर्वे से ये भी पता चला है कि बच्चे ऑनलाइन कितना वक्त बिताते हैं और क्या करते हैं.

Image caption सर्वे के मुताबिक बच्चे ऑनलाइन जो काम करते हैं उनके बारे में अक्सर माता-पिता को नहीं पता होता.

सर्वे में पता चला कि 43% बच्चे हर रोज़ ऑनलाइन होते हैं और 46% बच्चे हर बार जब ऑनलाइन हुए तो उन्होंने दो घंटे से ज़्यादा वक़्त बिताया.

22% बच्चों ने कहा कि वे हर रात 9 बजे के बाद इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं और 7% का कहना था कि वे आधी रात के बाद भी ऑनलाइन रहते हैं.

कुछ ने कहा कि देर रात तक ऑनलाइन रहने की वजह से क्लास में उनका ध्यान नहीं लगता.

इंटरनेट पर सबसे ज़्यादा लोकप्रिय गतिविधि वीडियो गेम खेलना है, 23% बच्चे वीडियो गेम खेलते हैं.

वहीं 18% बच्चे सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर जाते हैं और 17% बच्चे वीडियो देखते हैं.

जिन 19% बच्चों ने कहा कि वे ऑनलाइन वॉर गेम खेलते हैं उनमें से कई का कहना था कि वे ऐसे गेम खेलते हैं जो उनकी उम्र के लिए ठीक नहीं है. जैसे कि 18 साल से ज़्यादा उम्र वालों के लिए बने गेम ब्लैक ऑप्स और मॉडर्न वॉरफेयर.

'बड़े नहीं समझते'

Image caption सर्वे के मुताबिक 18% बच्चे सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट देखते हैं.

ऑस्लो विश्वविद्यालय की डॉक्टर एलिज़ाबेथ स्टैकस्रड का कहना है कि ऑनलाइन दोस्तों से बच्चों की ज़्यादातर मुलाकात सकारात्मक अनुभव वाली रही हैं.

उन्होंने कहा, "कभी-कभार ही ऐसा होता है कि ऐसी मुलाकातें किसी तरह के शोषण से जुड़ी होती हैं." वह ये भी कहती हैं कि अभिभावकों को अक़सर ये पता नहीं होता कि ऐसी मुलाकात हुई है.

टिम विल्सन का कहना है, "बच्चों को बहुत ज्ञान होता है लेकिन वे बड़ों की तरह ये नहीं समझ पाते कि कौन सी चीज़ जोखिम भरी है."

एंटी बुलीइंग अलाएंस के सर्वे में 60.5% अभिभावकों ने कहा कि इंटरनेट पर डराना-धमकाना बच्चों के जीवन का हिस्सा बन चुका है.

लेकिन 40% अभिभावकों और 44% शिक्षकों ने माना कि उन्हें नहीं पता कि इस समस्या से कैसे निपटा जाए.

इंग्लैंड में 2,200 अभिभावकों, बच्चों और शिक्षकों के सर्वे के मुताबिक स्कूलों में ऑनलाइन सुरक्षा को पढ़ाने की मांग ज़ोर पकड़ती जा रही है. 69% शिक्षकों और 40% बच्चों का कहना है कि इसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए.

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