पाकिस्तान में स्कूली पाठ्यक्रम को लेकर विवाद

पेशावर
Image caption ख़ैबर पख़्तून ख्वाह में इस वक्त तहरीक-ए-इंसाफ़ और जमात-ए-इस्लामी पार्टी की गठबंधन सरकार है

पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत में सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में दो साल पहले कई बदलाव किए गए और किताबों से कई अंश हटाए गए थे.

इन बदलावों के बाद से ही वहां के सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम पर पाकिस्तान में चर्चा हो रही है और बीते कुछ दिनों में ये विवाद काफ़ी गहरा गया है.

पाठ्य पुस्तकों के बोर्ड के चेयरमैन फ़ज़लुर रहीम मरवात ने दो साल पहले किताबों में बदलाव किए जाने के समर्थन में कहा था, ''इन पाठ्य पुस्तकों ने हिन्दुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों के खिलाफ़ नफ़रत फैलाने में मदद की है और ग़लत इतिहास को बढ़ावा दिया है.''

पाठ्यक्रम में इन बदलावों के नतीजे में आवामी नेशनल पार्टी की तत्कालीन सरकार ने ऐतिहासिक नेता बादशाह खान पर लेख भी शामिल किया था. पश्तो कवि ग़नी ख़ान की रचनाओं को भी स्कूली सिलेबस में लाया गया.

लेकिन अब प्रांत में सरकार इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक़-ए-इन्साफ़ की है जिसकी सहयोगी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने मांग की है कि बादशाह खान पर लेख और ग़नी खान की रचनाओं को स्कूली पाठ्यक्रम से निकाला जाये. जमाते इस्लामी कहती है कि ये नेता विवादास्पद हैं.

क्या कहना है नेताओं का

आवामी नेशनल पार्टी के नेताओं का कहना है कि सरकार जमात ए इस्लामी के दबाव में आकर पाठ्य पुस्तकों से बादशाह खान और ग़नी ख़ान के लेख हटा रही है.

बादशाह खान जिन्हें 'सरहदी गाँधी' और 'फ्रंटियर गाँधी' के नाम से भी जाना जाता है, वो अविभाजित भारत में कांग्रेस के एक बड़े नेता थे और आज़ादी की लड़ाई में उन्होंने अग्रणीय भूमिका अदा की. वो महात्मा गाँधी के क़रीबी साथियों में से एक थे.

पूर्व शिक्षा मंत्री और आवामी नेशनल पार्टी के संसदीय नेता सरदार हुसैन बाबक ने बीबीसी को बताया कि, ''हाल में शिक्षा विभाग की एक बैठक में यह फैसला किया गया था कि स्कूल के सिलेबस में से कुछ लेख हटा दिया जाए. यह फैसला तहरीक-ए-इन्साफ़ पार्टी की सरकार में शामिल जमात-ए-इस्लामी के कहने पर किया गया था.''

बीबीसी से बातचीत में आवामी नेशनल पार्टी के एक नेता और पूर्व सूचना मंत्री मियां इफ़्तेख़ार ने कहा कि बादशाह खान को सिलेबस से हटाने की मांग जमात-ए-इस्लामी विचारधारा के फर्क के आधार पर कर रही है.

उन्होंने कहा, "हम दोनों की विचारधारा अलग-अलग है. वो चरमपंथियों के हमदर्द हैं. उनकी सोच अलग है. यही कारण है कि वो आज़ादी के एक हीरो को स्वीकार नहीं कर सकते."

लेकिन प्रांत के शिक्षा मंत्री आतिफ़ खान का कहना है, ''स्कूली किताबों में कोई बदलाव नहीं आया है, हमारी इस समय प्राथमिकता स्कूल की किताबों में फेर बदल करना नहीं है. स्कूलों और किताबों के स्तर को सुधारना और शिक्षकों को उचित ट्रेनिंग देना हमारी प्राथमिकता है."

लेकिन मियां इफ़्तेख़ार के अनुसार शिक्षा विभाग की बैठक का विवरण संबंधित विभागों को भेज दिया गया है जिसे शिक्षा बोर्ड ने रद्द कर दिया है. लेकिन उन्हें आशंका है कि जमात-ए-इस्लामी के दबाव में आकर सरकार पाठ्य पुस्तकों में फेरबदल कर सकती है.

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