चीन: राजनीति की 'गंदी दुनिया' साफ होगी?

चीन अब भी बहुत से लोग माओ के जमाने को याद करते हैं

चीन की राजधानी बीजिंग में खिली हुई धूप में कुछ बुजुर्ग एक पार्क में जमा होते हैं और अपने बचपन का एक गीत गाते हैं, जिनमें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक माओ त्सेतुंग की तारीफ़ की गई है.

वो गुनगुनाते हैं, “पहाड़ और नदियां मुस्करा रहे हैं, चेयरमैन माओ के विचार हमारा मार्गदर्शन कर रहे हैं.”

ये लोग सिर्फ़ माओ के दौर के संगीत को ही नहीं, बल्कि उस ज़माने की बहुत सारी बातों को अब याद करते हैं.

इनमें से एक ने कहा, “माओ भ्रष्ट अधिकारियों को गोली से उड़ा देते थे. लेकिन अब तो इतने सारे भ्रष्ट अधिकारी हैं और गोली चलने की कोई आवाज़ नहीं सुनाई पड़ती.”

"सरकार इस समस्या से निपटने के प्रति गंभीर नहीं है."

'बेशर्म जनता'

चीन में आम तौर पर लोग मानते हैं कि सत्ता के शिखर पर बैठे लोगों का जनता से कोई सरोकार नहीं है.

राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस सोच को बदलना चाहते हैं और इसके लिए वो माओ जैसी सुधार मुहिम चला रहे हैं. वो वरिष्ठ अधिकारियों से अपील कर रहे हैं कि चीनी राजनीति की गंदी दुनिया को साफ़ करें.

लेकिन ये काम आसान नहीं है. लगभग हर हफ़्ते नए घपले सामने आ रहे हैं, जिनसे सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी और आम लोगों के बीच खाई बढ़ती जा रही है.

हाल ही में चीन के गुशात्सी प्रांत में कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख लियांग वेनयोंग का एक विवादास्पद बयान सामने आया.

उन्होंने कहा, “उनके प्लेट चावल से भरी हैं, और मुंह में गोश्त है, लेकिन खाना खाने के बाद वो सरकार बुराई करते हैं. चीनी जनता बेशर्म है और उनका सम्मान करने की कोई जरूरत नहीं है.”

एक आलीशान रेस्त्रां में बनाया गया उनका ये वीडियो जैसे ही लीक हुआ तो चीनी माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट वाइबो पर कुछ देर में ही नौ हजार लोगों ने अपनी नाराज़गी जताई.

बेशक इसके बाद लियांग वेनयोंग को पद से हटा दिया गया लेकिन प्रांत के अधिकारियों को राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उपदेश पढ़ने का आदेश दिया गया.

चीन के अख़बार अकसर पार्टी की बैठकों में दिए गए शी के भाषणों के कथनों का हवाला देते रहते हैं.

यही नहीं, पार्टी के बड़े नेताओं से कहा जा रहा है कि वो कम्युनिस्ट पार्टी का इतिहास पढ़े और लोगों के बराबर संपर्क में रहें.

'नियंत्रण की खातिर'

'चाइना पॉलिसी' नाम के एक शोध संस्थान के संस्थापक डेविड कैली कहते हैं कि शी की इस मुहिम का मकसद पार्टी की छवि को बेहतर बनाना है ताकि वो अपनी सत्ता को बरक़रार रख पाए.

कैली बताते हैं, “अगर आप सोचते हैं कि अधिकारी सिद्धांतों में विश्वास रखते हैं तो इससे उनकी वैधता बढ़ती है और फिर आप उनका अनुसरण करते हैं और उनकी आज्ञा को मानते हैं.”

किसी समय कम्युनिस्ट पार्टी के बड़े नेता रहे बो शिलाई को पिछले दिनों भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामले में हुई सज़ा विश्व मीडिया में छाई रही.

कैली कहते हैं, “शी जिनपिंग ने उन्हें हटाया, उन पर मुकदमा चला और एक व्यक्ति का शुद्धिकरण कर दिया, लेकिन एक स्टाइल को अपना लिया.”

इस स्टाइल से प्रतीत होता है कि जैसे सिर्फ मुहिम का नेता ही तय करेगा कि किन चीजों को साफ करने की जरूरत है, जबकि बहुत सारे कार्यकर्ता व्यापक सरकारी जवाबदेही के लिए दबाव बना रहे हैं, हालांकि उन्हें इसका खमियाजा भी भुगतना पड़ रहा है.

सैकड़ों ब्लॉगरों, विद्वानों और विद्रोहियों को हिरासत में रखा गया है.

'चाहिए बहादुर नागरिक'

शु छियोंग एक सम्मानित व्यक्ति हैं और कानून के प्रोफेसर रहे हैं. उन्हें जुलाई में गिरफ़्तार कर लिया गया.

जेल में तैयार उनका एक वीडियो बाहर आया है, जिसमें उन्हें कहते हुए दिखाया गया है, “समाज भले ही कितना सड़ा हुआ और हास्यस्पद हो, इस देश को बहादुर नागरिकों की जरूरत है जो इन बुराइयों के सामने खड़े हो सकें.”

शु के वकील सी वाइचांग अपने मुवक्किल की गिरफ़्तारी और सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए शी की कोशिशों के बीच सीधा संबंध देखते हैं.

वो कहते हैं, “पार्टी की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम का मकसद पार्टी के नियंत्रण को मजबूत करना है. शु छियोंग की गिरफ़्तारी का मकसद समाज पर नियंत्रण को मजबूत करना है.”

सी अपने मुवक्किल की रिहाई के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं. शु छियोंग की पत्नी गर्भवती हैं और ये उनका पहला बच्चा है. ऐसे में सी कहना है कि शु छियोंग की पत्नी को उनकी बहुत जरूरत है.

'माओ के लिए भी मुश्किल'

उधर बीजिंग के थुआचिएहू पार्क में कुछ लोग बीते जमाने के गीतों का आनंद उठा रहे हैं. लेकिन वो ये भी सवाल करते हैं कि पार्टी की मौजूदा समस्याओं से निपटने में क्या शी को माओ से कुछ मदद मिल सकती है.

एक व्यक्ति का कहना है, “अगर जीवित होकर माओ भी आ जाएं, तो अब उनके लिए भी वो काम करना मुश्किल होगा जो उन्होंने पहले किए थे. अब अलग समय आ गया है.”

शी जिनपिंग अलग दौर से निपट रहे हैं और उनका सामना नए जमाने की कई मुश्किलों से है.

चीन के मौजूदा नेता माओ त्सेतुंग के अंदाज़ में व्यवस्था की साफ सफाई में जुटे हैं, लेकिन व्यापक भ्रष्टाचार और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से होते हुए लोगों के मोहभंग से निपटने के लिए उन्हें न सिर्फ अपना अंदाज विकसित करना होगा, बल्कि अपने समाधान भी तलाशने होंगे.

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