पाकिस्तान: सहमे ईसाई चाहते हैं शरण का हक

पाकिस्तान के अल्पसंख्यक ईसाई

पाकिस्तान के अल्पसंख्यक ईसाईयों को यूरोप में शरण देने की माँग की जा रही है. पिछले महीने पाकिस्तान में चर्च पर हुए आत्मघाती बम हमले में अपने 25 रिश्तेदार गवां देने वाले एक ईसाई परिवार ने यह माँग की है.

ब्रिटेन के ग्रेटर मैनचेस्टर में रह रहे इस परिवार ने पेशावर के ऑल सेंट चर्च पर हुए हमले पर ब्रितानी सरकार की चुप्पी की आलोचना भी की.

पकिस्तान में ईसाई अल्पसंख्यकों पर हमले कई बार हो चुके हैं लेकिन यह हमला सबसे भयावह माना गया. पूरे विश्व में इसकी चर्चा हुई. इस हमले में 80 से ज़्यादा लोग मारे गए थे 100 से अधिक घायल हुए थे.

ऑल सेंट चर्च में प्रार्थना कर रहे 600 लोगों को दो आत्मघाती हमलावरों ने निशाना बनाया था.

ड्रोन हमलों का बदला

Image caption पाकिस्तान में अमरीका के ड्रोन हमलों का विरोध अक्सर होता है

पकिस्तान तालिबान से जुड़े एक गुट ने इसकी ज़िम्मेदारी लेते हुए कहा कि यह हमला अमरीकी ड्रोन हमलों का बदला लेने के लिए किया गया था. इस हमले में बोल्टन में रहने वाले रेवरेंड फ़य्याज़ अदमान और उनकी पत्नी गज़ाला के परिवार के 25 लोग मारे गए थे.

पेशावर चर्च पर हुए हमले में बचे लोगों के लिए आर्थिक सहायता इकठ्ठा करने के मकसद से पिछले दिनों मैनचेस्टर में एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ. इस मौके पर फ़य्याज़ अदमान और उनकी बीवी गज़ाला ने उस घटना की तस्वीरों की डीवीडी चला कर दिखाई.

फ़य्याज़ ने कहा, "यह बहुत परेशान कर देने वाला है. 22 सितंबर के बाद मेरा जिंदगी को देखने नज़रिया बदल गया. जब भी मैं ये तस्वीरें देखता हूँ तो बहुत परेशान हो जाता हूँ."

तस्वीरों में हमले में घायल और खून से लथपथ लोग हैं. फ़य्याज़ को एक दोस्त ने फोन करके बताया था कि उनके 25 से ज्यादा लोग मारे गए हैं.

फ़य्याज़ बताते हैं, "हारून ने मुझसे कहा कि दिलावर की बेटी की बहुत गंभीर हालत है. उन्हें तुरंत मदद चाहिए." गज़ाला कहती हैं, "खालिदा शेख आठ माह की गर्भवती थीं और उन्होंने इस हमले की वजह से अपना बच्चा खो दिया, उन्होंने अपना पैर भी खो दिया है."

'अकेलापन और दर्द'

Image caption यही है पेशावर का ऑल सेंट चर्च चर्च जहाँ आत्मघाती हमला हुआ था

इस हमले की गंभीरता को देखते हुए गज़ाला ब्रितानी अधिकारियों की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आने से निराश हैं.

गज़ाला कहती हैं, "मैं सच में बहुत ही अकेलापन और दर्द महसूस करती हूँ. ब्रितानी दफ्तर की तरफ से पाकिस्तानी इसाई समुदाय के लिए एक भी बयान नहीं आया. सहानुभूति की कोई बात नहीं की गई.

वह कहती हैं, "पाकिस्तानी इसाई समुदाय इस समय मुश्किलें झेल रहा है और मैं अपने प्रधानमंत्री का भी इंतज़ार कर रही हूँ कि कब वो कहेंगे कि आप चिंता मत करो हम आपके साथ हैं. "

ब्रितानी विदेश मंत्रालय ने बीबीसी को बताया कि फेथ एंड कम्युनिटी मंत्री बारोनेस वारसी की तरफ से एक बयान जारी किया गया था जिसमें इस हमले को कायरतापूर्ण बताया गया था और उन्होंने परिवारों को शोक संदेश भेज था.

फ़य्याज़ ने कहा, "हमें पाकिस्तान में अपनी मौजूदगी के बारे में सोचना होगा. साथ ही हमें जिनेवा सम्मेलन से यह मामला दोबारा शुरू करने की याचिका करनी होगी. जब वो अहमदी और शिया समुदाय को राष्ट्रमंडल देशों में शरण देने पर विचार कर सकते हैं तो ईसाईयों को भी सामान अवसर मिलना चाहिए."

इस बीच अदमान हमले में बचे लोगों की मदद के लिए राशि जमा करने के प्रयासों में जुटे हैं. पाकिस्तान में कुल आबादी का 1.6 प्रतिश लोग ही ईसाई हैं.

(बीबीसी हिंदी के एंड्रॉयड ऐप के लिए क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार