पाकिस्तान: नहीं रुक रहे हैं डॉक्टरों के अपहरण

  • 31 अक्तूबर 2013
पाकिस्तान में डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन
Image caption क्वेटा में डॉक्टरों के अपहरण के बढ़ते मामलों के खिलाफ़ लोगों में ग़ुस्सा है.

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा शहर में मुख्य सुरक्षा बल फ़्रंटियर कोर का मुख्यालय काफ़ी सुरक्षित इमारत है. इस इलाके में कई पुलिस पोस्ट और सेना की नाकेबंदी भी हैं.

क्वेटा शहर में घुसने के और निकलने की जगहों पर भी सुरक्षा बल और पाकिस्तानी सेना का पहरा रहता है.

पाकिस्तान के मशहूर हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अब्दुल मुनाफ़ तरीन का अस्पताल फ़्रंटियर कोर के मुख्यालय के बेहद क़रीब है.

लेकिन हैरानी की बात ये है कि इतने कड़े सुरक्षा इंतज़ामों और नाकेबंदी के बावजूद बंदूक़धारियों ने कुछ समय पहले इस इलाक़े से डॉक्टर तरीन को अग़वा कर लिया.

डॉक्टर तरीन 17 सितंबर 2013 की शाम अपने अस्पताल से घर के लिए निकल रहे थे कि तभी वहां कुछ हथियारबंद लोग पहुंच गए और डॉक्टर तरीन से अपने साथ चलने को कहा. उनके इनकार करने पर इन लोगों ने उन्हें छाती पर बंदूक़ के कुंदे से मारा और खींच कर बाहर एक गाड़ी में डालकर वहां से भाग निकलने में कामयाब हो गए.

डॉक्टर तरीन पाकिस्तान के काफ़ी प्रतिष्ठित कार्डियोलॉजिस्ट हैं जिनसे पाकिस्तान के अलावा अफ़ग़ानिस्तान और ईरान तक से लोग इलाज करवाने आते हैं.

डॉक्टरों की नाराज़गी

Image caption डॉक्टर अब्दुल तरीन को क्वेटा के एक बेहद सुरक्षित इलाके से बंदूकधारियों ने अगवा कर लिया.

बलूचिस्तान में पहले से ही बढ़ रही अराजकता के बीच डॉक्टर तरीन के अपहरण ने वहां के मेडिकल समुदाय में गहरी नाराज़गी पैदा कर दी है.

अधिकारियों की कथित अनदेखी से नाराज़ प्रांत के डॉक्टर लगभग हर रोज़ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, वे भूख हड़ताल पर जा चुके हैं और सरकारी अस्पतालों का भी आंशिक रूप से बहिष्कार किया है.

लेकिन इस सबका अधिकारियों पर कोई असर होता नहीं दिख रहा. उल्टा इससे मरीज़ों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

ये पहला मौक़ा नहीं है जब बलूचिस्तान में किसी डॉक्टर को अग़वा किया गया है.

पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन की बलूचिस्तान शाखा के प्रवक्ता डॉक्टर आफ़ताब काकर बताते हैं कि पिछले पांच सालों में प्रांत के 26 डॉक्टर और प्रोफ़ेसरों का अपहरण हुआ है.

वे कहते हैं, "इनमें से ज़्यादातर फ़िरौती की रक़म अदा करने के बाद वापस लौट आए."

फ़िरौती देकर रिहाई

फ़िरौती देकर वापस लौटने वालों में क्वेटा के बोलन मेडिकल कॉलेज में मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉक्टर ग़ुलाम रसूल भी शामिल हैं. उन्हें शहर के बीच में एक भीड़-भाड़ वाली सड़क से छह हथियारबंद लोगों ने अग़वा कर लिया था.

डॉक्टर रसूल बताते हैं, "हर कोई देख रहा था लेकिन किसी में कुछ करने की हिम्मत नहीं थी." उनकी आँख पर पट्टी बांधकर, गाड़ी में डालकर, एक अनजान जगह ले जाया गया.

आगे क्या हुआ, डॉक्टर रसूल उस बारे में बात करना पसंद नहीं करते. वह बस यही बताते हैं कि 17 दिन तक बंधक बने रहने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया.

वे कहते हैं, "मेरे परिवार से मांगी गई फ़िरौती की रक़म इतनी ज़्यादा थी कि नौ महीने बाद भी हम उसे चुका रहे हैं."

अपहरण के ऐसे मामलों की वजह बताते हुए डॉक्टर रसूल कहते हैं, "इस क़बायली समाज के हम पढ़े-लिखे लेकिन कमज़ोर सदस्य हैं, हमें अमीर पेशेवर लोग समझा जाता है और इसलिए हम उन लोगों के निशाने पर आ जाते हैं जो जल्द-से-जल्द पैसा बनाना चाहते हैं."

इस सब के बावजूद डॉक्टर रसूल ने अपना काम बंद नहीं किया है. बस फ़र्क ये है कि अब अपनी सुरक्षा के लिए उन्होंने निजी सुरक्षाकर्मियों का इंतज़ाम कर लिया है.

बढ़ती हिंसा

Image caption डॉक्टर ग़ुलाम रसूल को उनके परिवार ने फ़िरौती देकर छुड़वाया.

हाल के सालों में बलूचिस्तान में हिंसा में बढ़ोतरी हुई है.

एक कट्टरपंथी सुन्नी चरमपंथी गुट ने अल्पसंख्यक शिया हज़ारा समुदाय के सदस्यों पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं. तालिबान और अल-क़ायदा से जुड़े कई आपराधिक और चरमपंथी गुटों ने दर्जनों लोगों को अग़वा किया है और हत्या की है.

ऐसा लगता है कि ये गुट बिना किसी डर अपना काम कर रहे हैं जबकि वहां सालों से चले आ रहे बलूच अलगाववादी विद्रोह से लड़ने के लिए हज़ारों पाकिस्तानी सुरक्षा बल मौजूद हैं.

फ़्रंटियर कोर पर संदिग्ध बलूच अलगाववादियों को ग़ायब करने, यातना देने और मारने के आरोप लगते रहे हैं. और अब क्वेटा में इस सुरक्षा बल पर आपराधिक गिरोहों को न सिर्फ़ बर्दाश्त करने बल्कि सुरक्षा देने के आरोप भी लगने लगे हैं.

लेकिन बलूचिस्तान फ्रंटियर कोर के इंस्पेक्टर जनरल, मेजर जनरल ऐजाज़ शाहिद इन आरोपों को ख़ारिज करते हैं.

अपहरण के मामलों में बढ़ोतरी के लिए वह ''आतंकवादी और उप-राष्ट्रवादी गुटों'' ज़िम्मेदार ठहराते हैं. लेकिन वो इस बात पर ज़ोर डालते हैं सुरक्षा कड़ी करने और आपराधिक गिरोहों का ख़ात्मा करने के लिए उनका सैन्य बल, पुलिस और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए नए क़दम उठा रहा है.

लेकिन क्वेटा की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वे इस तरह की बातें पहले भी सुन चुके हैं.

सुरक्षाबलों पर आरोप

Image caption क्वेटा में हाल के समय में हिंसा में बढ़ोतरी हुई है.

इन रैलियों से जुड़े एक डॉक्टर कहते हैं, "आधिकारिक तौर पर वे (सुरक्षा बल) हमें कहते हैं कि हम पूरी कोशिश कर रहे हैं लेकिन निजी तौर पर वे परिवारों को अपहरणकर्ताओं के साथ समझौता करने के लिए बढ़ावा देते हैं."

इस डॉक्टर का कहना है कि इस बात के सबूत मिल रहे हैं कि अक्सर सुरक्षा बल अपहरण के मामलों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं क्योंकि अपहरणकर्ता उन्हें पैसा देते हैं.

पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन के अनुमानों के मुताबिक़ पिछले पांच साल में बलूचिस्तान के लगभग 82 सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर और प्रोफ़ेसर प्रांत छोड़ कर जा चुके हैं. कहा जा रहा है कि इनमें से कई यूरोप और मध्य पूर्व चले गए हैं.

पाकिस्तान छोड़ कर जाने वाले ऐसे कई डॉक्टरों में डॉक्टर ग़ुलाम रसूल के भी कुछ दोस्त और सहयोगी थे.

डॉक्टर रसूल मानते हैं कि उनके मन में भी देश छोड़ने की बात आई थी. वे कहते हैं, "लेकिन फिर मैं ख़ुद से पूछता हूं कि अगर हम सभी चले जाएंगे तो इस प्रांत के लोगों की मदद के लिए कौन बचेगा."

फ़िलहाल डॉक्टर ग़ुलाम रसूल और उनके सहयोगी, डॉक्टर अब्दुल मुनाफ़ तरीन को छुड़ाने के लिए अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए अपने अगले विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं.

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