जर्मनी में बिजली के सरकारीकरण की मुहिम

  • 4 नवंबर 2013
बिजली का टावर

जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में एक महीने पहले हुए जनमत संग्रह में 51% मत उस एनर्जी ग्रिड को खरीदने के पक्ष में पड़े हैं जिन्हें शहर ने पहले बेच दिया था.

नब्बे के दशक में चली निजीकरण की लहर में जर्मनी में बहुत सी सरकारी नियंत्रण वाली कंपनियों को बेच दिया गया था.

सभी जगह सरकारों ने पावर स्टेशनों और विद्युत ग्रिडों को निजी हाथों में बेच दिया था.

तब यह तर्क चलता था- अगर करदाता निवेश और आधुनिकीकरण के भारी बिलों का भुगतान नहीं कर सकते तो क्यों न पूंजीवाद को इसका भार उठाने दिया जाए और फ़ायदा कमाने दिया जाए.

लेकिन अब जर्मनी में हवा उलटी चल रही है. जर्मनी के दूसरे सबसे बड़े शहर हैम्बर्ग में चर्च समूहों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के अभियान का असर यह हुआ है कि शहर ने बिजली के सरकारीकरण के पक्ष में वोट दिया.

अब राजधानी और जर्मनी का सबसे बड़ा शहर, बर्लिन, भी इसी राह पर चल सकता है.

अरबों का फ़ायदा

शहर का हर लैंपपोस्ट पोस्टरों से अटा हुआ है जिसमें नागरिकों को दो चीज़ों के लिए वोट करने को कहा गया हैः

1. बर्लिन में बिजली के लिए एक सार्वजनिक उद्यम स्थापित किया जाए जो प्रदूषणरहित स्रोतों से बिजली बनाए और इसे नागरिकों को बेचे.

2. नगर प्रशासन पर दबाव डालना कि वह ग्रिड को फिर से सार्वजनिक नियंत्रण में ले.

इस अभियान की एक मुख्य शक्ति एनर्गीटिश या ऊर्जा मंच नाम का समूह है. इसमें विभिन्न पर्यावरण समूहों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता शामिल हैं और यह समूह वर्तमान ऊर्जा प्रदाता वैटेनफ़ॉल से इसलिए नाराज़ है क्योंकि यह गैर-कोयला और ग़ैर-परमाणु ऊर्जा पर्याप्त मात्रा में प्रदान नहीं कर रहा था.

एनर्गीटिश का कहना है, "हम बर्लिन में ऐसा संयत्र चाहते हैं जो अक्षय ऊर्जा का उत्पादन करे और हम चाहते हैं कि ऊर्जा ग्रिड वापस सार्वजनिक नियंत्रण में आए."

विडंबना यह है कि वैटेनफ़ॉल दरअसल एक सरकारी कंपनी है- स्वीडिश सरकार की. हालांकि यह बाज़ार में अन्य निजी कंपनियों के तरह काम करती है.

एनर्गीटिश का कहना है कि पिछले साल वैटेनफ़ॉल का लाभ (पिछले साल करीब 12.83 अरब रुपये) स्वीडिश परमाणु और कोयला फ़र्मों की जेब में जाता है.

एनर्गीटिश के डॉ स्टीफ़न टेशनेर ने बीबीसी को बताया, "ग्राहकों को दामों में कमी, बेहतर गुणवत्ता और ग्राहक-केंद्रित सेवा का वायदा किया गया था. लेकिन इनमें से कुछ भी कभी नहीं मिला."

अपने हाथ में नियंत्रण

लेकिन इस बारे में संदेह है कि विद्युत ग्रिड होने से कोई भी नोट छाप सकता है.

बाकियों के अलावा नगर प्रशासक भी इसे लेकर बहुत उत्साहित नहीं हैं. बर्लिन पर 60 बिलियन यूरो (15.22 खरब रुपये से अधिक) का कर्ज़ है और नगर प्रशासन का कहना है कि ग्रिड वापस खरीदने से यह बोझ काफ़ी बढ़ जाएगा.

बर्लिन ने हाल ही में जलआपूर्ति को वापस ख़रीदा है और नगर प्रशासन को उम्मीद है कि बिजली को जोड़ने से वित्तीय भार बहुत ज़्यादा हो जाएगा.

जर्मनी में सार्वजनिक नियंत्रण को लेकर बदलाव आने की एक वजह यह भी है कि ऊर्जा उत्पादन को परमाणु ऊर्जा से सौर और पवन ऊर्जा में तब्दील करने की वजह से कीमतें तेजी से बढ़ी हैं.

बढ़ती कीमतों और अधूरी उम्मीदों के असंतुष्टि भरे इस माहौल में अनगिनत समूह सिस्टम का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की योजना बना रहे हैं.

जर्मन एसोसिएशन ऑफ़ पब्लिक यूटिलिटीज़ के अनुसार 70 से ज़्यादा नई सार्वजनिक रूप से चलने वाली सेवाएं पिछले छह साल में शुरू हुई हैं.

सार्वजनिक उपक्रमों ने स्थानीय लोगों को रोज़गार देने के 200 से ज़्यादा प्रोजेक्ट अपने हाथ में लिए हैं.

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