कौन हैं पाकिस्तानी तालिबान के नए नेता मौलाना फ़ज़लुल्लाह ?

मौलाना फ़ज़लुल्लाह, पाकिस्तानी तालिबान के नए नेता

मौलाना फ़ज़लुल्लाह को पाकिस्तानी तालिबान का नया नेता चुना गया है. कई दशक पहले पाकिस्तानी सरकार, शिक्षा और पोलियो ख़ुराक़ की रेडियो पर कड़ी निंदा करने वाले भड़काऊ भाषणों से वो चर्चा में आए थे.

39 साल के फ़ज़लुल्लाह उग्र विचारक हैं. वो एक धार्मिक नेता के रूप में काफ़ी कट्टर और पाकिस्तान सरकार के साथ किसी तरह का समझौता करने के विरोधी माने जाते हैं.

उनको कई चरमपंथी वीडियो में चाक़ू और बंदूक़ें लहराते हुए देखा गया. इन वीडियो में पृष्ठभूमि में सैनिकों की हत्या की जा रही थी.

मौलाना फ़ज़लुल्लाह ने साल 2012 में स्कूल जाने वाली किशोरी मलाला यूसुफ़ज़ई को गोली मारने का आदेश देने की ज़िम्मेदारी ली थी.

पाकिस्तानी सेना के उच्च अधिकारी मेजर जनरल सनाउल्लाह नियाज़ी की हत्या के पीछे भी उनका हाथ बताया जाता है.

प्रभावशाली व्यक्तित्व

एक बीबीसी संवाददाता ने जब साल 2009 में फ़ज़लुल्लाह से तिराह घाटी में उनसे मुलाक़ात की थी तो वे फ़ज़लुल्लाह की सक्रियता और पाकिस्तान में शरिया क़ानून लाने के उनके दृढ़ निश्चय को देखकर दंग रहे गए थे. एक लड़ाका होने के बावजूद वो ख़ुद को पहले एक विद्वान के रूप में देखते हैं.

बीबीसी संवाददाता ने बताया, "वो सशक्त व्यक्तित्व वाले, गंभीर और कट्टरपंथी हैं लेकिन उनका व्यवहार मित्रवत था और वो अपने मक़सद को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध थे."

लंबे क़द के मौलाना फ़ज़लुल्लाह संवाददाता से मिलने के वक़्त लड़ाकों से घिरे हुए थे. यह साफ़ दिखाई दे रहा था कि मीडिया के साथ बात करना उनको अच्छा लग रहा था.

पूर्व के तालिबानी नेता बैतुल्लाह और हकीमुल्लाह महसूद भी उनका काफ़ी सम्मान करते थे.

विश्लेषक उनको पूर्ववर्ती तालिबान नेता हकीमुल्ला से ज़्यादा क्रूर मानते हैं. एक ताज़ा साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि उनका अगला निशाना पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल अशफ़ाक़ कयानी होंगे.

पाकिस्तानी तालिबान ने पहली बार एक ऐसे व्यक्ति को नेता चुना है, जो पाकिस्तान के अस्थिर क़बायली इलाक़े की बजाए किसी और क्षेत्र से आता है.

स्वात घाटी की पहाड़ियां

मौलाना फ़ज़लुल्लाह तालिबान की स्वात घाटी में होने वाली गतिविधियों की कमान संभालते हैं. वो स्वात घाटी के रहने वाले हैं और यहाँ की पहाडियों में बड़े हुए हैं, जिसे अब ख़ैबर पख़्तूनख्वाह प्रांत कहा जाता है.

अपनी युवावस्था में वो चरमपंथी संगठन तहरीक़-ए-निफ़ाज़ शरीयत-ए-मोहम्मदी के संस्थापक मौलाना सूफ़ी मोहम्मद के संपर्क में आए.

उत्तरी पाकिस्तान में फ़ज़लुल्लाह चरमपंथी गुट के अगुआ बने और तालिबान को प्राकृतिक स्वात घाटी में बहुत मजबूत बना दिया.

सेना के आक्रामक हमले के बाद वहां से निकाले जाने के पूर्व साल 2007 से लेकर वर्ष 2009 के पहले तक स्वात घाटी के पूरे मालाकंड क्षेत्र पर उनका पूरा नियंत्रण था.

ख़बरों के मुताबिक़ फ़ज़लुल्लाह को युद्ध का पहला अनुभव साल 2001 में हुआ, जब उनको परामर्श देने वाले मौलाना सफी मोहम्मद हज़ारों लोगों के साथ उन्हें भी अमरीका से लड़ाई के लिए अफ़गानिस्तान ले गए थे.

वहाँ से वापसी के बाद उनको गिरफ़्तार कर लिया गया था. उन्हें 17 महीनों के लिए जेल में बंद रखा गया.

रेडियो वाले मौलाना

Image caption मौलाना फ़ज़लुल्लाह ने मलाला यूसुफ़ज़ई को गोली मारने का आदेश देने की जिम्मेदारी ली थी

जेल से उनकी रिहाई के समय पाकिस्तान में चरमपंथ अपने चढ़ाव पर था.

मौलाना फ़ज़लुल्लाह ने ग़ैर-क़ानूनी एफ़एम प्रसारण के माध्यम से लोगों को धार्मिक उपदेश देना शुरू किया.

उन्होंने कई दर्जन एफ़एम ट्रांसमीटर लगाए और उनका इस्तेमाल पूरे क्षेत्र में अपने संदेशों को फैलाने के लिए किया. संभवतः वह पहले धार्मिक नेता थे जो धर्म को रेडियो पर लाए.

यहां रेडियो पर अमरीका, पाकिस्तान सरकार, महिला शिक्षा, पोलियो के टीके के ख़िलाफ़ भाषण दिए जाते थे.

इन भाषणों में चरमपंथियों की प्रशंसा की जाती थी और शरिया क़ानूनों की आतिवादी व्याख्या की जाती थी. अपने करिश्माई और संगीतमय प्रसारणों से उनको क्षेत्र में अपने अनुयायी बढ़ाने में काफ़ी मदद मिली.

उनके भाषण को सुनने के बाद कुछ लोगों ने अपने घरों से टीवी सेट्स को घरों से बाहर फेंक दिया क्योंकि अपने भाषण में उन्होंने इसे ग़ैर-इस्लामी बताया था.

स्वात घाटी में रहने वाले अनेक लोगों ने उनसे प्रभावित होकर अपनी दाढ़ी बढ़ा ली थी.

उनके वर्तमान ठिकाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है लेकिन अधिकांश लोगों का मानना है कि वो अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर छिपे हो सकते हैं.

संभवतः अफ़ग़ानिस्तान के कुनार प्रांत या नूरीस्तान में उनके होने की उम्मीद जताई जा रही है.

कहाँ है फ़ज़लुल्लाह?

यहाँ के पहाड़ और गुफाएं छिपने के लिहाज़ से बहुत अच्छी हैं. इनका इस्तेमाल वर्ष 1980 में अफ़गान के मुजाहिदीन लड़ाकों ने सोवियत सेनाओं से हुई लड़ाई के दौरान किया था.

संवाददाताओं का कहना है कि फ़ज़लुल्लाह अफ़गान तालिबान के बहुत क़रीबी हैं और पाकिस्तान के तालिबान नेता के रूप में वे उनकी पसंद थे.

विश्लेषकों का कहना है कि एक विद्वान और धार्मिक नेता के रूप में उनकी छवि उनकी रुचियों के मुताबिक़ काम करने में मदद करेगी.

हलांकि अफ़गान और पाकिस्तानी तालिबानियों के अपने-अपने घरेलू मुद्दे हैं, विश्लेषकों की राय है कि मौलाना फ़ज़लुल्लाह के अफ़गान तालिबान के संस्थापक आध्यात्मिक नेता मौलाना उमर की सर्वोच्चता को मान लेनी की संभावना थी.

मौलाना फ़ज़लुल्लाह को कई बार ख़बरों में मृत बताया गया और उन्होंने मीडिया में व्यक्तिगत रूप से अपनी मौत का खंडन भी किया.

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