ईरान: बात बढ़ी लेकिन अभी बनी नहीं

  • 10 नवंबर 2013
ईरान, परमाणु कार्यक्रम
Image caption ईरान और दुनिया के प्रमुख देशों में 20 नवंबर को फिर से बातचीत शुरू होगी.

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दुनिया के प्रमुख देशों और ईरान के बीच कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है.

हालांकि यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख कैथरीन एश्टन ने कहा कि इस मसले पर काफी ठोस प्रगति हुई है लेकिन कुछ मतभेद अब भी बरकरार हैं.

इस बीच अमरीका के विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा, "हम पहले के मुकाबले सहमति के ज़्यादा क़रीब हैं और अब इस पर कोई संदेह नहीं है."

उनका कहना था कि जिनेवा में तीन दिनों की वार्ता के दौरान मतभेद थोड़े कम हुए हैं. केरी ने कहा, "कूटनीति में वक्त लगता है."

इस वार्ता की समन्वयक एश्टन का कहना था कि वे 20 नवंबर को फिर से बातचीत शुरू करेंगे.

ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ का कहना है कि वह इस वार्ता के निष्कर्ष से असंतुष्ट नहीं हैं और इस बातचीत के सार्थक नतीजे निकलने की गुंजाइश बाक़ी है.

उनका कहना था कि सभी पक्षों लगभग समान राय थी और सब सहमति के स्तर पर पहुंचना चाहते थे.

आगे का क़दम

Image caption ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण मकसद के लिए है.

विश्व के प्रमुख देशों को इस बात की चिंता है कि ईरान परमाणु हथियार तैयार करने की कोशिश कर रहा है लेकिन ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण मकसद के लिए है.

विकसित देशों ने यह प्रस्ताव दिया है कि ईरान परमाणु हथियारों के विस्तार को कम करे जिसके बदले उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में सीमित राहत दी जा सकती है.

पहले भी इन देशों के प्रतिनिधियों ने यह सुझाव दिया था कि बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है.

लेकिन राजनयिक सूत्रों का कहना है कि फ्रांस, ईरान के लिए कड़ी शर्तें चाहता है.

देर रात हुए संवाददाता सम्मेलन से पहले फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरें फ़ेबियस का कहना है कि तीन दिनों की वार्ता बिना किसी क़रार के ख़त्म हो गई.

उनका कहना था, "जिनेवा की बैठकों से ही इस राह में आगे बढ़ने की संभावना बनी है. लेकिन हम किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाए हैं क्योंकि अब भी कुछ ऐसे सवाल हैं जिन पर बातचीत करना बाकी है."

गुंजाइश बाक़ी

जॉन केरी ने कहा, "हमने न सिर्फ़ मतभेदों को कम किया है और जो बचे हैं उन्हें भी साफ़ किया है बल्कि इस सवाल का जवाब ढूंढने में भी प्रगति की है कि कैसे इस कार्यक्रम पर नियंत्रण किया जाए और इसे शांतिपूर्ण रखा जाए."

उनका कहना था कि कूटनीति की गुंजाइश अनिश्चित काल के लिए नहीं रह सकती है.

ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने दुनिया के प्रमुख देशों से यह गुहार लगाई थी कि वे सहमति बनाने के असाधारण मौके को न गंवाएं.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री विलियम हेग ने भी जल्द सहमति बनाने की बात कही.

जिनेवा वार्ता में ईरान के साथ पी5+1 देश शामिल हैं. पी5 देशों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्य अमरीका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन शामिल हैं इसके अलावा जर्मनी ने भी इस वार्ता में हिस्सा लिया.

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