'मैं किसको मार दूं कि मेरा बेटा वापिस आ जाए'

Image caption रोबी कहती हैं कि मारने वाले का अपना इतिहास भी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण रहा है. हमें दूसरे की भीतर की मानवता को देखना होगा

ये सोचना भी बेहद डरावना है कि अगर कोई बंदूक़धारी आपके बेटे पर हमला करे और उसकी मौत हो जाए, तो एक मां की प्रतिक्रिया क्या होगी.

इसरायली महिला रॉबी डैमलिन ने इससे उबरने के लिए जो रास्ता खोजा, वह नफ़रत के बजाय मिलाप का था.

साल 2002 में रॉबी का 27 वर्षीय बेटा वेस्ट बैंक में इसरायली सेना में अपनी सेवाएं दे रहा था, जब एक फ़लस्तीनी बंदूकधारी ने उसकी हत्या कर दी. बाद में इसरायल ने हत्यारे को पकड़कर जेल में डाल दिया.

आमतौर पर कोई भी माता-पिता इस दुखद घटना का बदला लेना चाहेगा, लेकिन रॉबी ने ऐसा नहीं किया.

वो अभिभावकों के एक फ़ोरम से जुड़ गई. इस समूह में इसरायल और फ़लस्तीनी सरहद के आरपार इस तरह का दुख झेलने वाले माता-पिता शामिल हैं, जो इलाक़े में शांति के लिए काम कर रहे हैं.

बेटे की हत्या

बीबीसी से बातचीत में रॉबी ने अपने बेटे के बारे में कहा ''डेविड तेल अवीव विश्वविद्यालय में शिक्षा-दर्शन की पढ़ाई कर रहा था. वह शांति मिशन का हिस्सा था और कई मायनों में अग्रणी था.''

सेना में सेवाएं देने पर डेविड की मां रॉबी कहती हैं कि ''ये बेहद मुश्किल था. लोग बंदूक़ के पीछे के इंसान को कभी नहीं देख पाते. मुझे याद है मैं उसे बस तक छोड़ने गई थी, जहां बच्चों को सैन्य सेवाओं के लिए ले जाया जा रहा था और मैं सोच रही थी कि मेरा बच्चा जाएगा और बंदूक़ लेकर वो काम करेगा, जिसका उसकी शख़्सियत से कोई वास्ता नहीं.''

अपने बेटे की मौत की ख़बर मिलने की बात याद करते हुए उन्होंने कहा ''जिस दिन डेविड की मौत हुई उस दिन सुबह से ही मुझे एक अजीब सी बेचैनी थी. फिर सेना ने मुझे सूचना दी कि डेविड को मार दिया गया है और मैंने उनसे कहा कि मेरे बेटे के नाम पर किसी को मारा न जाए.''

अपने भीतर माफ़ कर देने की इस प्रवृत्ति पर रॉबी कहती हैं ''मेरे बेटे के साथ नौ और लोगों को भी मारा गया था. इसके बाद यह यात्रा शुरू हुई कि क्या किया जाए. मेरे अंदर बदला लेने की भावना कभी नहीं थी कि मैं डेविड को वापिस लाने के लिए किसकी हत्या करूं. हत्यारे ने डेविड को इसलिए नहीं मारा कि वह डेविड था. उसे पता होता, तो शायद वह उसे मारता ही नहीं''

हत्यारे को माफ़ी

Image caption एक बंदूकधारी ने वेस्ट बैंक में सैन्य सेवा दे रहे डेविड की हत्या कर दी

इसके बाद रॉबी ने यह सोचना शुरू किया कि कैसे दूसरे परिवारों को इस तरह की स्थिति से बचाया जाए. फिर वो जुड़ गईं पेरेंट्स सर्कल फ़ैमिली फ़ोरम से.

रॉबी बताती हैं कि ''इस समूह में 600 परिवार हैं. हर किसी ने अपने परिवार में किसी नज़दीकी रिश्तेदार को खोया है. हम इस बात में यक़ीन रखते हैं कि अगर हम मेल-मिलाप के लिए काम न करें तो शांति कभी नहीं होगी. हमें दूसरे के अंदर की इंसानियत को देखना होगा.

शायद इसी सोच ने रॉबी को ताक़त दी कि उन्होने अपने बेटे के हत्यारे को छोड़ने का समर्थन किया.

रॉबी कहती हैं ''मैं ऐसा कर पाई क्योंकि मैं सोचती हूं कि शांति की बातें करते हुए घूमना बहुत आसान है लेकिन इसका कोई असर नहीं है अगर मैं वह नहीं कर सकती जो मैं कह रही हूं.''

रॉबी कहती हैं यह काफ़ी बड़ी दुविधा थी, लेकिन उन्होंने सोचा कि यह मेरी ईमानदारी की सच्ची परीक्षा थी.

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