फिलीपींस में पत्रकार बने संदेशवाहक

तूफ़ान से बचे लोगों के संदेश

फ़िलीपींस में आए विनाशकारी तूफ़ान हेयान से बचे एक व्यक्ति ने एक पेपर प्लेट पर अपने नाम के साथ ज़िंदा लिखकर एक पत्रकार को दे दिया.

इस प्लेट की तस्वीर और ख़राब कागज़ों पर लिखकर पत्रकारों को सौंपी गईं ऐसी अन्य दुखी फ़रियादियों की तस्वीरें जीएमए न्यूज़ नेटवर्क पर पोस्ट की गई हैं. ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी प्रसारित हुई हैं.

इसी तरह अपने दो मासूम बच्चों की तलाश कर रही एक महिला की फ़ोटो को एक पत्रकार ने ट्विटर पर पोस्ट किया है.

अबिगेल कास्टिनस को अपने बच्चों के लिए खिलौने ले जाते दिखाया गया है. उनके बच्चे तूफ़ान आने के बाद से ग़ायब हैं.

तबाही

तूफ़ान से सबसे अधिक प्रभावित इलाके टेक्लोबान में मौजूद पत्रकारों ने घटना के बाद ख़ुद को तबाह और बर्बाद लोगों के बीच पाया. यहां लोगों के पास दुनिया से संपर्क स्थापित करने के लिए कोई साधन नहीं था.

पीड़ित लोग अपने रिश्तेदारों के पास पहुँचने के लिए बेताब थे. उन्होंने पत्रकारों को विस्तृत जानकारी देकर अपने प्रियजनों तक अपना संदेश पहुँचाने की अपील की. टेक्लोबान में क़रीब दस हज़ार लोगों के मारे जाने की आशंका है.

जीएमए न्यूज़ के जिग्गे मानिकैड तूफ़ान के बाद सबसे पहले ऑन एयर होने वाले पत्रकारों में से एक थे. तूफ़ान से मची तबाही की सजीव कहानी सुनाने के लिए वे छह घंटे तक पैदल चलकर पालो लेयटे के नज़दीकी सैटेलाइट प्वाइंट तक पहुँचे.

उन्होंने जैसे ही अपनी ख़बर ख़त्म की और कैमरा दूसरी तरफ घूमा तो कैमरे में तूफ़ान में ज़िंदा बचे हताश-परेशान लोगों का चेहरा सामने नज़र आया.

मनीला लौटने के बाद उन्होंने बीबीसी को फ़ोन पर बताया, ''मैंने लोगों से सीधे कैमरे पर अपनी बात रखने को कहा. उन्होंने बताया कि वे कौन हैं और उनके रिश्तेदार कौन हैं और वे कैसे उन तक पहुँचना चाहते हैं.''

रिश्तेदारों से संपर्क

लंबी यात्रा के बाद टेक्लोबान पहुँचने पर उन्हें तूफ़ान से बचे लोगों ने घेर लिया. वे अपने साथ अपना विवरण लिए थे. इसमें लिखा था कि वे कौन हैं, वे कहाँ रहते हैं और उनके रिश्तेदार कौन हैं. उन लोगों ने उनसे अनुरोध किया कि वो उनके रिश्तेदारों से संपर्क करें और उन्हें बताएं कि वे तूफ़ान से बच गए हैं.

इन संदेशों में कहा गया था, ''मैं ज़िंदा हूँ.'', ''चिंता न करें, हम ठीक हैं.'' ''आंटी, हमें मदद की ज़रूरत है.प्लीज़! हम ठीक हैं, लेकिन घर तबाह हो गया है.''

जिग्गे मानिकैड बताते हैं कि जब भी लाइव रिपोर्टिंग का मौक़ा मिला, मैंने लोगों के चेहरे दिखाए, जिन्होंने कैमरे पर संदेश दिया.

अंततः हम इन संदेशों को प्रसारित करने में कामयाब हुए.

मानिकैड ने बताया कि उन्हें कुछ ऐसे लोगों का जवाब भी मिला है, जो अपने रिश्तेदारों से संपर्क बना पाने में कामयाब हुए हैं.

जब तूफ़ान आया, तो मानिकैड शहर में थे और उन्हें लगा कि यह उनके जीवन का सबसे बुरा अनुभव हो सकता है.

वो बताते हैं, ''मैं अपने कमरे की छत देख रहा था और उसके टूटने का इंतज़ार कर रहा था. मुझे अंदाज़ था कि तबाही बहुत व्यापक होगी, लेकिन बरसात के पानी और तेज़ हवाओं की वजह से हम कुछ देख नहीं पा रहे थे.''

रिकॉर्डेड संदेश

वो बताते हैं, '' लोग हमसे कह रहे थे कि अगर उनका इंटरव्यू किया जाए, तो वे मदद के लिए अपनी बात रिकॉर्ड करवा सकते हैं. मैंने इन सबको कैमरे पर रिकॉर्ड किया.''

एरल काबाटबैट मनीला में पांच टीवी रिपोर्टर हैं. उन्होंने भी पाया कि वो रिपोर्टिंग के साथ ही अपने रिश्तेदारों से संपर्क करने को बेताब शहर के लोगों की मदद भी कर रहे हैं.

वो अभी सेबू से रिपोर्टिंग कर रहे हैं. वहाँ से उन्होंने बीबीसी को बताया,'' मेरी कॉपी के पन्ने उन लोगों के नंबरों से भरे हैं, जिन्होंने अपने रिश्तेदारों को संदेश भेजकर अपने कुशल होने की जानकारी देने के लिए मुझसे अपील की थी.''

उन्होंने बताया कि तूफ़ान से बचे लोगों ने नंबरों के साथ-साथ उन्हें अपने संदेश भी सौंपे. जैसे ही वो शहर छोड़ेंगे वो लोगों को संदेश भेजेंगे.

एक डॉक्टर की कहानी उनके दिमाग़ में कौंधती है, जो अपने घर से पांच किलोमीटर पैदल चलकर हवाई अड्डे पहुँचा था, जहाँ अस्थायी ठिकाना बनाया गया था. उस डॉक्टर के घर की छत तूफ़ान में तबाह हो गई थी.

वो कहते हैं, '' वह पूरी तरह भीगे और कीचड़ से सने हुए थे. उन्होंने मुझसे कहा कि अगर मैं सेबू जाऊं, तो कृपया उनके बच्चों से संपर्क करूं.''

एरल काबाटबैट बताते हैं, ''मैंने उनको संदेश भेजा और उसे अपने ट्विटर एकाउंट पर पोस्ट किया. उन्होंने मुझे फ़ोन किया और बताया कि वे उन्हें सुरक्षित ले जाने के लिए टेक्लोबाम पहुँच रहे हैं. ''

एरल काबाटबैट पूरे शहर में घूमे और लोगों के संदेशों को रिकॉर्ड किया. अन्य संदेशों को भी उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया. अगर किसी ने उन्हें मोबाइल नंबर दिया है, तो उन्होंने उस पर रिश्तेदारों को संदेश भी भेजे.

रिश्तेदारों की तलाश

जीएमए न्यूज़ के एक एडिटर ने बीबीसी को बताया कि मनीला में जीएमए न्यूज़ स्टेशन के बाहर लोगों की कतार लगी है, जो अपने रिश्तेदारों के बारे में जानना चाहते हैं.

उन्होंने बताया कि उनकी बेवसाइट पर लोगों को उनके रिश्तेदारों की तलाश में मदद करने के लिए एक माइक्रोसाइट बनाई गई है.

इसके अलावा फिलीपींस याहू न्यूज़ साइट तूफ़ान में ज़िंदा बचे लोगों की सूची प्रकाशित कर रही है. इसके अलावा कुछ अन्य जानकारियों को भी ऑनलाइन देखा जा सकता है.

टेक्लोबान इलाके का प्रतिनिधित्व करने वाले कांग्रेस के सदस्य फ्रेडिनांड मार्टिन भी अपने फ़ेसबुक पेज पर तूफ़ान पीड़ितों के रिश्तेदारों से संबंधित सूचनाएं प्रकाशित कर रहे हैं.

लेकिन तूफ़ान से प्रभावित इलाकों में काम कर रहे पत्रकार दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

वे वहाँ से ख़बरें भेजने के साथ-साथ तूफ़ान पीड़ितों और उनके रिश्तेदारों के बीच पुल का भी काम कर रहे हैं.

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