श्रीलंका सरकार के पास अभी भी मौका है: डेविड कैमरन

डेविड कैमरन, श्रीलंका यात्रा
Image caption श्रीलंका के उत्तरी प्रांत में तमिल अल्पसंख्यकों से बात करते ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है कि उन्होंने श्रीलंका के उत्तरी प्रांत की प्रतीकात्मक यात्रा इस इलाके में रहने वाले "तमिल अल्पसंख्यकों की समस्याओं की तरफ़ ध्यान दिलाने के लिए" की है.

शुक्रवार को श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में शुरू हुई राष्ट्रमंडल देशों के शासनाध्यक्षों की बैठक ( चोगम) के पहले श्रीलंका के गृहयुद्ध में तमिल अल्पसंख्यकों के साथ किए गए बरताव का मुद्दा छाया रहा.

ब्रितानी प्रधानमंत्री ने मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों के मद्देनज़र इस यात्रा को रद्द करने की माँग को नज़रअंदाज़ कर दिया था.

कैमरन ने श्रीलंकाई अधिकारियों से सभी श्रीलंकाइयों के संग "उदारता" दिखाने की अपील की. कैमरन ने कहा कि "सच कहने की प्रक्रिया" मेल-मिलाप के लिए आवश्यक है.

विधिवत जाँच

Image caption डेविड कैमरन ने राहत शिविरों का भी दौरा किया.

कैमरन ने ज़ोर देकर कहा कि वर्ष 2009 में समाप्त हुए गृहयुद्ध के आख़िरी चरण के दौरान हुए युद्ध अपराधों की विधिवत जाँच होनी चाहिए.

कैमरन वर्ष 1948 में श्रीलंका के आज़ाद होने के बाद उत्तरी श्रीलंका जाने वाले पहले अंतरराष्ट्रीय नेता हैं.

उन्होंने जाफ़ना स्थित एक पुस्तकालय का भी दौरा किया जिस पर संघर्ष के दौरान कई बार हमले हुए और कई बार उसे फिर से बनाया गया.

कैमरन ने उत्तरी प्रांत के नए मुख्यमंत्री एवं पूर्व न्यायाधीश सीवी विघ्नेश्वरम से भी मुलाकात की. विघ्नेश्वरम तमिल नेशनल अलांयस के नेता हैं.

डेविड कैमरन के साथ यात्रा कर रहे बीबीसी के राजनीतिक संपादक ने कहा ब्रितानी प्रधानमंत्री का स्वागत करने वालों में महिलाएँ ही प्रमुख थीं जिनका दावा था कि उनके रिश्तेदार संघर्ष के दौरान ग़ायब हो गए.

ये महिलाएँ ब्रितानी अधिकारियों के हाथों में अपने परिवारजनों की तस्वीरें देने को बेहद आतुर थीं.

कैमरन की इस यात्रा के दौरान श्रीलंका की वर्तमान सरकार के समर्थकों ने भी वर्ष 1948 के पहले के ब्रितानी शासन के दौरान किए गए शोषण के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया. कोलंबो वापस आने से पहले कैमरन ने राहत शिविरों की भी यात्रा की.

अख़बार और पत्रकार

Image caption श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ब्रिटेन के राजकुमार चार्ल्स का स्वागत करते हुए.

कैमरन उथयन समाचार पत्र के कार्यालय भी गए. उथयन के कार्यालय में इस साल की शुरुआत में आग लगा दी गई थी. इस अख़बार के पत्रकारों पर नियमित हमले भी होते रहे हैं.

इस मुलाकात के बाद कैमरन ने कहा, "दीवारों पर लगी मारे गए पत्रकारों की तस्वीर और ग़ायब हुए पत्रकारों की कहानियों की याद मेरे साथ रहेगी. कैंप में मिली युवा महिलाओं और बच्चों की छवि भी मुझे याद रहेगी."

कैमरन ने कहा कि श्रीलंका सरकार के पास मानवाधिकारों और राजनीतिक अधिकारों के बारे में कार्रवाई करने का अभी भी मौका है जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संतुष्ट किया जा सकता है.

कैमरन के कहा, "इस देश के पास सफल होने का अभी भी मौका है क्योंकि युद्ध समाप्त हो चुका है. चरमपंथ ख़त्म हो चुका है. लड़ाई बंद हो चुकी है."

डेविड कैमरन की श्रीलंका यात्रा से पहले श्रीलंका सरकार ने उन सुझावों के प्रति नाराज़गी जताई थी जिनमें कहा गया था कि ब्रितानी प्रधानमंत्री तीन दिनों तक चलने वाली चोगम बैठक में श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे पर मानवाधिकारों के मुद्दे पर दबाव बनाएंगे.

एक श्रीलंकाई मंत्री ने इस हफ़्ते की शुरुआत में कहा था कि ब्रितानी प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है.

इस सम्मेलन का उद्घाटन राष्ट्रमंडल की अध्यक्ष महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का प्रतिनिधित्व कर रहे राजकुमार चार्ल्स ने शुक्रवार को किया.

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